48 साल तक कांग्रेस का गवाह रहा 24 अकबर रोड, अब खाली होगा बंगला
सर एडविन लुटियंस ने इस बंगले को 5 कमरों का बनवाया था. साथ ही लिविंग रूम, डाइनिंग स्पेस, किचन आदि मिला कर यह बंगला 8 कमरों का हो गया था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सर एडविन लुटियंस ने इस बंगले को 5 कमरों का बनवाया था. साथ ही लिविंग रूम, डाइनिंग स्पेस, किचन आदि मिला कर यह बंगला 8 कमरों का हो गया था. साथ ही सर्वेंट क्वार्टर्स भी थे. लेकिन एक-एक करके आज इस बंगले में 35 कमरे हो गए.
सुरेश सिंह कांग्रेस मुख्यालय से तब जुड़े जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री हुआ करती थीं. हालांकि सुरेश सिंह न तो कांग्रेस के कोई पदाधिकारी थे न ही उसके सदस्य या कार्यकर्ता. वे साल 1984 में बनारस से दिल्ली आए रोज़गार की खोज में. यहां उनकी भेंट राजेंद्र कुमारी वाजपेयी के एक करीबी एलएन पांडेय से हुई और उन्होंने सुरेश को कांग्रेस मुख्यालय के स्टाफ में रखवा दिया. तब से वे जनवरी 2024 तक यानी पूरे 40 साल तक 24, अकबर रोड से जुड़े रहे. बहुत सारी खट्टी-मीठी यादें हैं और जब वे कांग्रेस मुख्यालय की यादें साझा करते हैं तो उनकी आंखें गीली हो जाती हैं.
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जब कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब कांग्रेस अपने पीक पर थी. कांग्रेस मुख्यालय (AICC) से तो इनको वेतन और सुविधाएं मिलती ही थीं. इंदिरा जी और राजीव जी अलग से होली, दीवाली तथ ईद पर AICC में कार्यरत स्टाफ़ को कुछ न कुछ अवश्य देते.
अब इतने पदाधिकारी कहां बैठेंगे!
सुरेश सिंह के अनुसार जब उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय जॉइन किया था तब पार्टी के 5 महासचिव होते थे. और उनके साथ 10 संयुक्त सचिव. अब तो संयुक्त सचिव का प्रमोशन सचिव के रूप में हो गया है और संयुक्त सचिवों को हल्के काम सौंपे गए. आज की तारीख में कांग्रेस पार्टी में 13 महासचिव हैं. कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा एक कोषाध्यक्ष अजय माकन और एक संयुक्त कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला हैं. इसके अलावा असंख्य प्रभारी और 29 सचिव भी हैं.
इतनी बड़ी संख्या को 24 अकबर रोड में बिठाया भी नहीं जा सकता था. इसलिए AICC ने 9A, कोटला रोड पर अपना नया मुख्यालय बना लिया है. उनको वहां शिफ़्ट हुए भी लंबा समय गुजर चुका है. अब शहरी विकास मंत्रालय ने कहा है कि कांग्रेस अपना पुराना दफ्तर 24, अकबर रोड को 28 मार्च तक खाली कर दे. इसके अलावा 5 रायसीना रोड भी खाली करने को कहा गया है.
24, अकबर रोड कांग्रेस के लिए सौभाग्यशाली
कांग्रेस अपने पुराने मुख्यालय को खाली नहीं करना चाहती. इसके पीछे कांग्रेस की सफलताएं जुड़ी हैं और अनगिनत यादें भी. खासकर इंदिरा गांधी परिवार के लिए 24, अकबर रोड बहुत भाग्यशाली रहा है. साल 1977 में कांग्रेस की हार के बाद इंदिरा गांधी 1980 के लोकसभा चुनाव में विशाल बहुमत ले कर सरकार में लौटी थीं.
तब कांग्रेस दफ्तर इसी 24, अकबर रोड में आ गया था. इस बंगले को 1978 में कांग्रेस ने अपना मुख्यालय बनाया. तब यह बंगला आंध्र प्रदेश के सांसद जी वेंकट स्वामी के नाम एलॉट था. इंदिरा की हत्या के बाद 1985 में राजीव गांधी की अगुआई में पार्टी ने लोकसभा की 410 सीटें जीती थीं. उस समय भारतीय जनता पार्टी को मात्र 2 सीटें मिली थीं. इसके बाद 1989 के चुनाव में कांग्रेस हारी और 1991 में कांग्रेस को अकेले 244 सीटें मिलीं. बिना किसी दूसरी पार्टी की मदद के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने पूरे 5 वर्ष अल्पमत की सरकार चलाई.
AICC स्टाफ की कई खुशनुमा यादें
साल 2004 में जब कांग्रेस की अगुआई वाली UPA सरकार बनी तब भी यह बंगला कांग्रेस के पास था. पूरे 10 साल तक UPA सरकार मनमोहन सिंह की अगुआई में चली. 48 साल पुराने इस बंगले को खाली करने से कांग्रेस मना कर रही है. यह बंगला कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता सोनिया गांधी के आवास 10, जनपथ से सटा हुआ है. इन दोनों बंगलों के बीच एक द्वार है, जिसके चलते सोनिया गांधी कभी भी पार्टी मुख्यालय पहुंच सकती थीं.
