खुलेआम पैसे बांट रही सत्ता पार्टी: संजय राउत
शिवसेना यूबीटी सांसद ने चुनाव आयोग पर किया प्रहार

महाराष्ट्र में निकाय चुनाव का प्रचार खत्म, दोनों गठबंधनों में नोकझोंक जारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र में निकाय चुनाव का प्रचार खत्म हो गया है। दोनों गठबंधनों एक दूसरे को कोसने का कोई भी मौका नहीं छोडऩा चाहते हंै। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने चुनाव आयोग पर महायुति दलों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रचार समाप्त होने के बाद घर-घर अभियान की अनुमति देना, पैसा बांटने की खुली छूट है।
राउत ने इस कदम को आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुंबई में राउत ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने मंगलवार को आदर्श आचार संहिता लागू होने और आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रचार स्थगित होने के बावजूद घर-घर जाकर प्रचार करने की अनुमति दी।
राउत ने कहा कि कल चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। नियमों, कानूनों और आदर्श आचार संहिता के अनुसार, चुनाव प्रचार आधिकारिक तौर पर कल ही समाप्त हो गया था। लेकिन अचानक महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी आप घर-घर जाकर प्रचार कर सकते हैं। यह किस तरह का नियम है? यह सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे और अजीत पवार को घर-घर जाकर प्रचार करने के दौरान खुलेआम चंदा बांटने की अनुमति और छूट देता है।

बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए
राउत ने आगे आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में लगभग 60 लाख, उत्तर प्रदेश में लगभग 12.5 करोड़ और पश्चिम बंगाल में लगभग 54 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाम हटाने से चुनाव परिणामों पर असर पड़ सकता है। राउत ने कहा कि देखिए, बिहार में लगभग 60 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ है। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से लगभग सवा करोड़ नाम हटाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। और आपने पश्चिम बंगाल के लिए क्या आंकड़ा दिया है—54 लाख एक ही राज्य में 54 लाख मतदाताओं के नाम हटाने से चुनाव परिणाम बदल सकते हैं।
भाजपा निष्पक्ष रूप से चुनाव नहीं लड़ रही
भाजपा पर निष्पक्ष रूप से चुनाव न लडऩे का आरोप लगाते हुए राउत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू-मुस्लिम नारा विफल हो गया है और अब उसकी जगह प्रवर्तन निदेशालय बनाम तृणमूल कांग्रेस का नारा ले चुका है। महाराष्ट्रमें बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), पुणे नगर निगम (पीएमसी) और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) सहित 29 नगर निगमों के चुनाव होने जा रहे हैं। मतदान 15 जनवरी को होगा और मतगणना 16 जनवरी को होगी।
गृहकर भुगतान में अब भी खत्म नहीं हुई मनमानी
लखनऊ नगर निगम में चेक पेमेंट पर आदेश बेअसर, करोड़ों के नुकसान की आशंका फिर गहराई
पूर्व नगर आयुक्त का सख्त आदेश फाइलों में दबा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । नगर निगम में गृहकर भुगतान को लेकर पूर्व नगर आयुक्त द्वारा जारी सख्त आदेश अब पूरी तरह बेअसर नजर आ रहा है। 3 अक्टूबर 2024 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि भविष्य में गृहकर का भुगतान चेक के माध्यम से स्वीकार नहीं किया जाएगा, ताकि चेक बाउंस की स्थिति से बचा जा सके और लेखा-जोखा व रिकन्सीलिएशन में आ रही गंभीर दिक्कतों को दूर किया जा सके।
आदेश जारी करने की अहम वजह भी गंभीर थी( नगर निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान। जांच में सामने आया था कि बड़ी संख्या में लगाए गए चेक या तो निगम के खातों में क्लियर नहीं हुए या फिर बाउंस हो गए, जिससे लेखा विवरण तैयार करने में भारी अव्यवस्था पैदा हुई। लेखा और डेटाबेस के आंकड़ों में भारी अंतर सामने आया था।
पूर्व नगर आयुक्त ने अपने आदेश में साफ निर्देश दिए थे कि बाउंस या लंबित चेकों के मामलों में अतिशीघ्र कार्यवाही करते हुए 100 प्रतिशत धनराशि को अन्य डिजिटल माध्यमों—जैसे भारत बिल पेमेंट सिस्टम (बीबीपीएस), यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग अथवा नकद—के जरिए जमा कराया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि चेक भुगतान में संसाधन और समय की बर्बादी को देखते हुए आगे से चेक स्वीकार न किए जाएं।
हकीकत इससे ठीक उलट
जमीनी हकीकत इससे ठीक उलट नजर आ रही है। नगर निगम के लगभग सभी जोनों में धड़ल्ले से चेक स्वीकार किए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ जोन अपनी वसूली को कागजों पर बेहतर दिखाने के लिए चेक के जरिए भुगतान दर्ज कर रहे हैं, ताकि नगर आयुक्त की नजरों में वसूली का आंकड़ा चमकदार दिखाई दे—भले ही वह राशि वास्तव में निगम के खाते में आई हो या नहीं। क्या पूर्व नगर आयुक्त के आदेश को वर्तमान नगर आयुक्त भूल चुके हैंया फिर सभी जोनों को चेक स्वीकार करने की कोई नई मौखिक/लिखित अनुमति दी गई है।
