गलगोटियास यूनिवर्सिटी की करतूत पर सियासी बवाल

विपक्ष ने भाजपा व एनडीए सरकार पर किया प्रहार, कांग्रेस, आप व शिवसेना यूबिटी ने उठाए सवाल

आप बोली- बीजेपी सरकार शुरू से ही कॉपी-पेस्ट मॉडल चला रही है

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटियास यूनिवर्सिटी रोबोडॉग ने जिस भारत की साख का गला घोटा है उसकेबाद देश में सियासी बवंडर आ गया है। विपक्ष ने इस बदनामी के लिए भाजपा व केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। एक्स पर एक पोस्ट में आप ने इस घटना को धोखाधड़ी बताया और कहा कि इससे भारत की वैज्ञानिक साख को नुकसान पहुंचा है।
आम आदमी पार्टी (आप) ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटियास यूनिवर्सिटी रोबोडॉग विवाद को लेकर बीजेपी पर अपना हमला तेज़ कर दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस घटना ने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को शर्मिंदा किया है। एक्स पर एक पोस्ट में आप ने इस घटना को धोखाधड़ी बताया और कहा कि इससे भारत की वैज्ञानिक साख को नुकसान पहुंचा है। आप ने कहा कि बीजेपी सरकार शुरू से ही कॉपी-पेस्ट मॉडल चला रही है। सूत्रों ने बताया कि दिन में पहले, अधिकारियों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी से एआई इम्पैक्ट समिट एक्सपो खाली करने को कहा है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने अपने स्टॉल पर चीन में बने रोबोटिक कुत्ते को अपनी खोज बताकर दिखाया था। रोबोट को एग्ज़बिशन में देखे जाने के बाद यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन और ऑफलाइन कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।

बिना सोचे-समझे पीआर तमाशा : राहुल गांधी

बढ़ते विवाद के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस इवेंट को एक बिना सोचे-समझे पीआर तमाशा बताया, जहाँ चीनी प्रोडक्ट्स के साथ भारतीय डेटा दिखाया जा रहा है। एक्स पर बात करते हुए, राहुल गांधी ने कहा कि भारत के टैलेंट और डेटा का फ़ायदा उठाने के बजाय, एआई समिट एक बेतरतीब पीआर तमाशा है – भारतीय डेटा बिक्री के लिए है, चीनी प्रोडक्ट्स दिखाए जा रहे हैं।

सरकार ‘रील मिनिस्टर’ अश्विनी वैष्णव की देखरेख में कर रही है एआई समिट

अब सरकार ‘रील मिनिस्टर’ अश्विनी वैष्णव की देखरेख में एआई समिट कर रही है। इस दौरान एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी चीन से एक रोबोट डॉग लाई और उसे अपनी रिसर्च बताकर पेश कर दिया। इस धोखाधड़ी की वजह से भारतीय साइंटिस्ट और इंजीनियर दुनिया भर में मज़ाक का विषय बन रहे हैं।

देश का अपमान कराने वालों को मिले सख्त सजा : प्रियंका चतुर्वेदी

शिवसेना (यूबिटी) एमपी प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एआई इम्पैक्ट समिट में कथित तौर पर चीन में बने रोबोटिक कुत्ते को अपना आविष्कार बताकर पेश किया, जिससे देश और समिट को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताया। एक्स पर एक पोस्ट में, चतुर्वेदी ने यूनिवर्सिटी पर सख्त सज़ा लगाने की मांग की। उन्होंने समिट आयोजित करने के लिए केंद्र की भी आलोचना की और कहा कि अगर कंपनियों, यूनिवर्सिटी और स्टार्टअप को पवेलियन देने से पहले उनकी क्रेडिबिलिटी की पूरी तरह से जांच की गई होती, तो इस विवाद से बचा जा सकता था। उद्धव गुट की सांसद ने कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी का एआई समिट में चीनी रोबोट को अपना आविष्कार बताना शर्म की बात है। चीनी मीडिया का इस पर खूब मज़ाक उड़ाना इसे और भी बुरा बनाता है। अगर पवेलियन देने से पहले कंपनियों/यूनिवर्सिटी/स्टार्टअप और दूसरों की क्रेडिबिलिटी अच्छी तरह चेक की जाती तो यह सब टाला जा सकता था। इससे भारत और समिट को बहुत नुकसान हुआ है, जबकि उनसे पवेलियन खाली करने के लिए कहा जाना एक अच्छा कदम है, मुझे लगता है कि उन पर कोई सख्त पेनल्टी भी लगाई जानी चाहिए।

