मिर्ज़ापुर: गंगा की लहरों के आगे नहीं टिक पाया नया पीपा पुल, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

मिर्ज़ापुर में गंगा नदी पर बना जोपा-रामपुर के बीच का पीपा पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे पहले विंध्याचल और नेवढ़िया घाट के पुल भी बह चुके हैं। लगातार तीसरी घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता और पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

4pm न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में गंगा नदी पर बने पीपा पुलों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में एक और पीपा पुल के क्षतिग्रस्त होने की घटना सामने आई है। इस बार नगर विधानसभा क्षेत्र में जोपा से रामपुर के बीच गंगा नदी पर बना नया पीपा पुल लहरों का दबाव नहीं झेल सका और उसका कुछ हिस्सा टूट गया।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर क्षतिग्रस्त पुल से ही गुजरना पड़ा, जबकि कुछ लोग नाव के सहारे गंगा पार करते दिखाई दिए।

गंगा की लहरों से नहीं टिक पाया नया पीपा पुल

जानकारी के मुताबिक यह पीपा पुल हाल ही में बनाया गया था, लेकिन गंगा नदी की तेज लहरों का दबाव झेलने में नाकाम रहा। पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के टूटने के बाद कुछ देर तक स्थिति बेहद जोखिम भरी रही। कई लोग मजबूरी में टूटी हुई जगह से ही गुजरते रहे।

एक घंटे बाद अस्थायी मरम्मत कर शुरू कराया गया आवागमन

घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आनन-फानन में मरम्मत कर करीब एक घंटे के भीतर पुल को फिर से चालू कराया गया। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ अस्थायी समाधान है और पुल की मजबूती को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।

पहले भी टूट चुके हैं दो पीपा पुल

मिर्ज़ापुर में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले में दो पीपा पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुछ दिन पहले विंध्याचल में नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा द्वारा उद्घाटन किए गए पीपा पुल का एक हिस्सा बह गया था, जिससे आवागमन काफी समय तक प्रभावित रहा।

इसी तरह मझवां विधानसभा क्षेत्र के नेवढ़िया घाट पर विधायक सुचिस्मिता मौर्य द्वारा उद्घाटित पीपा पुल भी गंगा के तेज बहाव में बह गया था। उस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

अब तीसरे पुल पर भी उठे सवाल

लगातार तीसरे पीपा पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब जिले में एक नई बहस शुरू हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतने कम समय में एक के बाद एक पुल क्यों खराब हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण की गुणवत्ता बेहतर होती तो शायद बार-बार ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। वहीं इस मामले में संबंधित विभाग के अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच आवागमन के लिए ये पीपा पुल बेहद जरूरी माने जाते हैं। रोजाना सैकड़ों लोग इन्हीं पुलों के सहारे गांव से शहर और शहर से गांव आते-जाते हैं। ऐसे में बार-बार पुलों के क्षतिग्रस्त होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और पुलों की गुणवत्ता और सुरक्षा की सही तरीके से जांच कराए।

रिपोर्ट – संतोष देव गिरि

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