ट्रंप से हुई डील के दस्तावेज आए बाहर, रूस से तेल खरीद पर पकड़ा गया झूठ
मोदी जी के इन दिन कुछ खास ठीक नहीं चल रहे हैं। पिछले दिनों जहां वो संसद के अंदर विपक्ष से घिरते दिखाई दिए तो वहीं संसद के बाहर ट्रंप से डील पर उनकी किरकिरी हो गई है। जैसे ही ट्रंप से उनकी डील पक्की हुई बीजेपी ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मोदी जी के इन दिन कुछ खास ठीक नहीं चल रहे हैं। पिछले दिनों जहां वो संसद के अंदर विपक्ष से घिरते दिखाई दिए तो वहीं संसद के बाहर ट्रंप से डील पर उनकी किरकिरी हो गई है। जैसे ही ट्रंप से उनकी डील पक्की हुई बीजेपी ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
मोदी जी को ऐसे मालाएं पहनाई गईं जैसे वो बहुत बड़ा तीर मारकर आए हों लेकिन जैसे ही इस डील की डीटेल सामने आई तो पता चला कि साहेब तो डील के नाम पर घाटे का सौदा कर आए हैं। गोदी मीडिया जो कह रही थी कि मोदी के आगे ट्रंप झुक गए हैं उसके मुंह पर भी अब तमाचा पड़ गया है। दरअसल, अमेरिका से भारत की जो डील हुई है उसके दस्तावेज दुनिया के सामने आ गए हैं जिसके बाद विश्वगुरु का ढोल फट गया है। इसके साथ ही सड़कों और चौक-चौराहों पर पीएम मोदी के ऐसे-ऐसे बैनर पोस्टर लगा दिए गए हैं जिसे देखकर अंधभक्तों को बुरी तरह से मिर्ची लग जाएगी।
पिछले कुछ महीनों से जो देश के हालात बने हैं उससे अब ये लगने लगा है भारत सरकार पीएमओ से नहीं बल्कि व्हाइट हाउस से चल रही है। पिछले कई दिनों से मीडिया के लोग जब भारत सरकार के मंत्रियों से भारत-अमेरिका के बीच हुई डील की डीटेल पूछ रहे थे तो किसी भी मंत्री के पास कोई सीधा जवाब नहीं था। विदेश मंत्री कह रहे थे मुझे कुछ नहीं पता कॉमर्स मिनिस्टर से पूछो और कॉमर्स मिनिस्टर बोले कि सब चंगा सी बाकी नरेंद्र मोदी जी जाने। और मोदी जी हैं कि कुछ बताते ही नहीं। इसी बीच व्हाइट हाउस ने शनिवार, 6 फरवरी की देर रात अमेरिका और भारत ने ट्रेड डील पर एक “अंतरिम समझौते” का दस्तावेज जारी कर दिए। मतलब अब देखिए भारत को क्या करना है इसके दस्तावेज भी व्हाइट हाउस से तैयार होकर आ रहे हैं। लेकिन इन दस्तावेजों के बाहर आते ही ऐसे-ऐसे खुलासे हुए जिसने मोदी को फिर से मुश्किलों में घेर दिया है।
गोदी मीडिया जो पिछले दिनों अपने पापा को डिफेंड करते हुए कह रही थी कि मोदी सरकार ने कहां कहा है कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा उसके मुंह पर झन्नाटेदार तमाचा पड़ा है। क्योंकि इन दस्तावेजों में साफ कहा गया है कि भारत ने सीधे या इनडायरेक्टली रूसी तेल इंपोर्ट करना बंद करने का वादा किया है और कहा है कि वह US से एनर्जी खरीदेगा। मैंने यानी ट्रंप ने तय किया है कि भारत ने US के साथ पूरी तरह से अलाइन होने के लिए ज़रूरी कदम उठाए हैं।” अब आपने व्हाट्सएप पर पढ़ा होगा कि हम विश्वगुरु हैं। गोदी चैनल बता रहे होंगे कि मोदी के आगे ट्रंप झुक गए। मोदी जी के सांसद मालाएं पहनाकर जश्न मना रहे होंगे। लेकिन इन दस्तावेजों की भाषा काफी धमकी भरी है जो जिसके मुताबिक अब भारत की निगरानी अमेरिका करेगा। और अगर हमने रूस से तेल खरीदा, ट्रंप भारत पर 25% टैरिफ ठोक देंगे।
