बैकफुट पर BJP, फ्रंटफुट पर Nitish ! Bihar में फिर से JDU के मुख्यमंत्री की चर्चा तेज
नीतीश कुमार इस समय राज्यसभा जाने की तैयारी कर चुके हैं और माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत लगभग तय है

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार की राजनीति इन दिनों जबरदस्त हलचल के दौर से गुजर रही है…सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि…मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आखिर कब इस्तीफा देंगे और राज्य को नया मुख्यमंत्री कब मिलेगा…
फिलहाल इस पूरे मामले पर सस्पेंस बना हुआ है…राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं…जिसके बाद सवाल उठा कि इसी बीच सवाल उठा कि क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं या नहीं?
नीतीश कुमार इस समय राज्यसभा जाने की तैयारी कर चुके हैं और माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत लगभग तय है…राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल 9 अप्रैल से शुरू होने वाला है…तकनीकी तौर पर देखा जाए…तो वो चाहें तो कुछ समय तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं…लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां कुछ और ही संकेत दे रही हैं…माना जा रहा है कि बीजेपी की ओर से उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है…इसी दबाव के बीच ये भी कहा जा रहा है कि…राज्यसभा जाने का फैसला भी उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है…हालांकि, अभी तक नीतीश कुमार ने खुद ये साफ नहीं किया है कि…वो मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं या नहीं…
सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं…तो बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी…जेडीयू की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई खुला संकेत नहीं दिया गया है…पार्टी नेतृत्व भी इस पर चुप्पी साधे हुए है…लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हुई है…उसके बाद से नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया है…माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है…राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार भविष्य में पार्टी की कमान के साथ-साथ मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी भी निशांत कुमार को सौंप सकते हैं…हालांकि, इस पर अंतिम फैसला क्या होगा…ये अभी साफ नहीं है…ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या नहीं…क्योंकि बिहार में एनडीए की सरकार है और मुख्यमंत्री को लेकर अंतिम सहमति सभी सहयोगी दलों के बीच बननी जरूरी है…
इसी मुद्दे पर जब बिहार के डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी से सवाल पूछा गया…तो उन्होंने बड़ा ही संतुलित जवाब दिया…उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल को ये अधिकार है कि…वो अपने संगठन से जुड़े फैसले खुद करे…निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री जेडीयू का आंतरिक मामला है और इसमें किसी को दखल देने की जरूरत नहीं है…सम्राट चौधरी ने ये भी कहा कि अगर कोई युवा राजनीति में आता है और जनता की सेवा करना चाहता है तो ये लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है….
हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला कब होगा…तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि…फिलहाल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही हैं और सरकार एनडीए के नेतृत्व में चल रही है…उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, इसका फैसला एनडीए की बैठक में लिया जाएगा…उस बैठक में सभी सहयोगी दल मिलकर निर्णय करेंगे और जो भी फैसला होगा, उसका सभी सम्मान करेंगे….
यानी साफ तौर पर सम्राट चौधरी ने ये संकेत दिया कि…मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला पटना में गठबंधन के नेताओं के बीच बातचीत से ही तय होगा, न कि दिल्ली से…उधर जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह भी ये साफ कर चुके हैं कि…बिहार में नया मुख्यमंत्री कौन होगा…इसका फैसला अंततः नीतीश कुमार ही करेंगे…उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में ये चर्चा और तेज हो गई कि…जेडीयू मुख्यमंत्री पद को किसी भी कीमत पर अपने पास ही रखना चाहती है…पार्टी का मानना है कि बिहार में एनडीए को जो जीत मिली है…वो नीतीश कुमार के चेहरे पर ही मिली है…इसलिए मुख्यमंत्री पद पर जेडीयू का अधिकार बनता है….
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है…उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई है…उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा के लोग उन्हें सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं……हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया…लेकिन जेडीयू के भीतर से भी ये आवाज उठने लगी है कि बीजेपी की नजर मुख्यमंत्री पद पर है……..वहीं जेडीयू के कई नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी उनकी पार्टी की है और ये जेडीयू के पास ही रहनी चाहिए…पार्टी के नेताओं का साफ कहना है कि इस मुद्दे पर आखिरी फैसला बीजेपी हाईकमान नहीं बल्कि नीतीश कुमार ही करेंगे…
यहां दिलचस्प बात ये है कि मुख्यमंत्री पद की ये लड़ाई सिर्फ बीजेपी और जेडीयू के बीच ही सीमित नहीं रह गई है…अब इसमें LJP-R भी खुलकर सामने आ गई है…पार्टी प्रमुख चिराग पासवान की ओर से भी मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी की चर्चा शुरू हो गई है…LJP-R के विधायक संजय पासवान से जब पूछा गया कि…मुख्यमंत्री पद किस पार्टी को मिलना चाहिए…तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी राय में ये पद LJP-R के पास आना चाहिए और चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए…हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अंतिम फैसला गठबंधन की बैठक में ही होगा और जो भी फैसला होगा, उसे सभी दल मानेंगे….
