पंजाब में ईडी की दस्तक से सियासत में भूचाल

  • क्या आप मॉडल तोड़ने की तैयारी शुरू?  
  • पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर पर ईडी की छापेमारी
  • भाजपा पर चौतरफा वार
  • आप ने मोदी सरकार को घेरा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पंजाब जहां कभी आम आदमी पार्टी ने नई राजनीति का झंडा उठाया था आज वहीं सत्ता के गलियारों में एक पुराना सवाल बारूद बनकर फट रहा है कि क्या पंजाब में अब ऑपरेशन लोटस का अगला अध्याय लिखा जाना शुरू हो चुका है। आज सुबह-सुबह चंडीगढ़ में हलचल बढ़ती है सरकारी आवास के बाहर गाडिय़ों का काफिला रुकता है। ईडी के अधिकारी उतरते हैं और सीधे पहुंचते हैं पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर। बस यहीं से शुरू हो जाती है राजनीतिक विस्फोट की कहानी। आज अभी तक की पंजाब में ईडी की की गयी कार्रवाई से आम आदमी पार्टी आगबबूला हो गयी है और कह रही है कि यह जांच नहीं राजनीतिक दबाव है। यह कानून नहीं डराने की रणनीति है। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने की स्क्रिप्ट है। लेकिन सवाल सिर्फ छापेमारी का नहीं है सवाल टाइमिंग का है। सवाल उस पैटर्न का है जो पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति में बार-बार दिखाई दिया है। पहले ईडी फिर सीबीआई फिर राजनीतिक दबाव और उसके बाद सत्ता के समीकरणों में बदलाव। महाराष्ट्र में हुआ झारखंड में आरोप लगे दिल्ली में टकराव दिखा और अब पंजाब में वही आहट सुनाई दे रही है। क्या भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है? क्या आम आदमी पार्टी को चुनाव से पहले घेरने की रणनीति बनाई जा रही है? या फिर सचमुच करोड़ों के घोटाले की परतें खुलने वाली हैं?

पंजाब में ईडी की एंट्री और सियासी धमाका

आज सुबह पंजाब की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजीव अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी। ईडी की टीम भारी सुरक्षा और दस्तावेजी तैयारी के साथ पहुंची। बताया जा रहा है कि दिल्ली, गुरुग्राम और चंडीगढ़ समेत कई ठिकानों पर एक साथ ईडी की कार्रवाई की गई। जांच एजेंसी कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी मोबाइल फोन खरीद और एक्सपोर्ट रैकेट की जांच कर रही है। आरोप है कि फर्जी कंपनियों और नकली बिलों के जरिए आईटीसी एक्सपोर्ट रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक का लाभ उठाया गया।

हर बड़े विपक्षी दल के नेताओं तक ईडी की कार्रवाई पहुंची

  •  महाराष्ट्र में अनिल देशमुख से लेकर संजय राउत तक
  •  दिल्ली में मनीष सिसोदिया से लेकर सत्येंद्र जैन तक
  •  झारखंड में हेमंत सोरेन
  •  बंगाल में पार्थ चटर्जी
  •  बिहार में लालू परिवार

क्या पंजाब में शुरू हो चुका है ऑपरेशन लोटस?

यही वह सवाल है जो अब पंजाब की राजनीति में सबसे ज्यादा गूंज रहा है। आप इसे सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक ऑपरेशन मान रही है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भाजपा विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में भाजपा अभी संगठनात्मक रूप से उतनी मजबूत नहीं है लेकिन अगर विपक्षी दलों में टूट-फूट या दबाव की राजनीति शुरू होती है तो समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।

आप का पलटवार डराने की राजनीति नहीं चलेगी

ईडी की कार्रवाई के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी पूरी तरह आक्रामक मोड में आ गई। पंजाब सरकार के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप धालीवाल ने कहा है कि भाजपा लगातार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि संजीव अरोड़ा एक कारोबारी पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। वहीं कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने इसे सीधे-सीधे चुनावी रणनीति करार दिया। उनका कहना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने दबाव की राजनीति शुरू कर दी है। आप नेताओं का दावा है कि पहले भी ऐसी कार्रवाइयां हुईं लेकिन कुछ साबित नहीं हुआ।

भाजपा चुप लेकिन विपक्ष हमलावर

दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे प्रकरण पर भाजपा की तरफ से बेहद सीमित प्रतिक्रिया आई है लेकिन विपक्षी दलों ने हमला तेज कर दिया। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि यह कार्रवाई हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी जीएसटी बिलों के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया और पैसों को दुबई के जरिए राउंड ट्रिपिंग में इस्तेमाल किया गया।

ईडी छापेमारी और राजनीति पहले भी उठते रहे सवाल

पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति में ईडी की कार्रवाई सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनकर उभरी है। लगभग हर बड़े विपक्षी दल के नेताओं तक ईडी की कार्रवाई पहुंची। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए हो रहा है। हालांकि केंद्र सरकार और भाजपा हर बार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती रही है कि एजेंसियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में हो रही है। लेकिन दिलचस्प तथ्य यह है कि जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई उनमें से कई बाद में राजनीतिक रूप से कमजोर पड़े कुछ ने दल बदले और कुछ के सत्ता समीकरण बदल गए। यही वजह है कि अब पंजाब में हुई ईडी की ताजा कार्रवाई को सिर्फ जांच नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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