और बात सिर्फ़ तेल तक रहती तो भी ठीक थी। लेकिन इस डील के मुताबिक भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई खाद्य और कृषि वस्तुओं पर टैक्स खत्म करेगा या घटाएगा। लेकिन अमेरिका भारतीय मूल के उत्पादों पर 18 फीसदी का रेसीप्रोकल टैरिफ लगाएगा। अब बताइए ये कहां ये बराबर की डील हुई। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका के लिए एग्रीकल्चर और फूड इंडस्ट्री के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। ये भारत के किसानों की पीठ पर छूरा मारने के बराबर है। मतलब यूएस ने पहले तो साहेब को तेल को लेकर धमकी दी और फिर अपने लिए सारे मार्केट भी खुलवा लिए। वहीं पहले जिन सामानों पर 3% टैरिफ लगता था, फिर ट्रंप आए और टैरिफ बढ़ाकर 50% किया, और अब इसे घटाकर 18% कर दिया। और साहेब इसे बड़ी सफलता बताकर फूले नहीं समा रहे हैं। और इतना ही नहीं भारत अगले 5 साल में 500 बिलियन डॉलर का सामान अमेरिका से खरीदेगा। मतलब हर तरह से हमारा नुकसान। इस घाटे के सौदे को लेकर कांग्रेस की तरफ से कड़ा प्रहार किया गया है।
एक तरफ जहां मोदी जी अमेरिका से सौदा करके बुरी तरह से फंस गए हैं तो वहीं बीते दिनों जो संसद में हुआ वो अब सड़कों और चौक-चौराहों पर दिखने लगा है। अब देखिए मोदी जी को अपने पोस्टर बैनर लगवाने का कितना शौक है ये तो सब जानते हैं। कोविड वैक्सीन लगी तो पोस्टर लग गए। ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो साहेब के आर्मी यूनिफॉर्म में बैनर लग गए। लेकिन इस बार के पोस्टर बैनर पिछली बार से थोड़ा हटकर हैं। क्योंकि इस बार मोदी जी के पोस्टर बैनर बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस ने लगाए हैं। जी हां आप जरा चौराहों पर लगे इन पोस्टरों और बैनरों पर नजर दौड़ाइए। आपको इन बड़े-बड़े बैनरों में लिखा दिखाई देगा – ‘PM IS COMPROMISED’ अब देखिए पिछले दिनों जिस तरीके से Epstein Files में साहेब का नाम आया और उसके तुरंत बाद हड़बड़ी में अमेरिका की ट्रेड डील को घाटे की डील होने के बावजूद मान लिया गया उससे एक बात तो साफ हो गई है कि दाल में कुछ तो काला है।
वहीं जिस तरीके से जनरल नरवणे की किताब को न छपने देना और संसद में नेता प्रतिपक्ष को उस पर एक शब्द ना बोलने देने पर साहेब की जो थू-थू हुई है उसको लेकर भी साहेब घिर गए हैं। इसी सब को लेकर कांग्रेस अब मोदी जी के पोस्टर बैनर छाप रही है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई खुद इन पोस्टरों को लेकर जमीन पर उतरे हुए हैं और सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि मोदी जी किसी चीज को लेकर दबाव में हैं। डर के साये में जी रहे हैं और compromise करके बचकर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर तस्वीर बिल्कुल साफ है। एक तरफ संसद के अंदर जवाब देने से बचती हुई सरकार, दूसरी तरफ संसद के बाहर अमेरिका के सामने झुकते हुए मोदा जी। जिस डील को जीत बताकर ढोल पीटे गए, वही डील अब दस्तावेजों के साथ देश के सामने है और हर पन्ना भारत के नुकसान की कहानी कह रहा है। तेल से लेकर खेती तक, टैरिफ से लेकर मार्केट तक, हर मोर्चे पर भारत से ज्यादा फायदा अमेरिका का दिख रहा है। गोदी मीडिया चाहे जितना भी कवर फायर दे दे, सच्चाई अब पोस्टरों, सवालों और सड़कों पर उतर आई है। ‘विश्वगुरु’ के दावों के बीच देश ये पूछ रहा है कि फैसले दिल्ली में हो रहे हैं या वॉशिंगटन में। वहीं कांग्रेस के पोस्टर हों या जनता की चर्चाचर्चासबके मने में एक शक गहराता जा रहा है कि कहीं समझौते के नाम पर देश को ही समझौता तो नहीं बनाकर रख दिया गया।