कोर्ट की भी नहीं मान रहा चुनाव अयोग: अभिषेक बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस सांसद ने आयोग को घेरा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने एकबार फिर चुनाव आयोग पर हमला बोला। उन्होने आरोप लगाया कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करते समय भारत निर्वाचन आयोग सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग औपचारिक, निगरानी योग्य और जवाबदेह तंत्रों के बजाय व्हाट्सएप के माध्यम से नियमित रूप से अपने अधिकारियों को निर्देश भेज रहा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा सकता है? देश की सर्वोच्च अदालत ने बार-बार पारदर्शिता, उचित प्रक्रिया और संचार के आधिकारिक माध्यमों के पालन पर जोर दिया है। फिर भी हम देख रहे हैं कि निर्देश औपचारिक, पता लगाने योग्य और जवाबदेह तंत्रों के बजाय व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ऐसी विश्वसनीय रिपोर्टें हैं कि ईसीआई अधिकारी, विशेष रूप से विशेष रोल ऑब्जर्वर सी मुरुगन, अन्य अधिकारियों को जन्म प्रमाण पत्रों को वैध दस्तावेज़ के रूप में स्वीकार करने के निर्देश दे रहे हैं ताकि हटाए जाने वाले दस्तावेज़ों की संख्या बढ़ाई जा सके। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि विशेष रोल ऑब्जर्वर सी मुरुगन द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप में माइक्रो ऑब्जर्वरों को सीधे जन्म प्रमाण पत्रों की स्वीकार्यता के संबंध में निर्देश जारी करने की विश्वसनीय रिपोर्टें हैं, ताकि हटाए जाने वाले दस्तावेज़ों की संख्या बढ़ाई जा सके। क्या मुझे ईसीआई को सुप्रीम कोर्ट के उस स्पष्ट निर्देश की याद दिलाने की आवश्यकता है कि माइक्रो ऑब्जर्वरों की भूमिका केवल सहायक ही रहनी चाहिए? फिर वैधानिक प्रक्रिया को क्यों दरकिनार किया जा रहा है, और किसके निर्देशों पर? एक्स पोस्ट में आगे लिखा था।
टीएमसी नेता ने व्हाट्सएप संदेशों के कथित स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें अधिकारी कथित तौर पर दस्तावेज़ों की स्वीकार्यता के संबंध में निर्देश दे रहे हैं। लॉगिन डेटा का दुरुपयोग क्वेरी उत्पन्न करने और दिल्ली में ईसीआई के राजनीतिक आकाओं के निर्देश पर एक विशेष समुदाय को लक्षित करने के लिए किया जा रहा है। यदि इस मामले की स्वतंत्र रूप से जांच की जाए, तो यह स्थापित हो जाएगा।

‘घूसखोर पंडत’ केनिर्माता ने सुप्रीम कोर्ट में वापस लिया फिल्म का टाइटल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर छिड़े विवाद के बीच अब निर्माता नीरज पाडें ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना स्टेटमेंट दिया है। नीरज पांडे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि फिल्म का नया शीर्षक अभी तय नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि हमने घुसखोर पंडित का शीर्षक और प्रचार सामग्री वापस ले ली है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नीरज पांडे द्वारा घुसखोर पंडित का शीर्षक वापस लेने संबंधी हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया और फिल्म के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया। शीर्ष न्यायालय में अपना हलफनामा दाखिल करते हुए नीरज पांडे ने कहा कि फिल्म किसी भी धर्म या समुदाय का अपमान नहीं करती या उन्हें निशाना नहीं बनाती है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि न तो मेरा और न ही मेरे प्रोडक्शन हाउस का भारत के किसी भी नागरिक की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण इरादा था। फिल्म किसी भी माध्यम से किसी भी धर्म, समुदाय या धार्मिक मान्यताओं का अपमान नहीं करती है।

मुफ्त उपहारों की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा : सुप्रीम कोर्ट

सरकार की रेवड़ी संस्कृति पर बिफरी अदालत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु बिजली बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, तमिलनाडु बिजली बोर्ड उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने का वादा कर रहा है। वहीं एक मुकदमे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी की है।
इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यों में अपनाई गई मुफ्त उपहारों की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा डालती है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा ज्यादातर राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी विकास को छोडक़र मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा- जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है। लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है। इस दौरान कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली मिलती रही तो लोगों में काम करने की भावना कम हो जाएगी।
वहीं कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त चीजें बांटने के बजाय, रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।

भाजपा ने दिया एकनाथ शिंदे को झटका!

भिवंडी महानगरपालिका में कांग्रेस केसाथ मिलकर बना लिया मेयर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। महाराष्ट्र की भिवंडी में अलग ही सियासत शुरू हो गई है. भिवंडी महानगरपालिका में कुछ ऐसा हुआ है जो महाराष्ट्र राजनीति में पहले कभी नहीं हुआ था. यहां पर मेयर पद का चयन करने के लिए दो बड़े विरोधी दल कांग्रेस और बीजेपी साथ आ गए हैं।
दरअसल, भिवंडी मेयर पद के बीजेपी उम्मीदवार को कांग्रेस ने समर्थन दिया है. इसके लिए पार्टी ने पत्र लिखकर बाकायदा आधिकारिक रूप से अपने समर्थन का ऐलान किया। बीजेपी ने फैसला लिया है कि वह मेयर के लिए सेक्युलर उम्मीदवार के साथ जाएगी. इसलिए पद के लिए स्नेहा पाटील का नाम दिया गया है। बता दें, पहले बीजेपी के उम्मीदवार नारायण चौधरी थे, लेकिन अब नया नाम स्नेहा पाटील का है. कांग्रेस ने बीजेपी के उम्मीदवार को समर्थन दिया है. लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए इस सियासी घटनाक्रम को आश्चर्यजनक बताया था। अब सवाल उठता है कि क्या भिवंडी की सत्ता से एकनाथ शिंदे को दूर करने के लिए बीजेपी ने कोई नई चाल चली है?
दरअसल, एकनाथ शिंदे की शिवसेना महायुति का सहयोगी दल है और बीजेपी के साथ महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज है. हालांकि, लोकल चुनाव में कहीं सहयोगी दुश्मन तो कहीं दुश्मन भी दोस्त हो जाते हैं. भिवंडी में भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है।

महानगरपालिका चुनाव के नतीजे

महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं। उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिलीं। एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी को 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को भी जीत हासिल हुई थी।

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