Pappu Yadav को जान से मारने की साजिश का आरोप, Video से मचा सियासी हड़कंप

पप्पू यादव के अकाउंट से उनकी गिरफ्तारी का एक वीडियो शेयर किया गया और लिखा गया कि...ये पटना पुलिस है। रात के 10:30 बजे सिविल ड्रेस में मुझे गिरफ्तार करने आई है। अभी हम दिल्ली से पटना आए हैं और यह दल-बल के साथ गिरफ्तार करने मुझे आवास पर आई है। यह मुझे मारने की साजिश है।...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार की राजनीति से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है…बिहार के पुर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को कल रात गिरफ्तार कर लिया गया है…

ऐसे में सवाल ये नहीं है कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी क्यों हुई…सवाल ये है कि क्या गिरफ्तारी की आड़ में उनकी जान को खतरा है?….ये आरोप हम नहीं लगा रहे…बल्कि खुद पप्पू यादव के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में ये बात खुलकर कही गई है…जिसके सामने आते ही सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है…और लोग सवाल उठे रहे हैं कि क्या पप्पू यादव की गिरफ्तारी उन्हें मारने की साजिश है?..

पप्पू यादव के अकाउंट से उनकी गिरफ्तारी का एक वीडियो शेयर किया गया और लिखा गया कि…ये पटना पुलिस है। रात के 10:30 बजे सिविल ड्रेस में मुझे गिरफ्तार करने आई है। अभी हम दिल्ली से पटना आए हैं और यह दल-बल के साथ गिरफ्तार करने मुझे आवास पर आई है। यह मुझे मारने की साजिश है।…

जिस मामले में पप्पू यादव को गिरफ्तार किया गया…वो करीब 31 साल पुराना बताया जा रहा है…तीन दशक तक ये केस फाइलों में दबा रहा…लेकिन जैसे ही पप्पू यादव सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने लगे…अचानक वही मामला ज़िंदा हो गया….इससे लोगों के मन में शक पैदा होना लाज़मी है कि क्या ये कार्रवाई कानूनी थी या राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित?…अब सवाल ये भी उठता है कि अगर मामला 31 साल पुराना था…तो फिर आधी रात को इतनी जल्दबाज़ी क्यों?…क्या दिन के उजाले में, कानूनी प्रक्रिया के तहत ये कार्रवाई नहीं हो सकती थी?….

वीडियो में पप्पू यादव बेहद गंभीर लहजे में बच्ची को बचाना…बच्ची को बचाना कहते हैं सुनाई दे रहे हैं…जिसके बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक…हर कोई कह रहा है कि…ये सिर्फ गिरफ्तारी नहीं है…उनका कहना है कि जिस तरह से पुलिस सिविल ड्रेस में आई…बिना किसी नोटिस के…बिना किसी पारदर्शिता के…ये सब किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है…उन्होंने जनता से अपील की कि अगर उनके साथ कुछ भी अनहोनी होती है…तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?…

ये भी कोई इत्तेफाक नहीं माना जा रहा कि पप्पू यादव हाल के दिनों में NEET छात्रा के साथ हुई ज्यादती और मौत के मामले में सरकार के खिलाफ सबसे मुखर आवाज़ बनकर उभरे थे…जब बिहार में एक के बाद एक छात्राओं के साथ अत्याचार की खबरें सामने आ रही थीं…तब पप्पू यादव सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सरकार से जवाब मांग रहे थे…उन्होंने खुले मंच से कहा था कि बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और सरकार अपराधियों को बचाने में लगी है…यही नहीं, उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, बेरोज़गारी और कानून-व्यवस्था पर भी लगातार सवाल उठाए…

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पप्पू यादव की सबसे बड़ी गलती यही है कि वो डरते नहीं हैं…वो सत्ता के खिलाफ सीधे और बेबाक बोलते हैं…चाहे NEET घोटाला हो, महिला सुरक्षा का मुद्दा हो या गरीबों की आवाज़…पप्पू यादव हर मोर्चे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं…ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिहार सरकार और बीजेपी को ये सब नागवार गुज़रा? और क्या उसी का नतीजा है कि अब पुराने केस निकालकर उन्हें डराने या चुप कराने की कोशिश हो रही है?

