CM Nitish ने पार की बेशर्मी की हद! सदन में भूले मर्यादा, राबड़ी देवी पर कर दी टिप्पणी

बिहार की राजनीति में एक बार फिर ऐसा पल देखने को मिला...जिसने लोकतंत्र, महिला सम्मान और सत्ता की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं... बिहार विधान परिषद का सदन.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार की राजनीति में एक बार फिर ऐसा पल देखने को मिला…जिसने लोकतंत्र, महिला सम्मान और सत्ता की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं…

बिहार विधान परिषद का सदन….जहां जनता के सवालों के जवाब दिए जाने चाहिए थे…वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसी हरकत की…जिसकी चर्चा अब हर ओर हो रही है…दरअसल, मुद्दा था दरभंगा में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी का…जिसे लेकर विपक्ष सदन में नीतीश सरकार से सवाल पूछ रहा था…लेकिन विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुस्सा महिला पार्षदों और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर उतार दिया…और राबड़ी देवी को ई लड़की है कहकर संबोधित किया…जिसके बाद इस बयान को जिसने सुना उसने यही कहा कि…सत्ता के शिखर पर बैठे नीतीश कुमार ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दी हैं…

सीएम नीतीश कुमार सदन में मौजूद महिला पार्षदों से कह रहे हैं कि ये लोग ज्यादा हल्ला कर रही हैं औ राबड़ी देवी को कहते हैं कि ई लड़की को कुछ आता था…विधान परिषद में विपक्ष दरभंगा की उस दिल दहला देने वाली घटना पर सरकार से जवाब मांग रहा था…जिसमें एक 6 साल की बच्ची के साथ हैवानियत हुई…ये कोई छोटा मुद्दा नहीं था…सवाल सीधा था कि….बिहार में कानून-व्यवस्था का क्या हाल है?…बच्चियां सुरक्षित हैं या नहीं?…सरकार ने क्या कार्रवाई की?….लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रुख पूरी तरह बदल गया…उन्होंने अपराध, सुरक्षा या प्रशासन पर बात करने की जगह विपक्ष की महिला सदस्यों और खासकर राबड़ी देवी पर टिप्पणी करना शुरू कर दिया…

नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के लिए जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया…वो न सिर्फ आपत्तिजनक था बल्कि संसदीय मर्यादा के बिल्कुल खिलाफ था…ई लड़की…जैसे शब्द किसी निजी बहस में भी स्वीकार्य नहीं किया जा सकता….और जब ये शब्द भरे सदन में…एक महिला नेता के लिए बोले जाएं…तो ये सत्ता की सोच और मानसिकता को उजागर करता है…साथ ही महिला पार्षदों को ये कह देना कि ये ज्यादा हल्ला कर रही हैं…ये बताता है कि मुख्यमंत्री के लिए महिलाओं का सवाल उठाना भी एक तरह की उस मानसिकता की पहचान है…जिसमें महिलाओं के सम्मान का जिक्र सिर्फ चुनावी फायदे के लिए किया जाता है….ऐसे में सवाल ये है कि जब महिलाएं अपने अधिकार और सुरक्षा पर सवाल करेंगी तो क्या वो चुप रहें?…

इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये पूरा घटनाक्रम जवाबदेही से बचने की कोशिश था…जब विपक्ष ने मासूम बच्ची के साथ हुए अपराध पर सरकार को घेरा…तो मुख्यमंत्री भड़क गए…जवाब देने के बजाय, मुद्दे को भटकाने की रणनीति अपनाई गई और निशाने पर आ गईं महिलाएं……हालांकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब सत्ता में बैठे लोग ऐसे तीखे सवालों से बचने के लिए भाषा और लहजे का सहारा लेते हैं…लेकिन जब ऐसा मुख्यमंत्री करता है…तो संदेश और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है…

सीएम नीतीश कुमार लंबे समय से खुद को महिला सशक्तिकरण का चेहरा बताते रहे हैं…शराबबंदी, साइकिल योजना, आरक्षण…इन सबका हवाला दिया जाता है…लेकिन आज सदन में उनकी इस हरकर के बाद सवाल ये है कि…क्या महिला सम्मान सिर्फ योजनाओं तक सीमित है?…अगर मुख्यमंत्री खुद भरे सदन में एक महिला नेता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करेंगे…तो जमीनी स्तर पर क्या संदेश जाएगा?…क्या पुलिस, प्रशासन और समाज महिलाओं को सम्मान देगा….वो भी तब जब सत्ता का शीर्ष व्यक्ति ही ऐसी हरकत करे?…

