मंदिर की सीढिय़ों से सियासत की चोट

- राहुल गांधी बदलेंगे अयोध्या से राजनीति का खेल
- राम का नाम, जनता के सवाल
- अयोध्या से नेता प्रतिपक्ष करेंगे बीजेपी पर तगड़ा हमला
- कांग्रेस नेता की जनता केमुद्दों पर भाजपा को घेरने की तैयारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया के राहुल गांधी के मंदिर दर्शन के एलान ने देश की पूरी राजनीति को ही मथ दिया है। राहुल गांधी जल्द ही राम लला के दर्शन कर उनका आर्शीवाद लेंगे। राहुल गांधी ने इससे पहले कई बार कहा था कि मंदिर पूर्ण रूप से तैयार हो जब शिखर ध्वज और नियमित पूजा स्थापित हों जाएगी तब मैं मंदिर में भगवान के दर्शन करने जाउंगा। उनके इस बयान के कई मायने हैं और देश की राजनीति में यह मौका यूटर्न वाला है।
भ्रष्टाचार, महंगाई व बेरोजगारी पर कठोर सवाल भी उठाएंगे राहुल
राहुल गांधी का मंदिर दर्शन सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगी। यह कदम आने वाले चुनावों में राष्ट्रीय राजनीति का टर्निंग पॉइंट बन सकता है जहां राहुल गांधी हिन्दू-हिंदुत्व के प्रतीक स्थलों पर सम्मान और श्रद्धा के साथ आस्था प्रकट करेंगे और साथ ही भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर कठोर सवाल भी उठाएंगे। यही मिला कर बनेगा एक नई राजनीति का नया एजेंडा जिसमें आस्था और राष्ट्रवाद संतुलन से जुड़ा रहेगा न कि वैमनस्य से। बिना किसी पाखंड के बिना किसी दिखावे के एक लोकतांत्रिक चेहरे ने रामलला के दर्शन का निर्णय लिया है। और यही फैसला बीते वर्षों की खामोशियों को तोड़ता है और भारत की जनता को बताता है कि राजनीति केवल वोटों के इरादों की नहीं मानव के विश्वास और सांस्कृतिक सम्मान की भी होती है।
राजनीतिक आत्मविश्वास का बुलंद इशारा
यह वहीं राहुल गांधी है जिनपर बीजेपी लंबे समय से हिंदुत्व की राजनीति में संदेह जता रही थी। आज वही अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धा भाव से प्रस्थान करने के लिए तैयार हैं। राहुल गांधी का यह कार्यक्रम राजनीतिक आत्मविश्वास का बुलंद इशारा है कि अयोध्या की राजनीति अब सिर्फ एक पंथ विशेष का मोर्चा नहीं रह गई है बल्कि यह भारत के सबसे बड़े लोकतांत्रिक शक्ति संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है।
बीजेपी पर दबाव बढ़ेगा
बीजेपी वाले कहते थे कि राहुल गांधी को हिंदू धर्म या राम मंदिर से कोई लगाव नहीं। वह सिर्फ विदेशी दौरों और विदेशी भाषणों के चक्कर में रहते हैं। लेकिन आज यही राहुल गांधी राम मंदिर की पावन भूमि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत भक्ति की बात नहीं यह सियासी पराक्रम का प्रतीक है कि देश की राजनीति में अब कुछ भी ध्रुवीकरण, नफरत, सांप्रदायिक विभाजन या तुष्टिकरण नहीं चलने वाला।
यूपी में मजबूत होना चाहती कांग्रेस
कांग्रेस किसी भी कीमत पर यूपी में मजबूत होना चाहती है। एक बार फिर यूपी की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी के कंधों पर है। और उनके नाम का एलान होने के साथ ही राहुल गांधी के मंदिर दर्शन की खबर समाने आयी है। इस खबर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस अब मंदिर के साथ वाली राजनीति करने जा रही है। क्योंकि प्रियंका गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र में बीजेपी के कई बड़े नेताओं के साथ मुलाकात की थी और फोटो खिचवाए थे। ऐसे में क्या यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक चाल बदल दी है।
शिखर ध्वज और नियमित पूजा स्थापित होने पर मंदिर आने की बात कही थी
बीते दिनों जब राम मंदिर पूजा आरती के कार्यक्रम पूरे हुए थे तब राहुल गांधी ने खुद कहा था कि मंदिर पूर्ण रूप से तैयार हो जब शिखर ध्वज और नियमित पूजा स्थापित हों तभी मैं राज्य और देश के लोगों के लिए दर्शन करूंगा। अब यही दिन आया है। मंदिर का ध्वज लहरा चुका है। पूजा अर्चना रोज होती है और यही सही मौका है कि देश के विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा वहां श्रद्धा से झुककर भारतवासियों के दिलों को एक बार फिर जोड़े।
बीजेपी तिलमिलाई नेताओं के बिगड़े बोल
बीजेपी ने राहुल गांधी के इस कदम पर तीखे बयान दिए हैं। उसके नेता कह रहे हैं कि राहुल गांधी का यह दौरा केवल फोटो-शाप और प्रचार के लिए है और उनका कथित लगाव राम मंदिर से दिखावा है। बीजेपी के सभी बड़े नेताओं का यही कहना है कि राहुल गांधी अब आखिरकार दर्शन और राजनीतिक लाभ के लिए वहां जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब प्रधानमंत्री और पार्टी के बड़े नेता पहले ही राम मंदिर उद्घाटन में शामिल हो चुके हैं तो राहुल गांधी का अब आना देरी से प्रेरित राजनीति है न कि सच्ची आस्था।




