IDF का बड़ा एक्शन: हिजबुल्लाह के करीब 20 ठिकानों पर इजरायल के ताबड़तोड़ हमले, इलाके में बढ़ा तनाव
इज़रायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उसने लेबनान में सक्रिय हिज़बुल्लाह के करीब 20 ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इज़रायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उसने लेबनान में सक्रिय हिज़बुल्लाह के करीब 20 ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ दिनों से सीमा पर लगातार झड़पों और रॉकेट हमलों की घटनाएं बढ़ती जा रही थीं।
आईडीएफ के अनुसार, इन हमलों का लक्ष्य हिज़बुल्लाह के सैन्य ठिकाने, हथियार डिपो, और कमांड सेंटर थे। सेना का कहना है कि ये ठिकाने इज़रायल के उत्तरी क्षेत्रों पर हमले की साजिश रच रहे थे, जिन्हें समय रहते नष्ट करना जरूरी था।
लगातार बढ़ रहा था खतरा
इज़रायली सेना ने अपने बयान में कहा कि पिछले 48 घंटों में हिज़बुल्लाह की ओर से कई बार रॉकेट और मिसाइल दागे गए, जिससे नागरिक इलाकों में खतरा बढ़ गया था। इसी के जवाब में यह सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई की गई।
स्थानीय लोगों में दहशत
हमलों के बाद दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और धुएं के गुबार उठते देखे गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों से भारी नुकसान हुआ है, हालांकि अभी तक हताहतों की आधिकारिक संख्या सामने नहीं आई है।
हिज़बुल्लाह की प्रतिक्रिया
हिज़बुल्लाह की ओर से भी बयान जारी किया गया है, जिसमें इन हमलों को “आक्रामक और उकसावे वाली कार्रवाई” बताया गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि वह इसका जवाब देगा, जिससे क्षेत्र में और अधिक तनाव बढ़ने की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ गई है। कई देशों और संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और हालात को नियंत्रण में रखने की अपील की है, ताकि यह टकराव बड़े युद्ध में न बदल जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्षों के बीच यह टकराव जारी रहा, तो यह पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इज़रायल और हिज़बुल्लाह के बीच पहले भी कई बार संघर्ष हो चुका है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं।
फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप इस बात को तय करेगा कि यह तनाव शांति की ओर बढ़ेगा या बड़े संघर्ष का रूप ले लेगा।



