पश्चिम बंगाल में जागते रहो…

  • नजरें चौकन्नी ड्यूटी निराली टीएमसी कर रही ईवीएम की रखवाली
  • ममता बनर्जी ने संभाली कमान
  • तृणमूल कांग्रेस का धरना खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ के आरोप
  • कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विवाद तेज
  • चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में अब बारी ईवीएम रखवाली की है। एसआईआर से लेकर मतदान तक की लड़ाई लड़ चुके टीएमसी लड़को ने स्ट्रांग रूम की निगरानी की डयूटी संभाल ली है। सीएम ममता बनर्जी ने आक्र ामक तेवरों के साथ बयान दिया है कि वह मर जाएंगी लेकिन ईवीएम को लुटने नहीं देगी। गौरतलब है कि मतदान के बाद से ही टीएमसी कार्यकर्ता लगातार इस बात का संदेह जता रहे हैं कि स्ट्रांग रूम में सबकुछ सेफ नहीं है। उनके इस संदेह को खुदीराम अनुशीलन केंद्र से आई ईवीएम टैमपरिंग की तथाकथित खबर ने चिंगारी का रूप दे दिया और बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ता आमने सामने आ गये।

बहुस्तरीय सुरक्षा की समीक्षा

चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। आयोग का कहना है कि सभी स्ट्रॉन्ग रूम बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत हैं और उनकी निगरानी सीसीटीवी के जरिए लगातार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के बाद इस प्रकार का अविश्वास लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौती बन सकता है। जहां एक ओर राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर सतर्कता बरत रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह स्थिति संस्थाओं पर भरोसे को भी परख रही है। फिलहाल, नतीजों से पहले का यह दौर बंगाल में राजनीतिक तनाव का नया चरण बनकर उभरा है, जहां जनादेश सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी और उसे लेकर उठ रहे सवाल-दोनों समानांतर चल रहे हैं।

आमने-सामाने बीजेपी-टीएमसी

कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम और पोस्टल बैलेट की प्रक्रिया को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि स्ट्रॉन्ग रूम को समय से पहले खोला गया और अंदर कुछ लोग काम कर रहे थे, जिसकी जानकारी राजनीतिक दलों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी टीम सुबह तक वहां मौजूद थी, लेकिन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। इसी मुद्दे पर टीएमसी नेता शशि पांजा ने भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अज्ञात लोग पोस्टल बैलेट संभाल रहे हैं और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अंदर क्या कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब स्ट्रॉन्ग रूम को उम्मीदवारों की मौजूदगी में सील किया गया था, तो उसे किस आधार पर खोला गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथित मौजूदगी को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। खबरों में कहा गया कि वह कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में मौजूद थीं। इस पर विपक्ष ने सवाल उठाए। बीजेपी से जुड़े वकील सूर्यनिल दास ने आरोप लगाया कि किसी उम्मीदवार का लंबे समय तक स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में रहना असंवैधानिक है।

भारत निर्वाचन आयोग ने लिया संज्ञान

इस पूरे विवाद पर भारत निर्वाचन आयोग ने संज्ञान लिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि मामले की जानकारी आयोग को दे दी गई है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। कोलकाता उत्तर की जिला निर्वाचन अधिकारी स्मिता पांडे ने स्पष्ट किया कि स्ट्रॉन्ग रूम से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत पूरी की गई हैं। उन्होंने बताया कि मतदान के बाद ईवीएम को उम्मीदवारों और उनके एजेंटों की मौजूदगी में सील किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रक्रिया को लेकर विवाद हो रहा है, वह दरअसल पोस्टल बैलेट को अलग करने की वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। यह कार्य पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार किया जा रहा था और इसकी जानकारी राजनीतिक दलों को ईमेल के जरिए दे दी गई थी। इस बीच, कोलकाता के विभिन्न हिस्सों में भाजपा समर्थकों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण माहौल की खबरें भी सामने आई हैं। दोनों दलों के कार्यकर्ता स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर निगरानी कर रहे हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका जता रहे हैं। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

भाजपा नेताओं ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज किया

हालांकि, भाजपा नेताओं ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। मानिकतला से भाजपा उम्मीदवार तापस रॉय ने कहा कि यह सब सिर्फ अफवाह है और हार की आशंका के चलते टीएमसी इस तरह के आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि स्ट्रॉन्ग रूम में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है और बिना अनुमति कुछ भी संभव नहीं है। एंटाली से बीजेपी उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल ने भी टीएमसी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों की मौजूदगी के कारण ही राज्य में शांतिपूर्ण मतदान संभव हो पाया और रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है और अब ड्रामा कर रही है।

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