इसे लेकर विपक्ष ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है…विपक्षी दलों का कहना है कि जो भी सरकार के खिलाफ बोलेगा, उसके साथ यही होगा…कभी ED, कभी CBI, कभी पुलिस—और अब आधी रात की गिरफ्तारी…विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी सरकार लोकतंत्र को कुचलने पर आमादा है और असहमति की हर आवाज़ को दबाया जा रहा है…कांग्रेस सांसद राहुल गांघी ने एक्स पर लिखा कि…पटना में NEET की आकांक्षी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है।

पीड़ित परिवार ने जब निष्पक्ष जाँच और न्याय की माँग की, तो वही पुराना भाजपा-NDA मॉडल सामने आ गया – केस को भटकाओ, परिजनों को प्रताड़ित करो और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण दो।इस बेटी के लिए न्याय की आवाज़ बनकर साथी सांसद पप्पू यादव जी मजबूती से खड़े हुए। आज उनकी गिरफ़्तारी साफ़ तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध है ताकि जवाबदेही माँगने वाली हर आवाज़ को डराया और दबाया जा सके।सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि यह घटना किसी एक मामले तक सीमित नहीं दिखती। यह एक भयावह साज़िश और खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करती है, जहाँ और भी बेटियाँ शिकार बन रही हैं और सत्ता इस खौफ़नाक सच्चाई से आँखें मूँद कर बैठी है। यह राजनीति नहीं, इंसाफ़ का सवाल है। यह बिहार की बेटी की इज़्ज़त और सुरक्षा का सवाल है।

वहीं प्रियंका गांधी ने भी पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि…पटना के हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ रेप और हत्या का मामला झकझोर देने वाला है। यह केस सामने आने के बाद सरकार का रवैया उससे भी ज्यादा खौफनाक है। FIR दर्ज होने से लेकर जांच और कार्रवाई तक – सबकुछ संदिग्ध बना दिया गया है। यह सब किसे बचाने के लिए किया जा रहा है?…हाथरस, उन्नाव से लेकर अंकिता भंडारी और पटना तक- जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं। इस केस में आवाज उठा रहे सांसद पप्पू यादव जी की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है।

भाजपा और उनके सहयोगियों का एजेंडा स्पष्ट है- वे अन्याय और अत्याचार के साथ खड़े हैं। ये कोई पहला मामला नहीं है…जब किसी विपक्षी नेता के खिलाफ अचानक कार्रवाई हुई हो…इससे पहले भी कई नेताओं के साथ ऐसा देखा गया है कि जैसे ही वो सरकार के खिलाफ बोलना शुरू करते हैं…तो कभी पुराने केस, कभी नई जांच…तो कभी गिरफ्तारी सामने आ जाती है…इससे आम जनता के बीच ये धारणा बन रही है कि कानून का इस्तेमाल अब सत्ता के हथियार के तौर पर किया जा रहा है…

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल पटना पुलिस की भूमिका पर उठ रहा है…अगर गिरफ्तारी ही करनी थी…तो क्या वर्दी में, दिन के समय, कानूनी प्रक्रिया के तहत ये काम नहीं हो सकता था?…सिविल ड्रेस में आना, आधी रात का वक्त और भारी पुलिस बल…ये सब सामान्य प्रक्रिया से मेल नहीं खाता…यही वजह है कि पप्पू यादव के आरोपों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना भी आसान नहीं है…

सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि अगर एक बड़े जननेता के साथ ऐसा हो सकता है..तो आम नागरिक कितना सुरक्षित है?…क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अब गुनाह बन चुका है?…लोग ये भी पूछ रहे हैं कि NEET छात्रा को न्याय दिलाने की बात करने वालों और सरकार को सच से वाकीफ कराने वाले लोगो को अगर ऐसे टारगेट किया जाएगा…तो फिर इंसाफ की उम्मीद किससे की जाए?…

फिलहाल ये कहना मुश्किल है कि पप्पू यादव के आरोप कितने सही हैं…लेकिन तो इतना साफ है कि घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं…31 साल पुराने केस में आधी रात की गिरफ्तारी…सिविल ड्रेस में पुलिस और सरकार के खिलाफ मुखर आवाज…ये सब संयोग हैं या किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा?

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