अखिलेश यादव का दावा: PDA वर्ग के लोगों के काटे जा रहे नाम

यूपी एसआईआर में मुस्लिमों का वोट काटने की बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। अभी तक ज्ञानेश कुमार जी तर्किक गलतियों के नाम पर नाम पदनाम और डेट ऑफ बर्थ का हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन दो वायरल वीडियो ने पूरे मामले की पोल खोल दी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: यूपी एसआईआर में मुस्लिमों का वोट काटने की बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। अभी तक ज्ञानेश कुमार जी तर्किक गलतियों के नाम पर नाम पदनाम और डेट ऑफ बर्थ का हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन दो वायरल वीडियो ने पूरे मामले की पोल खोल दी।

एक ओर जहां पूरे मामले पर ज्ञानेश कुमार जी बुरा फंस गए है तो वहीं दूसरी ओर वायरल वीडियो के अनुसार पूरे खेल में बीजेपी और इलेक्शन कमीशन की साठगांठ भी सामने आ गई है। कैसे यूपी एसआईआर में मुस्लिमों का नाम काटने की भयंकर साजिश भंडाफोड़ हुआ है और वायरल वीडियो में क्या कुछ है।यूपी में एसआईआर का पहला चरण खत्म हो चुका है, अब मामला दूसरे चरण में है जहां ये चेक किया जा रहा है कि मतदाता वैध हैं या नहीं।

इसके लिए चुनाव आयोग करीब 3.26 करोड़ के लगभग मतदाआतों को नोटिस भेज रहा है। बहुतों को नोटिस मिल भी चुका है। चुनाव आयोग का दावा है कि ये नोटिस तार्किक विसंगतियों के चलते जारी किए गए हैं। जैसे कि नाम पदनाम, पिता के नाम, माता के नाम, डेट ऑफ बर्थ समेत की चीजों में गड़बड़ी पाई गई है। इसके लिए लोगों को नोटिस भेजा गया है और अब चुनाव आयोग ने संशोधन के लिए डेट को भी बढ़ा दिया है। लास्ट डेट जो 6 फरवरी थी वो अब 6 मार्च हो गई है। अब अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को आएगी लेकिन इस सबके बीच एक खेल शुरु हो गई है।

पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में फार्म सात भरकर मुस्लिमों का नाम काटवाने का खेल चल रहा है। पिछले दिनों सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया था कि पीडीए के लोगों को नाम काटने के लिए बड़ा खेल किया जा रहा है। आखिलेश यादव ने कहा था कि बड़ी संख्या में लोगों को नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 को लेकर जगह-जगह से खबर आ रही हैं और यह सूचना मिल रही है कि उसमें भाजपा बड़े पैमाने पर धांधली की तैयारी कर रही है।

सपा प्रमुख ने कहा कि फॉर्म-7 की धांधली के सबूतों के साथ मांग की थी कि डाउनलोडेड फॉर्म के सत्यापन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि केवल कागजी औपचारिकता ना हो, बल्कि हर फार्म पर नंबरिंग हो, और इसके साथ ही फार्म पर ईसीआई का होलोग्राम हो। अखिलेश यादव ने अब तक जमा किए गए सभी फॉर्म-7 निरस्त किये जाने की मांग भी की थी उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 जमा करते समय की सीसीटीवी फुटेज निकाली जाए और जो भी आरोपी पकड़ा जाए उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उसके ऊपर राज्य के खिलाफ साजिश करने और धोखाधड़ी करने का मुकदमा चले।

अखिलेश यादव का यह भी दावा था कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे कि कौन शिकायत कर रहा है तो जिस व्यक्ति के नाम पर दस्तखत कर शिकायत की गई थी, वह व्यक्ति अंगूठा लगाता था, उसे दस्तखत करना ही नहीं आता था जबकि शिकायत में उसके फर्जी दस्तखत किए गए थे। पिछले दिनों अखिलेश यादव ने जो दावा किया था वो अब सच में सही साबित होता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल है जिसमें दावा किया जा रहा है कि स्पेशल मुिस्लमों को नाम काटने की साजिश हो रही है। देखिए फतेहपुर में कैसे मुस्लिमों का नाम काटने के लिए भयंकर साजिश का खुलासा हुआ है।