नियमों की खुली अवहेलना नहीं
नगर निगम की पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर यह मामला सीधे सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो चेक बाउंस का वही पुराना खेल दोबारा दोहराया जा सकता है—और इसका खामियाजा एक बार फिर नगर निगम को भुगतना पड़ सकता है।
आसनसोल में अवैध खनन के दौरान कोयला खदान धंसी
तीन लोगों की मौत, दो लोगों को बचाया गया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुबह आसनसोल के पास एक ओपन-कास्ट कोयला खदान के धंसने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई है, जबकि दो अन्य को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
यह घटना कुल्टी थाना क्षेत्र के बरिरा इलाके में हुई। यह खदान सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड द्वारा संचालित की जा रही है। मजदूर आर्थिक मजबूरी के कारण कोयला निकालने के लिए अवैध रूप से खदान में घुसे थे, जो इस क्षेत्र में एक आम लेकिन खतरनाक प्रथा है। अचानक हुए भूस्खलन से वे मलबे के नीचे दब गए, जिससे तुरंत अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे।बचाव अभियान तेजी से शुरू किया गया, जिसमें बीसीसीएल के अधिकारी, पुलिस टीमें औरजेसीबी जैसे भारी मशीनरी शामिल थे। घटनास्थल पर मौजूद पोद्दार ने पहले शव के बरामद होने के बाद दो और शवों को बरामद होते देखा। दो जीवित बचे लोगों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराया गया, हालांकि उनकी स्थिति के बारे में सटीक जानकारी अभी भी लंबित है।
थाईलैंड में बड़ा ट्रेन हादसा, 22 यात्रियों की मौत
चलती ट्रेन पर गिरी भारी-भरकम क्रेन
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बैंकॉक । थाईलैंड में एक बड़ा हादसा हो गया है। राजधानी बैंकॉक से थाईलैंड के पूर्वोत्तर प्रांत जा रही एक ट्रेन उस समय पटरी से उतर गई जब एक क्रेन उसके ऊपर गिर गई। पुलिस ने कहा कि इस बड़े हादसे में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 30 घायल हो गए, यह दुर्घटना बुधवार, 14 जनवरी की सुबह बैंकॉक से 230 किमी दूर नाखोन रत्चासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई।
एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी एएफपी से इस बात की पुष्टि की है कि हादसे में 22 लोग मारे गए और 30 से अधिक घायल हो गए। ट्रेन थाईलैंड के उबोन रतचथानी प्रांत के लिए जा रही थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक क्रेन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी, तभी वह ढह गई और गुजरती ट्रेन के ठीक उपर गिर गई। इससे ट्रेन पटरी से उतर गई और कुछ देर के लिए उसमें आग लग गई। बचाव कार्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वहां पहुंचे बचावकर्मी घायल लोगों को बचाने के लिए ट्रेन के मलबे को काटते हुए दिख रहे हैं।
प्रयागराज में तालाब में डूबने से एक युवक समेत चार बच्चों की मौत, मचा कोहराम
10 से 11 वर्ष बताई जा रही है बच्चों की उम्र
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
प्रयागराज। प्रयागराज में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया। पुरामुफ्ती थाना इलाके के केशवपुर कुसुआ गांव में एक तालाब में डूबने से चार बच्चों की मौत हो गई। घटना बुधवार को हुई, जब गांव के ही रहने वाले एक युवक के साथ तीन बच्चे तालाब के पास खेल रहे थे। बच्चों की उम्र 10 से 11 वर्ष बताई जा रही है।
बुधवार को प्रयागराज के पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र के सल्लाहपुर इलाके के कुसुआ गांव में एक दुखद घटना सामने आई। एक तालाब में डूबने से एक युवक समेत चार बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक युवक गांव का ही निवासी था, और उसके साथ तीन अन्य बच्चे भी थे। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, बच्चे तालाब के किनारे खेल रहे थे। बच्चों के कपड़े और चप्पल तालाब के पास ही पड़े मिले, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वे खेलते-खेलते अचानक तालाब में चले गए और किसी को कुछ पता नहीं चला। यह घटना घटित हुई। तालाब में चार बच्चों की डूबने से मौत के बाद कोहराम मचा हुआ है। पुलिस चौकी सल्लाहपुर पर भारी भीड़ जमा हो गई है। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे हैं। परिजन बच्चों की हत्या का आरोप लगा रहे हैं। जिन बच्चों डूबने से मौत हुई है उनमें प्रतीक सोनकर (12) पुत्र प्रदीप सोनकर, प्रिंस सोनकर (10) पुत्र प्रदीप सोनकर, करण सोनकर (19) पुत्र राजेश सोनकर और प्रियांशु सोनकर (11) पुत्र स्व. संदीप सोनकर हैं।ं