AICC स्टाफ की भी इस बंगले से भावनाएं जुड़ी हुई हैं. कांग्रेस ने सदैव स्टाफ को भी बेहतर वेतन और प्रोविडेंड फंड, बोनस तथा अर्जित, चिकित्सकीय और आकस्मिक अवकाश दिए. कांग्रेस के अलावा कोई भी पार्टी अपने स्टाफ को इतनी सुविधाएं नहीं देता. यह बताते हुए सुरेश भावुक भी हो गए. कांग्रेस ने यह भी नियम बनाया था कि मंत्री गण अपने गैर सरकारी सहायक AICC स्टाफ़ से ही छांटें.
कांग्रेस ऑफिस की कैंटीन कौन भूलेगा!
इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के इस मुख्यालय की कैंटीन भी सदैव याद की जाएगी. यहां भोजन बहुत किफायती दामों पर मिलता था. 1980 और 1990 के दशक में यहां थाली 10 रुपये की मिलती थी. यहां पर इसी कीमत पर डोसा तो अभी हाल के वर्षों तक मिलता रहा है. यह कोई AICC के स्टाफ, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं अथवा पत्रकारों के लिए ही नहीं था. बल्कि दूर-दराज से आया कोई अनजान शख्स भी इसी कीमत पर भोजन ग्रहण कर सकता था.
इस मुख्यालय के अंदर जाने में भी कोई बहुत निगरानी या पूछताछ नहीं की जाती थी. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और राव के समय तक कोई भी बेरोकटोक यहां जा सकता था. बाद के वर्षों में सुरक्षा थोड़ी कड़ी की गई. कई बार तो दूसरे दलों के कार्यकर्ता भी भोजन के लिए 24, अकबर रोड आ जया करते थे.
ब्रिटिश अधिकारी के आवास से बर्मा हाउस तक
अब 9A, कोटला रोड पर जो मुख्यालय है, वहां का रवैया कारपोरेट ऑफिस जैसा हो गया है. फिर भी BJP की तुलना में न के बराबर. किंतु पूछताछ अधिक होने लगी है. कांग्रेस का यह ऑफिस अपना एक शानदार इतिहास भी रखता है. टाइप-7 आकार का यह बंगला अब 100 साल का हो चला है. 1912 में जब देश की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली लाई गई, तब सर एडविन लुटियंस को नई दिल्ली बसाने का काम सौंपा गया.
उन्होंने 1911 से 1925 के 28 वर्ग किमी के इस दायरे में कई बंगलों का निर्माण करवाया था. आजादी के पहले इस बंगले में ब्रिटिश सैन्य अधिकारी सर रेज़िनल्ड मैक्सवेल को एलॉट हुआ. 1960 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसे बर्मा हाउस (म्यामार के राजदूत का घर) बनाने की अनुमति दी. यहां पर म्यामार की राजदूत दा खिन रहने लगीं.
आंग सान सू ची ने यहीं रह कर पढ़ाई पूरी की
उनकी बेटी आंग सान सू ची का बचपन भी यहीं बीता. आंग सान सू ची बाद में म्यामार की राष्ट्रपति बनीं और उन्हें नोबेल शांति पुरुस्कार भी मिला. दिल्ली के स्कूल जीसस एंड मेरी में स्कूली शिक्षा पाने के बाद उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की. उस समय लेडी श्रीराम कॉलेज दरिया गंज में था. कांग्रेस के विभाजन के साथ ही आज की कांग्रेस (INC) का दफ्तर भी बदलता रहा.
सात, जंतर मंतर रोड पर कांग्रेस का आजादी के बाद नया ऑफिस बना. लेकिन जब इंदिरा गांधी और मोरार जी देसाई गुट में फुट पड़ी तो इंदिरा गांधी ने 5, राजेंद्र प्रसाद रोड पर कांग्रेस का नया ऑफिस खोला. लेकिन 1978 में इंदिरा गांधी और उनके साथ आए कांग्रेसी धड़े ने 24, अकबर रोड को पसंद किया. बूटा सिंह और एआर अंतुले ने सबसे पहले इस बंगले पर आसन जमाया. तब से 48 साल से यह बंगला कांग्रेस का पार्टी ऑफिस बना हुआ है.
5 कमरों से 35 कमरों तक का सफर
इस बंगले का कायाकल्प भी हर अध्यक्ष ने अपने हिसाब से कराया. सर एडविन लुटियंस ने इसे 5 कमरों का बनवाया था. इसके अलावा लिविंग रूम, डाइनिंग स्पेस, किचन आदि मिला कर यह बंगला 8 कमरों का हो गया था. साथ ही सर्वेंट क्वार्टर्स भी थे. परंतु आज इस बंगले में 35 कमरे हैं. हर महासचिव और उसके स्टाफ के लिए एक कक्ष सुसज्जित था. अब जब सरकार ने इस बंगले को खाली करने की तिथि 28 मार्च को फिक्स कर दी है तब कांग्रेस के अंदर भी खलबली मची है.
कांग्रेस के इतिहास के साथ तो यह जुड़ा भी हुआ है दूसरे 10, जनपथ के करीब होने से भी कांग्रेस इस बंगले को अपने पास रखना चाहती है. अब कांग्रेस के नेता यह धमकी भी दे रहे हैं कि वे मोदी सरकार द्वारा बंगला ख़ाली कराये जाने के खिलाफ अदालत जाएंगे.



