AI Summit से बड़े चेहरे ने बनाई दूरी, गलगोटिया ने डुबाई मोदी की नैया

इन दिनों हम फस्ट, हम फस्ट की इस दौड़ में कुछ कॉलेज ऐसे हैं जो अपना ओहदा ऊंचा करने के चक्कर में न सिर्फ खुद की भद्द पिटवा रहे हैं बल्कि देश का नाम भी मिट्टी में मिला दे रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इन दिनों हम फस्ट, हम फस्ट की इस दौड़ में कुछ कॉलेज ऐसे हैं जो अपना ओहदा ऊंचा करने के चक्कर में न सिर्फ खुद की भद्द पिटवा रहे हैं बल्कि देश का नाम भी मिट्टी में मिला दे रहे हैं।

वो एक कहावत है न ‘ऊंची दुकान और फीका पकवान’ ये कहावत बिलकुल फिट बैठती है गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर। इस यूनिवर्सिटी की तरफ से जो कारनामा किया गया उनकी जितनी आलोचना की जाए उतना कम है। खैर आलोचना हो भी रही है। चीनी रोबोट को अपना कहने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी भले ही अपनी भद्द पिटवाकर AI Summit से बाहर निकाली जा चुकी है। लेकिन इससे मोदी सरकार को जो दाग लगा है उसकी विश्व पटल पर आलोचना हो रही है। अब तो आलम है ये कि ऐसा कहा जा रहा है इस AI Summit से लोग दूरियां बनाने लगे हैं।

दरअसल अब दिल्ली में आयोजित AI समिट से जुडी एक बुरी खबर सामने आई है. मामला बिल गेट्स से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने किसी कारणवश AI समिट में भाषण नहीं देने का फैसला किया है. इस बात की जानकारी Bill & Melinda Gates Foundation ने एक्स पर दी है. उनकी जगह पर अंकुर वोरा भाषण देंगे, जो गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और इंडिया हेड हैं.

आयोजकों ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि समिट का पूरा ध्यान उसके मुख्य विषयों और प्राथमिकताओं पर बना रहे. आयोजकों ने बताया कि अंकुर वोरा का संबोधन फाउंडेशन के काम और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित रहेगा. लोगों ने बिल गेट्स की गैर मौजूदगी को गलगोटिया कांड से जुड़ा हुआ बताया। हालांकि इन अटकलों के बीच गेट्स फाउंडेशन ने साफ किया है कि भारत में उसके काम और सहयोग में कोई बदलाव नहीं है. फाउंडेशन भारत के साथ मिलकर स्वास्थ्य और विकास से जुड़े लक्ष्यों पर काम करता रहेगा. यह फैसला केवल समिट के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर लिया गया है. फाउंडेशन ने दोहराया है कि वह भारत में अपनी साझेदारी और योजनाओं को पूरी मजबूती के साथ जारी रखेगा.

इस AI समिट को मोदी सरकार ने करवाया तो था खुद का नाम बनाने के लिए लेकिन कहीं न कहीं गलगोटिया वालों ने नाम डुबाने का काम किया। साथ ही इससे मोदी सरकार की छवि को धूमिल करने का काम किया गया है।  पूरे मामले की अगर बात करें तो विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें समिट के दौरान मीडिया इंटरैक्शन में एक महिला प्रोफेसर ने दावा किया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने “ओरियन” नामक रोबॉटिक डॉग विकसित किया है। इस वीडियो के चलते ऑनलाइन यूजर्स ने यूनिवर्सिटी पर आयातित चीनी टेक्नोलॉजी को स्वदेशी उत्पाद के रूप में पेश करने का आरोप लगाया। कई यूजर्स ने इसे “मेक इन इंडिया” की भावना के खिलाफ बताया।

कांग्रेस ने इस मामले पर कहा कि मोदी सरकार ने AI के मामले में दुनिया भर में भारत का मजाक बनवाया है। AI समिट में चीन के रोबोट्स को हमारा बताकर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए वाकई शर्मिंदगी की बात है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसी झूठ में शामिल हैं और भारतीय समिट में चीन के रोबोट्स को प्रमोट कर रहे हैं। मोदी सरकार ने देश की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। कांग्रेस ने पोस्ट किया, “मोदी सरकार ने देश की छवि को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है, उन्होंने एआई को मजाक बनाकर रख दिया है। यह एक ऐसा सेक्टर है जिसमें हम अपनी डेटा पावर को देखते हुए विश्व के अगुवा बन सकते हैं।”

वहीं इस पूरे मामले को लेकर राहुल गांधी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ 2026 को सिर्फ पीआर का तमाशा बताया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा ‘चीनी रोबोटिक डॉग’ को प्रदर्शित किए जाने के बाद हुए बवाल के बाद केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘X’ पर पोस्ट किया, “भारत की प्रतिभा और डेटा का इस्तेमाल करने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन अव्यवस्थित तरीके से पीआर का तमाशा बन गया है। भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।”

हालांकि इस मामले पर बढ़ते विवाद के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने X पर जारी सफाई में कहा, “हाल ही में यूनिट्री से प्राप्त रोबोडॉग हमारे छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल है। यह सिर्फ प्रदर्शन के लिए नहीं है, बल्कि एक चलती-फिरती क्लासरूम है। हमारे छात्र इससे प्रयोग कर रहे हैं, इसकी सीमाओं का परीक्षण कर रहे हैं और अपनी नॉलेज बढ़ा रहे हैं। स्पष्ट कर दें: गलगोटिया ने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है और न ही कभी ऐसा दावा किया है।” यूनिवर्सिटी ने आगे कहा कि इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती और लर्निंग भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वे अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसे ग्लोबल इनोवेशन हब्स से एडवांस्ड टेक्नोलॉजी लाकर छात्रों को रियल-वर्ल्ड एक्सपोजर देते हैं। छात्र इन टेक्नोलॉजीज का अध्ययन करते हैं, उन पर सवाल उठाते हैं और उनमें सुधार करते हैं।

यूनिवर्सिटी ने अपने बड़े लक्ष्य पर जोर देते हुए कहा, “यह सिर्फ टेक्नोलॉजी आयात करने की बात नहीं है, बल्कि युवा इनोवेटर्स को इंस्पायर करने और भारत से दुनिया के लिए वर्ल्ड-क्लास सॉल्यूशंस बनाने की है। हम माइंड्स बना रहे हैं जो जल्द ही ऐसी टेक्नोलॉजीज को डिजाइन, इंजीनियर और मैन्युफैक्चर करेंगे।” समिट में यूनिवर्सिटी ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की निवेश की बात भी हाइलाइट की थी। हालांकि, X पर एक कम्युनिटी नोट ने यूनिवर्सिटी की सफाई को गलत और भ्रामक बताया, क्योंकि रोबोट को “ओरियन” नाम दिया गया था और टीम द्वारा विकसित होने का दावा किया गया था।

खैर यूनिवर्सिटी की तरफ से कितनी भी सफाई पेश की जाए लेकिन वो कहते हैं न, ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’. कुछ ऐसा ही हुआ इस यूनिवर्सिटी के साथ भी। जिसकी वजह से आज विश्व स्तर पर बेज्जती का सामना करना पड़ रहा है।

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