मोदी कार्यक्रम पर करोड़ों खर्च? जनजातीय बजट को लेकर चैतर वसावा के आरोप

डेडियापाड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के खर्च को लेकर राजनीति तेज हो गई है... AAP विधायक चैतर वसावा ने आरोप लगाया है...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः डेडियापाड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम पर करोड़ों रुपये के खर्च का विवाद छिड़ गया है.. गुजरात के नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा में नवंबर 2022 में आयोजित इस कार्यक्रम में कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे.. आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा ने इस खर्च पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि.. यह पैसा आदिवासी विकास फंड से लिया गया था.. जो गरीब आदिवासियों की भलाई के लिए होता है.. चैतर वसावा ने कहा कि मैंने पूछा कि पैसा कहां से आया..

भाजपा सांसद मनसुख वसावा के घर से नहीं.. गृह मंत्री हर्ष संघवी के घर से नहीं, मुख्यमंत्री के घर से नहीं.. तो यह पैसा आदिवासी बजट से खर्च किया गया.. जनता के करोड़ों रुपये भाजपा की रैली पर उड़ाए गए.. जिससे जनता में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.. वहीं यह आरोप AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी दोहराया है.. इस मुद्दे ने गुजरात की राजनीति में हलचल मचा दी है.. क्योंकि भाजपा लंबे समय से गुजरात मॉडल के नाम पर विकास का दावा करती रही है.. लेकिन ऐसे आरोपों से उसकी छवि पर सवाल उठ रहे हैं..

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डेडियापाड़ा दौरा नवंबर 2022 में हुआ था.. डेडियापाड़ा गुजरात के नर्मदा जिले का एक आदिवासी बहुल इलाका है.. जहां भिल, वसावा और अन्य आदिवासी समुदाय रहते हैं.. मोदी जी यहां एक बड़ी रैली और जनसभा में पहुंचे थे.. वहीं इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास था.. मोदी जी ने यहां से कई केंद्रीय योजनाएं लॉन्च की.. जिसमें आदिवासी गौरव अभियान, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा से जुड़ी परियोजनाएं शामिल है.. कार्यक्रम में लाखों लोग शामिल हुए थे.. और मोदी जी ने आदिवासी संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा था कि.. गुजरात आदिवासियों के विकास का मॉडल बनेगा.. लेकिन बाद में इस कार्यक्रम के खर्च पर विवाद शुरू हो गया.. AAP विधायक चैतर वसावा, जो खुद डेडियापाड़ा से विधायक हैं.. उन्होंने RTI (सूचना का अधिकार) के जरिए खर्च का ब्योरा मांगा.. RTI के जवाब में पता चला कि कार्यक्रम पर कुल 50 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे.. यह जानकारी दिसंबर 2025 में सार्वजनिक हुई.. जब चैतर वसावा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका खुलासा किया..

वहीं खर्च के ब्योरे में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं.. RTI के अनुसार, मंडप (स्टेज और टेंट) पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च हुए.. डोम पर 3 करोड़, स्टेज पर 5 करोड़, चाय-नाश्ते पर 2 करोड़.. और बसों पर 7 करोड़ रुपये लगे.. इसके अलावा बैनर, होर्डिंग्स, टॉयलेट, होटल बुकिंग.. और अन्य व्यवस्थाओं पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए.. कुल मिलाकर 50 करोड़ से ज्यादा का खर्च बताया गया.. चैतर वसावा ने आरोप लगाया कि यह पैसा आदिवासी विकास बजट से लिया गया.. जो केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आता है.. आदिवासी विकास फंड का उद्देश्य आदिवासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार.. और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करना होता है.. लेकिन यहां रैली पर उड़ाया गया, जो गलत है.. वसावा ने कहा कि एक तरफ आदिवासी बच्चों की छात्रवृत्ति.. और सिकलसेल बीमारी की सहायता बंद कर दी गई.. वहीं दूसरी तरफ करोड़ों रुपये एक कार्यक्रम पर बर्बाद कर दिए गए..

चैतर वसावा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया.. वे गुजरात विधानसभा में भी इस पर सवाल कर चुके हैं.. दिसंबर 2025 में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और RTI दस्तावेज दिखाए.. वसावा ने कहा कि पैसा कहां से आया.. भाजपा सांसद मनसुख वसावा के घर से नहीं, गृह मंत्री हर्ष संघवी के घर से नहीं.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के घर से नहीं.. यह पैसा आदिवासी बजट से आया.. जनता का पैसा भाजपा की रैली पर खर्च किया गया.. मनसुख वसावा भरूच से भाजपा सांसद हैं.. और आदिवासी समुदाय से हैं.. हर्ष संघवी गुजरात के गृह मंत्री हैं.. वसावा का इशारा है कि.. भाजपा नेता खुद पैसा नहीं लगाते.. बल्कि सरकारी फंड का दुरुपयोग करते हैं.. AAP सांसद संजय सिंह ने भी X पर वीडियो पोस्ट कर इसकी निंदा की.. और उन्होंने कहा कि गरीब आदिवासियों का विकास फंड मोदी की रैली में खर्च किया गया.. जो शर्मनाक है..

वहीं यह कार्यक्रम नवंबर 2022 में गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी जी का यह दौरा हुआ था.. डेडियापाड़ा आदिवासी बेल्ट में आता है.. जहां भाजपा का वोट बैंक मजबूत है.. मोदी जी ने यहां से आदिवासी गौरव अभियान शुरू किया.. जिसमें आदिवासियों के लिए 1 लाख करोड़ की योजनाएं घोषित की गईं.. कार्यक्रम में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के पास बड़ी रैली हुई.. जहां लाखों लोग जुटे.. लेकिन खर्च पर सवाल उठने से विवाद हुआ.. RTI से पता चला कि जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों से फंड लिया.. नर्मदा जिला प्रशासन ने RTI में खर्च का ब्योरा दिया.. जिसमें हर विभाग का हिसाब करोड़ों में था.. PWD ने मंडप और स्टेज पर खर्च किया.. जबकि परिवहन विभाग ने बसों पर खर्चा किया.. AAP का आरोप है कि यह सब आदिवासी विकास ग्रांट से आया.. जो केंद्र की वन धन योजना और राज्य की आदिवासी विकास योजनाओं से जुड़ा है..

जिसको लेकर भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है.. मनसुख वसावा ने चैतर वसावा पर काउंटर आरोप लगाए.. और उन्होंने कहा कि चैतर वसावा ने अधिकारियों से 75 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी.. जो कार्यक्रम से जुड़ी थी.. मनसुख वसावा ने दिसंबर 2025 में प्रेस कॉन्फ्रेंस की.. और कहा कि चैतर वसावा ने अधिकारियों पर दबाव बनाया.. लेकिन चैतर वसावा ने इन आरोपों को खारिज किया.. और कहा कि जिला कलेक्टर ने खुद इनकी पुष्टि नहीं की.. भाजपा का कहना है कि कार्यक्रम विकास योजनाओं का उद्घाटन था.. और खर्च जरूरी था.. लेकिन RTI के ब्योरे पर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि विकास कार्यों पर खर्च पारदर्शी है.. लेकिन इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली..

 

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