सैयद अता हसनैन बने बिहार के नए राज्यपाल, लोकभवन में हुआ शपथ ग्रहण, CM नीतीश भी रहे मौजूद
बिहार को उसके नए राज्यपाल मिल चुके हैं। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन शनिवार को लोकभवन में बिहार के राज्यपाल के तौर पर शपथ ले ली है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार को उसके नए राज्यपाल मिल चुके हैं। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन शनिवार को लोकभवन में बिहार के राज्यपाल के तौर पर शपथ ले ली है।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने आज यानी शनिवार को सुबह 11 बजे बिहार के राज्यपाल पद की शपथ ले ली। ये समारोह पटना के लोकभवन में हुआ। उन्हें पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में बिहार सरकार के मंत्रियों समेत कई नेता मौजूद रहे।
नए राज्यपाल का शपथ ग्रहण समारोह
नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी, बिहार विधानसभा के स्पीकर प्रेम कुमार, बिहार विधानपरिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह सहित कई मंत्रियों की मौजूदगी में शपथ ली। लोकभवन में सुबह 11 बजे ये कार्यक्रम हुआ।
बिहार के नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन
इससे पहले गुरुवार के दिन ही राज्यपाल सैयद अता हसनैन पटना पहुंच गए। वहां बिहार विधानसभा स्पीकर डॉ प्रेम कुमार ने उनका स्वागत किया। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी वहीं उनका स्वागत किया। इस दौरान कई और गणमान्य लोग भी नए राज्यपाल का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे थे।
लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट से रिटायर
सैयद अता हसनैन इंडियन आर्मी के सीनियर ऑफिसर रहे। फिर वो भारतीय सेना से लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट से रिटायर हुए। नए राज्यपाल करीब 40 वर्षों तक देश की सेना में सेवा दे चुके हैं। सुरक्षा से जुड़े कई मामलों में उनकी कार्यकुशलता ने उनके सीनियर से लेकर मातहतों तक को प्रभावित किया।
जम्मू-कश्मीर में कई मिशन को लीड किया
आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में भी सैयद अता हसनैन ने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और बड़े एवं खास पदों पर काम किया। एंटी टेररिस्ट ऑपरेशंस में भी उन्होंने कई बार नेतृत्व किया। इसको लेकर उन्हें सुरक्षा और स्ट्रैजिक मिशन का एक्सपर्ट भी माना जाता है।
आरिफ मोहम्मद खान का कार्यकाल भी रहा अच्छा
इससे पहले आरिफ मोहम्मद खान करीब 428 दिन तक बिहार के राज्यपाल रहे। उनका कार्यकाल छोटा लेकिन बेहतरीन और बिना किसी विवाद के रहा। इस दौरान पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेता उनके मुरीद रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों को लेकर कई बेबाक टिप्पणियां भी कीं।
अपने कार्यकाल में उन्होंने लोकभवन (राजभवन) को एक सक्रिय मंच बनाने की पूरी कोशिश की। वो कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे और खासतौर पर छात्रों और बुद्धिजीवियों के बीच जाकर उनसे कई बार राय मशविरा भी करते रहे।



