ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर विवाद: कीर्ति आजाद पर गंभीर का पलटवार, कहा- ऐसे बयान उपलब्धियों का महत्व घटाते हैं

भारतीय टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 विश्वकप 2026 का खिताब अपने नाम किया। कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुआई में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया और टी20 विश्व कप का खिताब तीसरी बार जीता। इस जीत के बाद देशभर में जश्न का माहौल देखने को मिला और खिलाड़ियों का जोरदार स्वागत हुआ। विश्व कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट से जुड़े कुछ प्रमुख लोग ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर पहुंचे। हालांकि, इस घटनाक्रम के बाद पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विश्व कप की ट्रॉफी किसी एक धार्मिक स्थल पर ले जाना उचित नहीं है। इस बयान पर कीर्ति आजाद की खूब आलोचना हुई। अब भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विश्व कप जीतने के बाद सूर्यकुमार और कोच गौतम गंभीर ने मंदिर जाकर पूजा अर्चना की। गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार के साथ आईसीसी अध्यक्ष जय शाह भी दिखे। तीनों ने मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान के समक्ष ट्रॉफी रखकर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने भी खिलाड़ियों का गर्मजोशी से तीनों का स्वागत किया और टीम इंडिया के समर्थन में नारे लगाए। तीनों ने भगवान हनुमान के चरणों में माथा टेककर देश की सफलता और टीम के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की।
इसके बाद ट्रॉफी के मंदिर ले जाने को लेकर कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि 1983 में जब भारत ने कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के खिलाड़ी थे और उस जीत को भारत माता को समर्पित किया गया था। उन्होंने सवाल किया कि क्रिकेट ट्रॉफी को किसी एक धार्मिक स्थल पर क्यों ले जाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रॉफी 1.4 अरब भारतीयों की है, किसी एक धर्म की जीत का प्रतीक नहीं।
गौतम गंभीर ने दिया करारा जवाब
कीर्ति आजाद के बयान की भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान खिलाड़ियों की उपलब्धि को कम करते हैं। गंभीर ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘यह सवाल तो जवाब देने लायक भी नहीं है। यह पूरे देश के लिए बहुत बड़ा क्षण है। हमें विश्वकप जीतने वाली टीम का जश्न मनाना चाहिए। ऐसे बयान सिर्फ उपलब्धि को कम करते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि अगर हर किसी के बयान को गंभीरता से लिया जाए तो इससे खिलाड़ियों की मेहनत का सम्मान कम हो जाएगा।
‘अपने ही खिलाड़ियों को गिराने जैसा’
गंभीर ने कहा कि खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में काफी दबाव झेला है और ऐसे समय में इस तरह की टिप्पणी करना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘जरा सोचिए कि इन खिलाड़ियों ने कितना दबाव झेला है। अगर आप ऐसे बयान देते हैं तो आप अपने ही खिलाड़ियों और अपनी ही टीम को गिरा रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।’
हरभजन सिंह ने भी जताई नाराजगी
कीर्ति आजाद के बयान पर पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने भी हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के मंदिर जाने को लेकर राजनीति करना ठीक नहीं है। हरभजन ने कहा, ‘यह अजीब बात है कि कोई खिलाड़ी ट्रॉफी मंदिर ले जाए और उस पर राजनीति होने लगे। कीर्ति खुद क्रिकेटर रह चुके हैं, इसलिए उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।’
कीर्ति आजाद का क्रिकेट से पुराना नाता
हालांकि आज कीर्ति आजाद राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उनका क्रिकेट से गहरा संबंध रहा है। वह 1983 वनडे विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। ऑलराउंडर के तौर पर उन्होंने भारत के लिए सात टेस्ट और 25 वनडे मैच खेले। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में भी उनका लंबा करियर रहा।
टी20 विश्व कप जीत के बाद जहां पूरे देश में जश्न का माहौल है, वहीं इस मुद्दे पर शुरू हुई बहस ने खेल और राजनीति के बीच संबंधों पर एक नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि टीम इंडिया के कोच और कई खिलाड़ियों का मानना है कि इस ऐतिहासिक जीत के मौके पर केवल खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धि का सम्मान किया जाना चाहिए।



