गैस की कमी से मची अफरा-तफरी, विपक्ष ने लगा दी बीजेपी सरकार की क्लास

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गैस की कमी का असर अब होटलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज आम जनता की हालत खराब होती हुई नजर आ रही है। आलम ये है कि आम जनता आज सड़कों पर लाइन लगाए हुए अपने हक़ के लिए दर बा दर की ठोकरें खा रही है।

लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। जी हाँ दोस्तों दरअसल हम बात कर रहे हैं देश में चल रही LPG गैस की समस्या के बारे में। खास कर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गैस की कमी का असर अब होटलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है. मुंबई में होटल इंडस्ट्री की हालत इन दिनों बहुत खराब है, क्योंकि एलपीजी गैस की कमी की वजह से कई होटल बंद हो गए हैं या बंद होने की कगार पर हैं।

इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने दावा किया है कि शहर के करीब 20 प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं, और अगर गैस सप्लाई की समस्या जल्दी नहीं सुधरी तो अगले दो-तीन दिनों में 50 प्रतिशत तक होटल बंद हो सकते हैं। यह समस्या सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु और चेन्नई जैसे अन्य बड़े शहरों में भी होटल और रेस्टोरेंट को परेशानी हो रही है।

अहार के मुताबिक, यह सब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में रुकावट की वजह से हो रहा है, जो कि हाल ही में ग्लोबल इश्यूज जैसे मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों से जुड़ा हो सकता है। लेकिन सरकार की तरफ से यह कहा जा रहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें गलत हैं। फिर भी, होटल एसोसिएशन ने पेट्रोलियम मंत्री को चिट्ठी लिखकर मदद मांगी है, ताकि सप्लाई नॉर्मल हो सके।

विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रही हैं, कह रही हैं कि यह मैनेजमेंट की नाकामी है, लेकिन सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरी कदम उठा रही है। कुल मिलाकर, यह संकट होटल इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि मुंबई जैसे शहर में लाखों लोग इस बिजनेस से जुड़े हैं, और अगर ज्यादा होटल बंद हुए तो रोजगार पर असर पड़ेगा।

वहीं बात की जाए इस समस्या की तो कि यह समस्या कैसे शुरू हुई, तो आपको बता दें कि हाल ही में सरकार ने एक ऑर्डर जारी किया था, जिसमें कहा गया कि एलपीजी को मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जाए, क्योंकि कमर्शियल यूजर्स के लिए सप्लाई में कुछ रिस्ट्रिक्शंस लगाए गए हैं। अहार ने 5 मार्च  जारी इस ऑर्डर का हवाला देते हुए कहा कि इससे होटल वालों को गैस नहीं मिल रही है।

मुंबई में करीब 20 प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं, क्योंकि उनके पास कुकिंग गैस नहीं है, और वे इलेक्ट्रिक या अन्य अल्टरनेटिव पर स्विच नहीं कर पा रहे हैं। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने कहा कि अगर सप्लाई में 25 प्रतिशत से ज्यादा कटौती हुई तो यह कैटास्ट्रॉफिक हो सकता है, यानी बहुत बड़ा नुकसान। विपक्षी नेता इस पर सरकार को कोस रहे हैं, कह रहे हैं कि भाजपा की डबल इंजन सरकार पूरी तरह पटरी से उतर गई है, और लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। लेकिन सरकार की तरफ से आश्वासन दिया जा रहा है कि कोई कमी नहीं है, और सप्लाई चेन को सुधारने के लिए काम हो रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ऑयल कंपनियां 70 दिनों तक सप्लाई जारी रखने का वादा कर चुकी हैं, लेकिन अचानक बंद होने से होटल वाले हैरान हैं। यह संकट न सिर्फ होटल मालिकों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वेटर्स, कुक, सप्लायर्स और टूरिस्ट इंडस्ट्री को भी नुकसान पहुंचा रहा है। मुंबई जैसे व्यस्त शहर में जहां रोज लाखों लोग बाहर खाना खाते हैं, वहां अगर आधे होटल बंद हो गए तो फूड डिलीवरी और लोकल इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ेगा।

अब बात करते हैं कि यह समस्या क्यों इतनी गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एलपीजी शॉर्टेज इंटरनेशनल फैक्टर्स से जुड़ा है, ईरान-इजराइल टेंशन जो ग्लोबल ऑयल सप्लाई को प्रभावित कर रहा है। भारत एलपीजी का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है, और अगर इंटरनेशनल मार्केट में दिक्कत आती है तो यहां असर पड़ता है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने पहले से प्लानिंग नहीं की, और अब कमर्शियल सेक्टर को नजरअंदाज कर रही है।

