ईरान युद्ध पर घिरते ट्रंप, परमाणु हमले तक पहुंची बात

- 200 बिलियन डॉलर की युद्ध फडिंग के प्रस्ताव पर कांग्रेस में उठे सवाल
- ईरान के कतर पर वार से उसका 20 अरब डॉलर का हुआ नुकसान
- होर्मुज में फंसे 11 भारतीय जहाज, तेल-गैस की नब्ज थमी तो दुनिया की सांस अटक जाएगी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। व्हाइट हाउस युद्ध के लिए मोटा बजट मांगने की तैयारी कर रहा है तो दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी ही पार्टी में घिरते दिख रहे हैं। उन पर आरोप लग रहे हैं कि उनके पास न तो युद्ध की स्पष्ट रणनीति है और न कोई तय समयसीमा। यही वह सवाल है जो अब अमेरिकी राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक गूंज रहा है कि क्या यह जंग दिशा में है या सिर्फ विस्तार में? ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अब अपने स्वरूप और आकार दोनों में तेजी से बदल रहा है। जंग सीमित टकराव से निकलकर बहु आयामी हमलों में बदलती दिख रही है। समुद्र, आसमान और रणनीतिक ठिकाने सब निशाने पर हैं। ईरान लगातार आक्रामक रुख दिखा रहा है और उसके दावे भी उतने ही बड़े होते जा रहे हैं। ताजा दावा ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से आया है जिसमें कहा गया कि बीती रात समुद्री हमलों में 200 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरान के इस दावे से जंग की तीव्रता और सूचना युद्ध की आक्रामकता दोनों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अमेरिका में बढ़ रही बेचैनी?
अमेरिका के भीतर ही इस युद्ध को लेकर बेचैनी बढ़ती जा रही है। 200 बिलियन डॉलर के युद्ध फंडिंग प्रस्ताव ने युनाइटेड स्टेट कांग्रेस में तीखी बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ पैसे का नहीं है। बल्कि उस रणनीति का है जो अब तक साफ नहीं हो सकी है। सांसद यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस जंग का लक्ष्य क्या है इसकी सीमा क्या है? और इसका अंत कब और कैसे होगा? इसी बीच इजरायल ने भी अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। इजरायल का कहना है कि जब तक ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं होता तब तक यह युद्ध जारी रहेगा। इस बयान ने साफ कर दिया है कि संघर्ष अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं बल्कि राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई का रूप ले चुका है। कुल मिलाकर, एक तरफ मोर्चे पर हमले तेज हो रहे हैं तो दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में सवाल और असहजता बढ़ रही है। जंग अब सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि दावों, आंकड़ों और रणनीतिक अस्पष्टता से भी लड़ी जा रही है। जहां हर पक्ष अपनी कहानी गढ़ रहा है।
कतर को 20 अरब डालर का नुकसान
ईरान की ओर से रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर किए गए हमले के नुकसान के बारे में कतर ने जानकारी दी। कतर के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि मिसाइल हमलों के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई और वार्षिक राजस्व में लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि हमारी उत्पादन फैसिलिटी को भारी नुकसान हुआ है। जिसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और इसके चलते हमें दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा। कतर एनर्जी का अनुमान है कि बुधवार 18 मार्च 2026 और गुरुवार 19 मार्च 2026 की सुबह हुए मिसाइल हमलों के कारण उसके रास लफ्फान औद्योगिक शहर को हुए नुकसान से सालाना लगभग 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान होगा और मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा जिससे यूरोप और एशिया के बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होगी।
होर्मुज में फंसे 11 भारतीय जहाज