क्योंकि, राबड़ी देवी सिर्फ एक विपक्षी नेता नहीं हैं…वो बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और लाखों लोगों की राजनीतिक प्रतिनिधि हैं…उन पर इस तरह की टिप्पणी सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं…बल्कि पूरे विपक्ष और महिलाओं के राजनीतिक अस्तित्व पर हमला माना जा रहा है….विपक्ष का आरोप है कि नीतीश कुमार अब आलोचना सहने की क्षमता खो चुके हैं…सत्ता में लंबे समय तक बने रहने के बाद अब सवालों से चिढ़ साफ दिखाई देती है…

इस पूरे विवाद के बाद RJD नेता रोहिणी आचार्य का सोशल मीडिया पर आया बयान भी काफी चर्चा में है…रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी को महिला विरोधी और अहंकार से भरा बताया…और एक्स पर लिखा कि…माननीय मुख्यमंत्री जी की आदत बन चुकी है ” संसदीय भाषाई मर्यादा लांघने की “… दर्जनों दफा मुख्यमंत्री जी ने सदन में और सार्वजनिक मंचों पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग, विशेषकर महिलाओं के संदर्भ में किया है…जब तर्क और तथ्यों का टोंटा पड़ जाता है , तभी भाषा की सीमा लाँघ कर व्यक्ति अपनी खीज , अपने वैचारिक खोखलेपन का इजहार करता है… वैसे भी मुख्यमंत्री जी के पिछले कुछ वर्षों के बयानों – वक्तव्यों पर गौर करने से ये स्पष्ट होता है कि वो महिलाओं के प्रति मानसिक – वैचारिक कुंठा से ग्रस्त हैं और उनके द्वारा महिला सम्मान को लेकर कही जाने वालीं बातें महज राजनीतिक व् चुनावी दिखावा हैं..

एक ओर रोहिणी आचार्य ने सीएम नीतीश पर निसाना साधा है…तो वहीं दूसरी ओर इस घटना के बाद सरकार की ओर से कोई ठोस सफाई नहीं आई है…सत्ता पक्ष इसे सदन का शोर-शराबा और विपक्ष की राजनीति बताकर टालने की कोशिश कर रहा है…लेकिन सवाल अब भाषा का है….सोच का है और संवेदनशीलता का है…क्या एक मुख्यमंत्री को ये अधिकार है कि वो अपराध पर सवाल पूछने वाली महिलाओं को अपमानित करे?…क्या सत्ता में बैठा व्यक्ति कानून-व्यवस्था की नाकामी पर गुस्सा होने के बजाय सवाल उठाने वालों पर गुस्सा उतारे?

बिहार की जनता ये सब देख रही है…खासकर महिलाएं ये महसूस कर रही हैं कि उनकी सुरक्षा और सम्मान सिर्फ भाषणों तक ही सीमित है…जब एक 6 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी पर सरकार कठघरे में खड़ी हो…तब मुख्यमंत्री की प्राथमिकता भाषा की मर्यादा होनी चाहिए थी…लेकिन हुआ इसके ठीक उलट…….ऐसे में ये घटना ये भी दिखाती है कि बिहार में सत्ता और संवेदना के बीच दूरी बढ़ती जा रही है…क्योंकि, भरे सदन में राबड़ी देवी पर की गई टिप्पणी सिर्फ एक बयान का विवाद नहीं है…ये विवाद उस मानसिकता का सवाल है…जिसमें महिलाओं की आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है…ये विवाद उस राजनीति का है…जहां सवाल पूछना हल्ला माना जाता है…और ये विवाद उस सत्ता का है…जो जवाब देने के बजाय अपमान को हथियार बना लेती है…

भरे सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ये व्यवहार ये साबित करता है कि…उन्होंने संसदीय मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं हैं…दरभंगा की मासूम बच्ची के सवाल पर जवाब देने के बजाय महिलाओं पर टिप्पणी करना शर्मनाक है…राबड़ी देवी पर की गई टिप्पणी और महिला पार्षदों को लेकर इस्तेमाल की गई भाषा ये दिखाती है कि सरकार सवालों से घबराई हुई है….रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को और भी ज्यादा धार दी है और साफ कर दिया है कि ये लड़ाई सिर्फ राजनीति की नहीं…बल्कि महिला सम्मान और जवाबदेही की है…अब सवाल सिर्फ सीएम नीतीश कुमार से नहीं…बल्कि, पूरे सिस्टम से है कि क्या बिहार में सवाल पूछने की कीमत अपमान है?…और अगर ऐसा है…तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है…और जिस तरह से सीएम नीतीश कुमार की ओर से महिला पार्षदों और राबड़ी देवी का अपमान किया गया है…वो बेहद निंदनीय है..

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