जालंधर कोर्ट ने आतिशी के वीडियो को बताया फर्जी, वीडियो हटाने और लिंक डिलीट करने का आदेश
आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के वीडियो मामले में जालंधर की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा शेयर की गई आतिशी की वीडियो को फर्जी बताया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के वीडियो मामले में जालंधर की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा शेयर की गई आतिशी की वीडियो को फर्जी बताया है.
आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के वीडियो मामले में जालंधर की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने माना है कि फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट में सामने आया है कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई थी. इस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही जिस अकाउंटस से वीडियो पोस्ट किया गया है, उन सभी लिंक को भी डिलीट करने के निर्देश दिए गए हैं.
दरअसल, यह पूरा मामला दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा शेयर किए गए वीडियो से जुड़ा है. उन्होंने आतिशी का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक्स पर पोस्ट कर गुरु का अपमान किए जाने का आरोप लगाया था. ये बहस पिछले साल नवंबर में नौवें सिख गुरु की शहादत की 350वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम पर आधारित थी. इसके बाद वीडियो को कई भाजपा विधायकों और कांग्रेस नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था. बवाल मचने पर पंजाब की जालंधर पुलिस ने जब वीडियो की जांच की तो यह फर्जी निकला. जिसके बाद कपिल मिश्रा समेत कई नेताओं के खिलाफ जालंधर पुलिस ने केस दर्ज किया था.
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने पंजाब पुलिस से मांगा जवाब
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विरेंद्र गुप्ता ने भी पंजाब पुलिस के पंजाब के डीजीपी, विशेष डीजीपी (साइबर अपराध) और जालंधर पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया था. नोटिस के जवाब में पुलिस अधिकारियों 10 दिन का समय मांगा है. विरेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस पर विधानसभा के विशेषाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. गुप्ता ने वीडियो क्लिप के इस्तेमाल और पंजाब पुलिस द्वारा इसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है.
रिपोर्ट के बाद विरेंद्र गुप्ता क्या लेंगे एक्शन?
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विरेंद्र गुप्ता का कहना है कि वीडियो क्लिप के इस्तेमाल और पंजाब पुलिस द्वारा इसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने को दुर्भाग्यपूर्ण है. इसे सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है. वीडियो क्लिप को दिल्ली विधानसभा की संपत्ति बताया गया है. उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई उनके जवाब मिलने के बाद तय की जाएगी.



