चैतर वसावा की मुहिम लाई रंग, हड़ताल के आगे झुका JP ग्रुप, 6 मांगें मानीं, वेतन भी बढ़ेगा
डिस्क्रिप्शन- जेपी ग्रुप के 182 कर्मचारी पिछले 15 दिनों से अपनी जायज़ मांगों को लेकर हड़ताल पर थे... 30–35 वर्षों से सेवा दे रहे...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में जेपी ग्रुप के 182 कर्मचारियों की हड़ताल का सफल और सुखद अंत हुआ है.. यह हड़ताल 17 जनवरी 2026 से शुरू हुई थी.. और लगभग 15–18 दिनों तक चली.. कर्मचारियों की मुख्य मांगें सेवा शर्तों, प्रमोशन, अपग्रेडेशन.. और सबसे महत्वपूर्ण वेतन वृद्धि से जुड़ी थी.. लेकिन सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि 30–35 साल की लंबी सेवा के बावजूद उन्हें जमीन का पट्टा या मुआवजा नहीं मिला.. वहीं इन कर्मचारियों की जमीनें सरदार सरोवर बांध परियोजना में डूब गई थी.. जिसके कारण वे लैंड लूजर (जमीन देने वाले प्रभावित) कहलाते हैं.. वहीं आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा ने इनकी मुहिम को आगे बढ़ाया.. और मध्यस्थता करके प्रबंधन को झुकने पर मजबूर किया..
जानकारी के मुताबिक शनिवार को प्रबंधन ने सात मांगों में से छह को तुरंत मान लिया.. और सातवीं (वेतन वृद्धि) पर लिखित आश्वासन दिया.. वहीं यह घटना नर्मदा जिले के आदिवासी क्षेत्र में मजदूरों के हक के लिए एक बड़ी जीत है.. जेपी ग्रुप, सरदार सरोवर नर्मदा निगम से जुड़ा एक संगठन या ठेकेदार कंपनी है.. जो बांध के रखरखाव, सुरक्षा, मरम्मत.. और अन्य संबंधित कार्यों में कर्मचारियों को नियोजित करता है.. ये 182 कर्मचारी लंबे समय से इन कार्यों में लगे हुए थे..
आपको बता दें कि सरदार सरोवर परियोजना गुजरात की सबसे बड़ी सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल योजना है.. जो नर्मदा नदी पर बनी है.. इस परियोजना से लाखों एकड़ जमीन डूबी.. और हजारों परिवार प्रभावित हुए.. गुजरात सरकार का दावा है कि सभी प्रभावितों को पुनर्वास पैकेज मिला.. लेकिन वास्तव में कई लोग अभी भी जमीन, मुआवजा या वैकल्पिक रोजगार से वंचित हैं.. वहीं ये कर्मचारी खुद प्रभावित थे.. उनकी जमीनें डूबीं, लेकिन परियोजना में काम करने के बावजूद उन्हें जमीन का अधिकार या अतिरिक्त लाभ नहीं मिला..
जिसके चलते 17 जनवरी 2026 से कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की.. और उन्होंने कई बार प्रबंधन से बातचीत की.. लेकिन मांगें नहीं मानी गईं.. जानकारी के अनुसार हड़ताल में धरना, प्रदर्शन और काम बंद शामिल था.. चैतर वसावा ने पहले ही दिन कर्मचारियों से मुलाकात की.. और उनकी समस्याएं सुनी.. अगले दिन उन्होंने प्रबंधन से संपर्क किया.. लेकिन शुरू में कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला.. और हड़ताल जारी रही और 15 दिनों से अधिक समय बीत गया..
चैतर वसावा AAP के गुजरात में प्रमुख आदिवासी नेता हैं.. उन्होंने लगातार इस मामले की मध्यस्थता की.. और उन्होंने कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच कई दौर की बैठकें कराईं.. आखिरकार शनिवार को सफलता मिली.. और प्रबंधन ने छह मांगें तुरंत स्वीकार की.. वहीं मानी गई मांगों में सेवा शर्तों में सुधार, प्रमोशन और अपग्रेडेशन शामिल हैं.. खास तौर पर 62 कर्मचारियों को प्रमोशन सूची में शामिल किया गया.. जबकि 20–25 कर्मचारियों को अपग्रेडेशन मिलेगा..
जानकारी के अनुसार कर्मचारियों की सातवीं मांग वेतन वृद्धि की थी.. जिसको लेकर प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया कि.. 1 अप्रैल 2026 से सभी कर्मचारियों को उनके काम के प्रकार, वरिष्ठता.. और प्रदर्शन के आधार पर वेतन बढ़ाया जाएगा.. यह आश्वासन सरदार सरोवर निगम के लेटरहेड पर दिया गया.. जिससे कर्मचारियों को भरोसा हुआ.. वही हड़ताल के दौरान धरने पर बैठे दिनों का भी वेतन न काटने की मांग थी.. जिसको लेकर प्रबंधन ने वादा किया कि देरी से सही.. लेकिन यह वेतन जमा कराया जाएगा.. चैतर वसावा ने कहा कि आंदोलन का सौहार्दपूर्ण समाधान हो गया है.. और उन्होंने सभी सहयोगियों, कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को धन्यवाद दिया..
वहीं यह सफलता चैतर वसावा की लगातार मेहनत का नतीजा है.. वे डेडियापाड़ा (नर्मदा जिला) से AAP विधायक हैं.. और गुजरात विधानसभा के युवा सदस्यों में से एक हैं.. वे आदिवासी अधिकारों, वन अधिकार अधिनियम (FRA), मनरेगा मजदूरी, भूमि अधिग्रहण.. और सरदार सरोवर से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर सक्रिय रहते हैं.. पहले भी उन्होंने कई कंपनियों में मजदूर हड़तालों में मध्यस्थता की और सफलता पाई है.. उनकी यह मुहिम 30 साल की सेवा, जमीन भी नहीं जैसे नारे के साथ चल रही है.. जो आदिवासी क्षेत्रों में गूंज रही है..



