मोदी के देशभक्ति वाले ढ़ोग की विपक्ष ने खोली पोल, लगाई लंका
मोदी जी ने लोगों से अपील की कि मेट्रो और कार पूलिंग का इस्तेमाल करें, खाद्य तेल कम करें और रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खेती अपनाएं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में अगर किसी का भला हुआ है तो वो है खुद भाजपा, क्योंकि वो चाहे मोदी हों या अमित शाह या भी कोई और भाजपा का बड़ा नेता ये सब महज चुनावी फायदे के महज दिखावे में जनता के मुद्दे और उन्हें हक़ दिलाने की बाद करते हैं वरना तो ये किसी को चवन्नी भी न दें।
आपने अक्सर गौर किया होगा कि जब-जब चुनाव नदीक आता है ये नेता अपने भाषण की भाषा बेहद सरल और दयालु स्वाभाव की रखते हैं लेकिन वहीं चुनाव के जाते ही गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेते हैं। जी हाँ दोस्तों आप शायद ऐसे बड़े-बड़े नेताओं को मेरे द्वारा गिरगिट कहे जाने पर चौंक गए होंगे लेकिन असल बात तो यही है कि ये हैं गिरगिट ही। जो की अपने फायदे के लिए देश को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं लेकिन मजाल है कि इनका जमीर जागे और ये देश का उद्धार करने की सोचें।
अब असल मुद्दे की बात पर हैं। बीते कई महीनों से चुनावी प्रचार में व्यस्त मोदी जी को अचानक अब देश की देशवासियों की चिंता सताने लगी है। तभी तो महिलाओं के हज की बात करने के दावे करने वाले मोदी जी अब उन्ही से सोने और गहने न खरीदने की अपील करते हुए नजर आ रहे हैं। जी हाँ दोस्तों सही सुना आपने दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इस हालात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक रैली के दौरान लोगों से बड़ी अपील की। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल कम इस्तेमाल करें, घर से काम करें, अनावश्यक विदेश यात्रा न करें और शादियों में एक साल तक सोना न खरीदें।
मोदी जी ने लोगों से अपील की कि मेट्रो और कार पूलिंग का इस्तेमाल करें, खाद्य तेल कम करें और रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खेती अपनाएं। उनका कहना था कि इससे विदेशी मुद्रा बचाई जा सकेगी। लेकिन यह अपील आम लोगों पर बोझ डालने वाली लगी। कितने कमाल की बात है न मिडिल ईस्ट में तनाव तो कई महीनों से बरकरार हैं लेकिन मोदी को ये बात अभी ही क्यों याद आई?
दरअसल इससे पहले बंगाल जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव थे जिसे लेकर मोदी एंड कंपनी इस कदर व्यस्त थी कि उन्हें चुनाव में खुद की जीत के अलावा कुछ दिख ही नहीं रहा था। मगर जैसे ही चुनावी नतीजे आये और खुद की जीत हुई उसके बाद से सारे संकट दिखने लगे। वहीं मोदी की इस अपील पर देश में जमकर चर्चा हो रही है और विपक्ष मोदी और बीजेपी पर हमलावर है।
इसी बीच मोदी के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही पीएम मोदी को संकट याद आ गया हैं. अगर बीजेपी के लोग सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो अपनी नाकामी स्वीकार करें और देश को बर्बाद न करें. अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया! दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
साथ ही अखिलेश यादव में लिखा कि इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है। सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।
वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या? इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।
साथ ही अखिलेश ने लिखा कि अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी।
न सिर्फ अखिलेश बल्कि इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मोदी को घेरा, राहुल गांधी ने इन्हें “नाकामी के सबूत” बताया. उन्होंने एक्स पर लिखा, “मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे, सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो. ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं.” राहुल गांधी ने आगे लिखा, “12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहां जाएं, कहां न जाएं. हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें. देश चलाना अब कमजोर कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम के बस की बात नहीं.”
कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने आठ-दस साल में कुछ नहीं किया। तेल पर निर्भरता कम नहीं की, न ही पर्याप्त स्टॉक बनाया। अब संकट आने पर आम आदमी को बचत का उपदेश दिया जा रहा है। अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने कहा कि सोने की अपील भ्रष्ट BJP नेताओं को करनी चाहिए, आम लोग तो सोना खरीद भी नहीं पाते।विपक्ष पूछ रहा है – पहले पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं किया? टैक्स क्यों इतना ज्यादा है? विदेश नीति में संतुलन क्यों नहीं रखा गया? लोग कह रहे हैं कि सरकार खुद तैयार नहीं है, इसलिए जनता को कष्ट सहने को कह रही है।
गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब मोदी ने ऐसी अपील की हो लेकिन सवाल यह बनता है कि यही अपील पहले भी हो सकती थी क्योंकि मिडिल ईस्ट तनाव लम्बे समय से चला आ रहा है। लेकिन तब मोदी और सत्ता का सुख भोग रहे अन्य नेता जनता को चुनावी चूरन देने में बिजी थे। लेकिन जैसे ही चुनावी नतीजे आये मोदी एंड कंपनी के बोल ही बदल गए। और अब देशभक्ति का झूठा नाटक करना शुरू कर दिया है।