होर्मुज जलडमरूमध्य आज तनाव की सबसे खतरनाक रेखा बन चुका है। भारत सरकार के मुताबिक इस समुद्री रास्ते में रुकावट के चलते कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी से लदे करीब 11 जहाज फंसे हुए हैं। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि आने वाले आर्थिक भूचाल की चेतावनी है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल डीजल महंगा होगा रसोई गैस की कीमतें आम आदमी की कमर तोड़ देंगी और उद्योगों की लागत आसमान छूने लगेगी। हर फैक्ट्री, हर ट्रांसपोर्ट, हर घर सब इस आग की चपेट में आएंगे। इतिहास गवाह है कि जब-जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडराया है दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई है।
गैस फील्ड पर हमले को लेकर ट्रंप नेतन्याहू में दरार
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बड़ा मतभेद खुलकर सामने आए हैं। ईरान के साउथ पार्स गैस पर हुए हमले को लेकर ट्रंप ने कहा कि मैंने इजरायल से ऐसा न करने के लिए कहा था।
नेतन्याहू ने मतभेद को नकारा
हालांकि, इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ चल रहे मतभेद वाली बात को नकार दिया और कहा कि इजरायल ने ईरान के गैस क्षेत्र पर आगे के हमलों से बचने के लिए ट्रंप के अनुरोध को मान लिया है।
मैंने ऐसा नहीं करने के लिए कहा था : ट्रंप
ईरान के साउथ पार्स गैस पर इजरायल द्वारा किए हमले के बाद ईरान भी खाड़ी देशों के ईधन वाले जगहों को निशाना बना रहा है। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वह ईरान की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा संपत्ति मानी जाने वाली जगह पर इजरायल के हमले का समर्थन नहीं करते हैं। ट्रंप ने कहा कि मैनें इजरायल से ऐसा न करने के लिए कहा था।ओवल ऑफिस में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ हुई बैठक के दौरान नेतन्याहू के फैसले के बारे में कहा, मैंने उनसे कहा, ऐसा मत करो। हमारा तालमेल बहुत अच्छा है। सब कुछ समन्वित है, लेकिन कभी-कभी वह कुछ ऐसा कर देते हैं जो मुझे पसंद नहीं आता। और अगर मुझे वह पसंद नहीं आता, तो हम अब ऐसा नहीं करते।
जयशंकर ने की इजरायल विदेश मंत्री के साथ बात
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से अहम बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात बढ़ते संघर्ष और उसके वैश्विक असर पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक बातचीत में मौजूदा सैन्य टकराव, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के संघर्ष के विस्तार के खिलाफ है और कूटनीतिक समाधान को ही आगे बढ़ाने का पक्षधर है। साथ ही भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में मौजूद भारतीय हितों को लेकर भी चिंता जताई गई।
हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला अस्वीकार्य : भारत
ईरान जंग के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसी जहाजों के मुद्दों को लेकर भारत ने कड़ा रुख दिखाया है। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी ने सभी नाविकों की सुरक्षा, नेविगेशन की आजादी, समुद्री सुरक्षा और व्यापार व एनर्जी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। तीन भारतीय नाविकों सहित निर्दोष लोगों की जान जाने पर शोक व्यक्त करते हुए कहा बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करें।
एक चूक और तबाही तय
मिडिल ईस्ट का तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है जहां पारंपरिक युद्ध की सीमाएं टूटती दिख रही हैं। ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव अब उस स्तर पर जा खड़ा हुआ है जहां परमाणु विकल्प की फुसफुसाहट खुली चेतावनी में बदलती नजर आ रही है। लगातार बढ़ते हमले जवाबी कार्रवाई और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की होड़ ने हालात को बेहद अस्थिर बना दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब कूटनीति कमजोर पड़ती है और सैन्य दबाव चरम पर पहुंचता है तब परमाणु हथियारों की चर्चा सिर्फ डराने की रणनीति नहीं रह जाती वह वास्तविक खतरे का संकेत बन जाती है। इस बीच अमेरिका की भूमिका भी निर्णायक होती जा रही है जिससे यह संघर्ष क्षेत्रीय न रहकर वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो एक गलत फैसला या तकनीकी चूक पूरी दुनिया को ऐसे युद्ध में झोंक सकती है जिसका कोई विजेता नहीं होगा। फिलहाल दुनिया सांस रोककर देख रही है क्योंकि अब यह जंग सिर्फ सीमाओं की नहीं बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य की बन चुकी है।




