CM फेस पर सस्पेंस बरकरार, खरगे बोले- सोनिया और राहुल से चर्चा के बाद होगा निर्णय
खरगे ने कहा, “यह फैसला सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ मिलकर लिया जाएगा। हम दूसरे वरिष्ठ नेताओं से भी राय-मशविरा करते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री पद पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के साथ व्यापक चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
क्या बोले खरगे?
खरगे ने कहा, “यह फैसला सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ मिलकर लिया जाएगा। हम दूसरे वरिष्ठ नेताओं से भी राय-मशविरा करते हैं। फैसला कब होगा, यह मैं आपको बता दूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह पूरी तरह से राज्य के हित को ध्यान में रखकर होगा और पार्टी के सभी नेताओं को उसका समर्थन करना होगा।
CM पद को लेकर क्यों है सस्पेंस?
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। कई वरिष्ठ नेता इस पद के दावेदार माने जा रहे हैं, जिसके चलते अंतिम नाम पर सहमति बनाने में समय लग रहा है।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि ऐसा निर्णय लिया जाए जो न केवल राजनीतिक रूप से संतुलित हो, बल्कि सरकार को स्थिरता भी प्रदान करे।
वरिष्ठ नेताओं से भी ली जा रही राय
खरगे ने संकेत दिया कि केवल शीर्ष नेतृत्व ही नहीं, बल्कि अन्य अनुभवी नेताओं की राय भी इस फैसले में अहम भूमिका निभाएगी। इससे यह साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
राज्य हित को बताया प्राथमिकता
कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री के चयन में व्यक्तिगत पसंद या गुटबाजी को महत्व नहीं दिया जाएगा। उनका कहना था कि अंतिम फैसला ऐसा होगा जो कर्नाटक के विकास और जनता के हित में हो।
राजनीतिक मायने
खरगे के इस बयान को पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह भी संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए सोच-समझकर फैसला लेना चाहता है। अब सभी की नजरें कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। कर्नाटक में CM पद को लेकर जारी सस्पेंस के बीच मल्लिकार्जुन खरगे का बयान यह दर्शाता है कि कांग्रेस नेतृत्व संतुलित और सर्वसम्मति से निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि पार्टी किसे राज्य की कमान सौंपती है।