इन बयानों के बाद ये साफ हो गया है कि एनडीए के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है…बीजेपी फिलहाल इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रही है…पार्टी के कई नेता इस पर चुप्पी साधे हुए हैं…इसके पीछे एक बड़ी वजह सामाजिक समीकरण भी माने जा रहे हैं…दरअसल बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं…बीजेपी को इस बात का डर है कि अगर उसने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश की…तो ओबीसी और दलित वर्ग नाराज हो सकते हैं…
बिहार में लंबे समय से ये धारणा रही है कि बीजेपी मुख्य रूप से सवर्ण वर्ग की पार्टी है…ओबीसी और दलित वोट बैंक बीजेपी को सीधे तौर पर नहीं बल्कि गठबंधन के जरिए मिलता रहा है…इसमें नीतीश कुमार और चिराग पासवान की भूमिका अहम मानी जाती है….पासवान समाज की आबादी बिहार में करीब पांच प्रतिशत है और ये समुदाय आमतौर पर चिराग पासवान के साथ खड़ा दिखाई देता है….
वहीं कुर्मी और कोयरी समाज का बड़ा हिस्सा नीतीश कुमार को समर्थन देता रहा है…इन दोनों समुदायों की आबादी भी राज्य में अच्छी खासी मानी जाती है…यही कारण है कि जिस गठबंधन के साथ नीतीश कुमार होते हैं…उस गठबंधन को इन समुदायों का समर्थन मिल जाता है…ऐसे में अगर बीजेपी अकेले दम पर मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश करती है…तो उसे राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है…
यही वजह है कि बीजेपी का कोई भी बड़ा नेता फिलहाल ये खुलकर कहने को तैयार नहीं है कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से होगा….इस बीच निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री ने पूरे समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है…जेडीयू के कई नेता खुलकर उनके समर्थन में सामने आ चुके हैं…पार्टी में ये चर्चा भी है कि आने वाले समय में उन्हें संगठन की बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है…
अगर ऐसा होता है तो ये साफ संकेत होगा कि नीतीश कुमार धीरे-धीरे पार्टी की कमान नई पीढ़ी को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं…हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी मुख्यमंत्री पद अपने पास लेने की कोशिश करती है…तो नीतीश कुमार सख्त फैसला लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे…जेडीयू के नेताओं का कहना है कि बिहार में एनडीए की जीत का बड़ा कारण नीतीश कुमार का चेहरा ही रहा है…अगर चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा जाता…तो नतीजे अलग भी हो सकते थे…
बीजेपी भी इस राजनीतिक हकीकत को अच्छी तरह समझती है। यही वजह है कि वह नीतीश कुमार को पूरी तरह नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। लेकिन साथ ही वह मुख्यमंत्री पद की दावेदारी भी छोड़ने को तैयार नहीं दिख रही है….अब स्थिति यह बन गई है कि जेडीयू, बीजेपी और एलजेपीआर—तीनों ही दल किसी न किसी रूप में मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं। इससे एनडीए के भीतर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में ये भी चर्चा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से लगातार नीतीश कुमार से संपर्क बनाए रखा जा रहा है…कोशिश यही है कि किसी तरह ऐसा रास्ता निकाला जाए…जिससे गठबंधन भी बना रहे और पार्टी का राजनीतिक फायदा भी हो सके…वहीं जेडीयू के भीतर ये चिंता भी दिखाई दे रही है कि अगर एक बार मुख्यमंत्री पद बीजेपी के पास चला गया…तो भविष्य में शायद ही कभी जेडीयू को ये मौका मिल पाए…क्योंकि समय के साथ गठबंधन में जेडीयू की सीटें घटती जा रही हैं…जबकि बीजेपी की ताकत लगातार बढ़ रही है………
ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा….फिलहाल पूरे बिहार की नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिकी हुई हैं…अब सबको इंतजार है कि…वो कब अपना अगला कदम उठाते हैं और बिहार की राजनीति को किस नए मोड़ पर ले जाते हैं..



