जाति गणना 2027 पर कांग्रेस के सवाल, कहा- राजनीतिक दलों से संवाद करें
कांग्रेस ने मोदी सरकार की जाति गणना 2027 की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि प्रश्नावली, खासकर प्रश्न 12, सरकार की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कांग्रेस ने मोदी सरकार की जाति गणना 2027 की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि प्रश्नावली, खासकर प्रश्न 12, सरकार की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करती है. कांग्रेस ने व्यापक, निष्पक्ष जाति गणना के लिए राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों से संवाद की मांग की है.
कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार को जाति गणना की प्रक्रिया के विवरण को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों के साथ संवाद करना चाहिए. पार्टी का कहना है कि सरकार ने जिस तरह से प्रश्नावली तैयार की है उससे उसकी वास्तविक मंशा और एक व्यापक, निष्पक्ष एवं देशव्यापी जाति जनगणना के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने सवाल खड़े किए हैं. पोस्ट में उन्होंने कहा ‘जनगणना 2027 का फेज़-1 अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान होने वाला है.यह हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना होगी, जिसके विवरण अभी घोषित किए गए हैं. जनगणना 2027 का फेज़-2, यानी जनसंख्या गणना, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके इलाकों में सितंबर 2026 में निर्धारित है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह फरवरी 2027 में होगी.
मोदी सरकार ने लिया यू-टर्न’
कांग्रेस नेता ने आगे कहा ’30 अप्रैल 2025 को मोदी सरकार ने पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए अचानक घोषणा किया कि जाति गणना को जनगणना 2027 में शामिल किया जाएगा. इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को यह घोषित किया गया कि जाति गणना जनगणना 2027 के फेज़-2 में होगी’.
‘जाति जनगणना को किया था खारिज’
जयराम रमेश ने कहा कि यह याद दिलाना जरूरी है कि इससे पहले तक मोदी सरकार लगातार जाति जनगणना के विचार को खारिज करती रही थी-जैसा कि (i) 20 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में और (ii) 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में. 28 अप्रैल 2024 को स्वयं प्रधानमंत्री ने एक इंटरव्यू में जाति जनगणना की मांग करने वालों पर अर्बन नक्सल मानसिकता से ग्रस्त होने का आरोप लगाया था.
‘आखिरकार प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा’
उन्होंने कहा कि आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुकना पड़ा और जाति जनगणना की व्यापक मांग को स्वीकार करना पड़ा, जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मुखर रूप से उठाया था. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अभी-अभी हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना शेड्यूल में शामिल किए जाने वाले विषयों की सूची अधिसूचित की है.
कांग्रेस ने प्रश्न 12 पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव ने प्रश्न 12 पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि प्रश्न 12 में यह पूछा गया है कि क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणी से संबंधित है-जबकि ओबीसी और सामान्य श्रेणी के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं पूछा गया है. उन्होंने कहा कि चूंकि जाति गणना को जनगणना 2027 का हिस्सा बनाया जाना है, ऐसे में जिस तरह से प्रश्न 12 को तैयार किया गया है, वह मोदी सरकार की वास्तविक मंशा और एक व्यापक, निष्पक्ष एवं देशव्यापी जाति जनगणना के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
कांग्रेस ने की संवाद की मांग
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार से मांग करती है कि जाति गणना की प्रक्रिया के विवरण को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों के साथ संवाद शुरू किया जाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि 2025 में तेलंगाना सरकार द्वारा किया गया SEEEPC सर्वे शिक्षा, रोज़गार, आय और राजनीतिक सहभागिता से जुड़ी जाति-वार महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने का सबसे व्यापक और सही तरीका है, जो बृहद तौर पर आर्थिक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है.



