चैतर वसावा की हुंकार से BJP में बढ़ी टेंशन! 1000+ BJP कार्यकर्ता AAP में शामिल 

नर्मदा जिले में आयोजित आम आदमी पार्टी की भव्य ‘परिवर्तन सभा’ ने राजनीतिक समीकरण हिला दिए... वहीं इस ऐतिहासिक सभा में...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः नर्मदा जिले के चिकदा गांव में आम आदमी पार्टी की भव्य परिवर्तन सभा का हाल ही में आयोजन हुआ.. जो गुजरात में पार्टी की तेजी से बढ़ती जमीनी उपस्थिति.. और राजनीतिक गतिविधियों का एक मजबूत प्रमाण बन गई है.. आपको बता दें कि यह सभा 3 फरवरी को हुई.. जिसमें दिल्ली से AAP विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए.. वहीं कार्यक्रम के दौरान नर्मदा जिला प्रमुख, तालुका प्रमुख और स्थानीय स्तर के कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे.. और सभा में हजारों लोग जुटे.. और भाजपा तथा कांग्रेस के 1000 से अधिक कार्यकर्ता औपचारिक रूप से AAP में शामिल हो गए.. यह घटना आदिवासी बहुल नर्मदा जिले में AAP की रणनीति का हिस्सा है.. जहां पार्टी स्थानीय मुद्दों पर फोकस करके जनता का विश्वास जीत रही है.. और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है..

आपको बता दें कि चिकदा गांव नर्मदा जिले का एक छोटा.. लेकिन महत्वपूर्ण आदिवासी बहुल गांव है.. यहां भील, वसावा, गमित और अन्य आदिवासी समुदायों की अच्छी-खासी आबादी है.. यह इलाका सरदार सरोवर बांध, नर्मदा नदी.. और आसपास के जंगलों से घिरा हुआ है.. और लंबे समय से यहां पानी की कमी, सड़कों की खराब हालत, शिक्षा.. और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी.. भूमि अधिकारों का मुद्दा.. और रोजगार की तंगी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं.. वहीं AAP ने इन मुद्दों को केंद्र में रखकर सभा का आयोजन किया.. पार्टी का मुख्य संदेश था कि गुजरात में 30 साल से ज्यादा समय से सत्ता में रहने वाली.. भाजपा ने आदिवासियों के विकास को नजरअंदाज किया है.. जबकि AAP दिल्ली और पंजाब में साबित कर चुकी है कि ईमानदार और जन-केंद्रित शासन संभव है..

बता दें कि सभा को संबोधित करते हुए दिल्ली के मॉडल टाउन से विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने दिल्ली AAP सरकार के मॉडल की बात की.. और उन्होंने कहा कि दिल्ली में मुफ्त बिजली (200 यूनिट तक), मोहल्ला क्लिनिक, बेहतर सरकारी स्कूल, पानी की आपूर्ति.. और सस्ती बिजली जैसे कामों से आम आदमी की जिंदगी बदली है.. उन्होंने वादा किया कि गुजरात में भी यही मॉडल लागू किया जाएगा.. जहां आदिवासी गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जाएंगी.. अखिलेश त्रिपाठी AAP के अनुभवी विधायकों में से हैं.. और पार्टी के पूर्वांचल विंग के अध्यक्ष भी रहे हैं.. उनका गुजरात दौरा पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की एकजुटता.. और समर्थन दिखाने के लिए था.. नर्मदा जिला प्रमुख और तालुका प्रमुखों ने भी भाषण दिए.. जिसमें उन्होंने स्थानीय स्तर पर पार्टी के संगठन को मजबूत करने की बात कही..

वहीं इस सभा की सबसे बड़ी उपलब्धि.. भाजपा और कांग्रेस के 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं का AAP में शामिल होना था.. ये कार्यकर्ता ज्यादातर स्थानीय थे.. जिसमें पंचायत सदस्य, पूर्व सरपंच, युवा नेता, महिला कार्यकर्ता और सामान्य समर्थक शामिल थे.. और उन्होंने बताया कि पुरानी पार्टियों से वे निराश हो चुके थे.. भाजपा में विकास के बड़े-बड़े दावे होते हैं.. लेकिन गांवों तक नहीं पहुंचते.. जबकि कांग्रेस कमजोर हो गई है.. और कोई ठोस विकल्प नहीं दे पा रही है.. AAP की ईमानदारी, भ्रष्टाचार विरोधी छवि और जनता के मुद्दों पर सीधे काम करने की शैली ने उन्हें आकर्षित किया.. पार्टी ने इन नए सदस्यों का जोरदार स्वागत किया.. और उन्हें संगठन में जिम्मेदारी देने का आश्वासन दिया..

जानकारी के अनुसार यह सभा AAP के परिवर्तन अभियान का हिस्सा है.. जो गुजरात के आदिवासी और ग्रामीण जिलों में चल रहा है.. पार्टी ने नर्मदा, तापी, छोटा उदयपुर, डेडियापाड़ा, भरूच.. और अन्य जिलों में ऐसी कई सभाएं की हैं.. इनमें AAP के प्रमुख आदिवासी नेता और डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा मुख्य भूमिका निभाते हैं.. चैतर वसावा गुजरात विधानसभा के सबसे युवा सदस्यों में से एक हैं.. और आदिवासी अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं.. वे वन अधिकार अधिनियम, मनरेगा मजदूरी, भूमि अधिग्रहण और आदिवासियों के खिलाफ झूठे केस जैसे मुद्दों पर सक्रिय हैं.. उनकी वजह से AAP ने आदिवासी बेल्ट में मजबूत पकड़ बनाई है..

बता दें कि गुजरात में AAP की राजनीतिक यात्रा 2022 के विधानसभा चुनाव से तेज हुई.. जब पार्टी ने 182 सीटों में से 5 जीतीं.. और लगभग 13% वोट शेयर हासिल किया.. यह प्रदर्शन आदिवासी और सौराष्ट्र क्षेत्रों में काफी प्रभावशाली था.. 2025 में विसावदर उपचुनाव में AAP ने भाजपा को हराकर बड़ा संदेश दिया.. वहीं अब कई सर्वे और पार्टी के आंतरिक आकलन बताते हैं कि AAP का वोट शेयर 20-25% तक पहुंच गया है.. कांग्रेस का आधार लगातार सिकुड़ रहा है.. और AAP खुद को भाजपा के मुख्य विकल्प के रूप में पेश कर रही है.. पार्टी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी है.. और INDIA गठबंधन को सिर्फ लोकसभा तक सीमित मानती है..

 

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