कैसे एक महिला सवित्री देवी 72 लोगों को नाम काटने की अकेले ही एप्लीकेशन दे दिया है जबकि नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति इतनी बड़ी संख्या में किसी का नाम काटने की शिकायत नहीं दे सकता है। हालांकि सावित्री देवी बीजेपी की हैं या नहीं है सवित्री देवी कहां की रहने वाली हैं अभी यह जांच की जा रही है। लेकिन पूरे मामले में एक बात साफ है कि मुस्लिमों का नाम काटने का खेल चल रहा है। मामला सिर्फ फतेहपुर का नहीं है बल्कि यूपी के कई और जिलों से इस तरह की खबरेें आ रही है।

सिद्धार्थनगर जिले का भी एक वीडियो वायरल है, जिसमें भी इस तरह की बाते सामने आई है। वहां के बीएलओ को दावा है कि कोई आदमी आया और उनको फार्म देकर गया कि इनका नाम काटना है। बीएलओ का दावा है कि जितने नाम काटने को आए हैं सभी मुस्लिम हैं और जब जांच की गई तो पाया गया है कि सभी लोग के नाम सही हैं न तो ये नाम मृत में हैं, ना दोहरे वोटर में है और न ही अपना घर छोड़कर कहीं दूसरी जगह बसे हैं। बस इसको नाम काटने के पीछे गुप्त साजिश है। हालांकि यहां जिस आदमी ने नाम कटवाने के लिए फार्म सात भरा है वो कौन है, ये बहुत हद तक साफ नहीं है। वीडियो- जो इसमें माइक वगैरह आ रहा है उसको काट दीजिए, कलर चेंज कर दीजिएगा

पहले भी ये आरोप अखिलेश यादव लगा चुके हैं कि मुस्लिमों और पीडीए के लोगों के वोट काटे जा रहे हैं और फार्म सात के जरिए बड़ा खेल चल रहा है।  फॉर्म का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी वोटर का नाम लिस्ट से हटाना हो या तो वो मर गया हो या वो इलाका छोड़कर चला गया हो। लेकिन यहां खेल उल्टा है। जिन मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने के लिए ये फॉर्म भरे जा रहे हैं, वो लोग वहां जिंदा सलामत खड़े हैं। वो चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि हम यहीं के रहने वाले हैं, हमारा वोट मत काटो। लेकिन पर्दे के पीछे बैठे मास्टमाइंड को तो बस एक खास लिस्ट से नाम साफ करने का हुक्म मिला है।

ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि हमारे लोकतंत्र का पहरेदार यानी चुनाव आयोग कहां पर सो रहा है। चुनाव आयोग के नियम कहते हैं कि बिना जांच के किसी का नाम नहीं कटना चाहिए। सवाल यह है कि बिना किसी ठोस सबूत के, सिर्फ किसी के कहने पर एक झटके में सैकड़ों मुस्लिमों का नाम काटने की प्रक्रिया शुरू कैसे हो गई? क्या चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली बन चुका है? जब वीडियो सामने आ गया है, सबूत सामने हैं, तो अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज क्यों नहीं गिरी? अगर चुनाव से पहले ही लिस्ट को मैनिपुलेट कर लिया जाएगा, तो फिर वोट डालने का मतलब क्या रह जाएगा?

वैसे तो सिद्धार्थनगर के चुनाव आयोग के अफसरों का दावा है कि नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब कई जिलों में इस तरह की शिकायतें आ रही है तो मानी सी बात है कि कोई जानबूझकर इस तरह की गलतियां कर रहा है। इसका मकसद सिर्फ मुस्लिमों का वोट काटना नहीं बल्कि चुनाव आयोग को भी गुमराह करना है क्योंकि अगर गलती से एक वोटर का भी नाम कट गया तो ये चुनाव आयोग की ही फाल्ट मानी जाएगी। ऐसे में कहीं न कहीं जो लोग फर्जी अप्लीकेशन देकर नाम काटने की साजिश करा रहे हैं ये चुनाव आयोग के खिलाफ साजिश है और इस साजिश का न सिर्फ चुनाव आयोग को पर्दाफाश करना चाहिए बल्कि इस तरह के सक्रिय लोगों पर बड़ी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

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