OM Birla की छुट्टी करने की तैयारी, विपक्षी सांसदों ने किया साइन! कार्यवाही स्थगित कर भागे
क्या लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की लोकसभा से छुट्टी होने वाली है? क्या लोकसभा स्पीकर पद से ओम बिरला को अब इस्तीफा देना पड़ सकता है? लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बतौर स्पीकर कितनी अच्छी और निष्पक्षता से लोकसभा चला रहे हैं, ये बात तो आज देश का बच्चा-बच्चा जानता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की लोकसभा से छुट्टी होने वाली है? क्या लोकसभा स्पीकर पद से ओम बिरला को अब इस्तीफा देना पड़ सकता है? लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बतौर स्पीकर कितनी अच्छी और निष्पक्षता से लोकसभा चला रहे हैं, ये बात तो आज देश का बच्चा-बच्चा जानता है।
आप समझ लीजिए कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला उतने ही निष्पक्ष हैं, जितनी निष्पक्षता से चुनाव आयोग चुनाव कराता है और गोदी मीडिया पत्रकारिता करती है। लेकिन अब लगता है कि ओम बिरला से अपनी कुर्सी बिल्कुल नहीं संभल रही है। इसलिए तो आज जब करीब तीन दिनों के बाद संसद का सत्र शुरू हुआ, तो महज चार मिनट के अंदर ओम बिरला उसे स्थगित करके कुर्सी छोड़कर भाग गए। वहीं इस बीच ब्रेकिंग न्यूज आती है कि विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। तो आखिर आज संसद में ऐसा क्या हुआ कि स्पीकर को संसद में बैठते ही लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और क्या वाकई विपक्ष ओम बिरला के खिलाफ कोई प्रस्ताव ला सकता है।
तानाशाही सरकारों में सदन किस तरह से चलता है, किस तरह से विपक्ष को चुप कराकर लोकतंत्र का गला घोंटा जाता है, इसका उदाहरण अगर आपको कहीं देखना है तो दिल्ली की संसद की ओर देख सकते हैं। आज जैसे ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला अपनी कुर्सी पर बैठे, लोकसभा में विपक्ष ने हंगामा करना शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि सदन में नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका दिया जाए, लेकिन ओम बिरला उन पर रूल्स झाड़ने लगे। उनको कानून और तरीके बताने लगे। वे प्रश्नकाल को पूरा करने की बात कहने लगे। जिसके बाद विपक्ष का हंगामा और बढ़ गया, जिसके बाद उन्होंने हार मानते हुए कुछ ही मिनटों में लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
एक तरफ जहां लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सदन स्थगित करके अपनी कुर्सी छोड़कर उठे, तो वहीं से खबर आने लगी कि विपक्ष उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रहा है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर करने भी शुरू कर दिए हैं। मीडिया में सूत्रों के हवाले से खबर छपी है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ बजट सत्र के अगले चरण में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नियमानुसार 14 दिन पहले नोटिस देना होता है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव बजट सत्र के दूसरे चरण यानी 9 मार्च से 2 अप्रैल के बीच में लाया जा सकता है। इसमें न्यूनतम हस्ताक्षर की कोई शर्त नहीं है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस सांसदों पर की गई टिप्पणी, राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया जाना अविश्वास प्रस्ताव के अहम बिंदु होंगे।
एक तरफ स्पीकर ओम बिरला लोकसभा में LOP को बोलने नहीं देते हैं, उसका गुस्सा तो कांग्रेस में देखने को मिल ही रहा है। इसके साथ ही जो ओम बिरला ने कांग्रेस की महिला सांसदों पर आरोप लगाया था, उसको लेकर भी फिर सांसदों का गुस्सा फूट पड़ा है। पिछले हफ्ते जब राष्ट्रपति अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में अपना अभिभाषण देने आना था, उस वक्त विपक्ष ने हंगामा किया था, जिससे पीएम मोदी ने डरकर सदन में कदम ही नहीं रखे थे। उसके अगले दिन स्पीकर ओम बिरला ने यह कमेंट किया था कि कांग्रेस की कुछ महिला सांसद प्रधानमंत्री के आने से पहले उनकी कुर्सी तक पहुंच गई थीं और उनको जानकारी मिली थी कि प्रधानमंत्री पर किसी तरह के हमले की तैयारी, साजिश रची गई है।
इसलिए उन्होंने स्वयं ही प्रधानमंत्री मोदी को सदन में आने से रोक दिया था। लेकिन अब ओम बिरला को यह कहना बहुत भारी पड़ने वाला है, क्योंकि कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने चिट्ठी में लोकसभा अध्यक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि कांग्रेस सांसद हिंसा में विश्वास नहीं करते हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष पर सत्ता पक्ष का दबाव है। चिट्ठी पर प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस की सभी महिला सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष यही है कि आज लोकसभा में जो कुछ हो रहा है, वह किसी स्वस्थ लोकतंत्र की तस्वीर नहीं बल्कि एक तानाशाही सोच का प्रतिबिंब है। स्पीकर निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सरकार के महा चाटुकार बनकर रह गए हैं। वे खुलेआम अपनी गद्दी का दुरुपयोग कर रहे हैं और संसद को सत्ता पक्ष की ढाल में तब्दील कर चुके हैं। जब भी मोदी या सरकार का कोई मंत्री बोलता है, तो ओम बिरला ऐसे ध्यान से सुनते हैं जैसे कोई धार्मिक कथा चल रही हो—चेहरे पर मुस्कान, आंखों में श्रद्धा और पूरे सदन में सन्नाटा। लेकिन जैसे ही कोई विपक्षी नेता, खासकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खड़े होते हैं, स्पीकर का चेहरा बदल जाता है। तभी उन्हें नियम-कानून याद आने लगते हैं, प्रक्रियाएं दिखने लगती हैं और संविधान की मोटी किताब लहराई जाने लगती है। पिछले दिनों का उदाहरण सबके सामने है, जब राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की किताब की सिर्फ पांच लाइनें संसद में पढ़ना चाहते थे।
वह कोई अफवाह नहीं, कोई आरोप नहीं बल्कि एक पूर्व सेनाध्यक्ष की लिखी किताब का हवाला था। लेकिन तब स्पीकर ओम बिरला सरकार के वकील की तरह खड़े हो गए। उन्होंने एक के बाद एक नियम गिनाए, सरकार का बचाव किया और नेता प्रतिपक्ष को बोलने ही नहीं दिया। यही नहीं, कांग्रेस की महिला सांसदों पर लगाए गए उनके बेहद गंभीर और बेबुनियाद आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया। आज स्थिति यह है कि स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक उठा रहा है। चार मिनट में सदन स्थगित कर कुर्सी छोड़ देना, विपक्ष को लगातार चुप कराना और सत्ता पक्ष के इशारों पर चलना—यही वजह है कि अब विपक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुट गया है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि लोकसभा स्पीकर की कुर्सी संविधान के साथ खड़ी है या सत्ता के साथ।