मिसाल के लिए, कुछ एक्स पोस्ट्स में कहा गया है कि भाजपा सरकार की नीतियां फेल हो रही हैं, और मुंबई जैसे आर्थिक हब में यह संकट अर्थव्यवस्था को पीछे धकेल सकता है। हालांकि, कुछ सोर्सेज कहते हैं कि शॉर्टेज की खबरें एक्सैजेरेटेड हैं, और वास्तव में देश में पर्याप्त स्टॉक है। अहार ने प्रधानमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री से अपील की है कि कमर्शियल सप्लाई को प्रायोरिटी दी जाए, क्योंकि होटल इंडस्ट्री अस्पतालों, आईटी पार्क्स और हॉस्टल्स को भी सर्विस देती है।

अगर यह जारी रहा तो न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र में होटल बंद हो सकते हैं, जैसा कि पहले कोविड के समय हुआ था। उस समय भी एसोसिएशन ने साइलेंट प्रोटेस्ट किया था, लेकिन अब स्थिति और खराब लग रही है। सरकार को इस पर जल्दी एक्शन लेना चाहिए, ताकि छोटे-बड़े होटल वाले बच सकें। कुल मिलाकर, यह एक बैलेंस्ड अप्रोच की जरूरत है, जहां घरेलू और कमर्शियल दोनों की जरूरतों को देखा जाए।

इस बीच शिवसेना UBT से राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र से कहा है कि सरकार तैयारियों को लेकर कमजोर दिख रही है. उन्होंने कहा कि कहा कि एलपीजी की दिक्कत का सामना आम जनता को करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से फेल नहीं है, लेकिन हालात चिंताजनक हैं. उनके मुताबिक गैस की कमी का असर होटलों और छोटे कारोबारों पर पड़ेगा, जिससे रोजगार का संकट भी पैदा हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस मुद्दे पर अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाना चाहिए. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि पेट्रोल और गैस की दिक्कत का असर आने वाले समय में सीधे आम जनता पर पड़ सकता है.

इसके साथ ही सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में राज्यसभा सांसद ने कहा कि शांतिपूर्ण समय में हम कहते हैं कि हम हर तरह के संकट और व्यवधान से निपटने के लिए तैयार हैं. लेकिन युद्ध के समय कहा जा रहा है कि माफ़ कीजिए, हम मदद नहीं कर सकते. यानी जो बातें पहले कही जाती थीं, वे सिर्फ जुमले साबित हो रही हैं. डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को लेकर चेतावनी दे रहे थे, और युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने इजराइल का दौरा किया था. इसके बावजूद ऐसा लगता है कि भारत सरकार एक बार फिर तैयारियों के मामले में कमजोर और जरूरत से ज्यादा आत्ममुग्ध नजर आ रही है.

इस संकट के इम्पैक्ट को देखें तो मुंबई की होटल इंडस्ट्री में लाखों जॉब्स दांव पर हैं। छोटे रेस्टोरेंट से लेकर बड़े होटल तक, सब प्रभावित हैं। अहार के अनुसार, 20 प्रतिशत बंद होने से पहले ही हजारों लोग बेरोजगार हो चुके हैं, और 50 प्रतिशत अगर बंद हुए तो यह संख्या और बढ़ेगी। विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस या अन्य लोकल पार्टियां इस पर सरकार को टारगेट कर रही हैं, कह रही हैं कि भाजपा की सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट ने मिसमैनेजमेंट किया है। जिस तरह विपक्ष के बयान हैं कि यह “डबल इंजन सरकार का फेलियर” है। लेकिन सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें गलत हैं, और नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं।

ऑयल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल ने स्टेटमेंट दिया है कि फ्यूल की उपलब्धता पर्याप्त है। फिर भी, ग्राउंड पर होटल वाले कह रहे हैं कि सिलेंडर नहीं मिल रहे, और वे मजबूरन बंद कर रहे हैं। यह विरोधाभास क्यों है, यह समझना जरूरी है।

शायद डिस्ट्रीब्यूशन में समस्या है, या लोकल लेवल पर मिसकम्युनिकेशन। होटल एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि सप्लाई कट को 25 प्रतिशत से ज्यादा न किया जाए, वरना बड़ा नुकसान होगा। मुंबई की इकोनॉमी में होटल सेक्टर का बड़ा रोल है, क्योंकि यह टूरिज्म, बिजनेस और लोकल फूड कल्चर को सपोर्ट करता है। अगर यह संकट लंबा चला तो महंगाई बढ़ सकती है, क्योंकि फूड प्राइसेज प्रभावित होंगे। गौरतलब है की यह मामला लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है।

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