किसानों को लूट रही भाजपा सरकार: भूपेंद्र हुड्डा

  • यूरिया के बैग का वजन घटाने पर बिफरे नेता प्रतिपक्ष

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों के साथ हो रही लगातार आर्थिक लूट पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें किसानों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रही हैं। अब यूरिया के बैग का वजन घटाकर किसानों की जेब पर सीधा डाका डाला जा रहा है। हुड्डा ने कहा कि पहले यूरिया का बैग 50 किलो का होता था फिर उसे घटाकर 45 किलो किया गया और अब मात्र 40 किलो कर दिया गया है। नए बैग में 37 प्रतिशत नाइट्रोजन और 17 प्रतिशत सल्फर होने का दावा किया जा रहा है लेकिन कीमत वही 254 रुपये रखी गई है।
यानी नाम वही, दाम वही पर मात्रा लगातार घटती जा रही है। यह सीधे तौर पर किसानों के साथ धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई और खेती की लागत बढ़ाकर किसानों की कमर तोडऩे में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि हालिया केंद्रीय बजट में भी भाजपा की किसान विरोधी सोच साफ नजर आई। देश के इतिहास में शायद यह पहला बजट था जिसमें किसानों का जिक्र तक नहीं किया गया। न कर्जमाफी की बात हुई, न मुआवजे की और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई ठोस घोषणा की गई। हुड्डा ने कहा कि खाद, बीज और फसल बीमा के नाम पर भी किसानों से करोड़ों रुपये वसूले जा रहे हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों के खिलाफ साजिश : दीपेंद्र

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर कृषि क्षेत्र में अमरीकी निर्यात के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। यह समझौता भारतीय किसानों के हितों पर सीधा हमला और आत्मनिर्भर भारत के नारे का खुला मजाक है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि देश पहले से ही खाद्यान्न सरप्लस है। ऐसे में आयात से किसान और अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान होगा। हुड्डा ने कहा कि यह समझौता दोतरफा नहीं, बल्कि एकतरफा आत्मसमर्पण है। अमेरिकी कृषि उत्पादों को छूट देने से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था कमजोर होगी, सरकारी खरीद पर दबाव बढ़ेगा और किसान और गहरे संकट में फंसेंगे। डेयरी सेक्टर पर भी सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जहां अमेरिकी औद्योगिक कंपनियां छोटे दुग्ध किसानों को बाजार से बाहर कर देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सौदा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में किया गया है। किसान हित में पहले भी तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन से लेकर संसद तक लड़ाई लड़ी गई और अब इस समझौते के खिलाफ भी संघर्ष किया जाएगा।

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