आने वाला है फिर से वैश्विक संकट? भरे मंच से Modi के बयान ने मचाया तहलका
चुनाव खत्म होते ही मोदी जी को अब देश की याद आ गई है...लेकिन, यहां पर पीएम मोदी की अपील पर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं...क्योंकि, चुनाव का शोर-शराबा जैसे ही थमा...वैसे ही देश की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू हो गई

4पीएम न्यूज नेटवर्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुले मंच से अपने बयान से साफ-साफ संकेत दे दिया है कि देश में एक बार फिर से वैश्विक ऊर्जा संकट आने वाला है और इससे निपटने के लिए हमें तैयार रहना होगा…क्योंकि मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर भारत पर भी पड़ रहा है……
यानी अगर आपके घर में इस साल शादी है या कोई इवेंट है…तो उसे कैंसिल कर दीजिए…अगर आप बाइक या कार से चलते हैं…तो वो छोड़कर साइकिल या बैलगाड़ी पर आ जाइए…क्योंकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपके लिए खास सलाह भेजी है कि घर में शादी हो..कोई भी इवेंट हो…लेकिन आप एक साल तक सोना न खरीदें…क्योंकि मोदी जी से देश संभल तो पा नहीं रहा है…इसलिए पिसना तो हर चीज में जनता को ही है…
चाहे बात 2019 में आई कोरोना महामारी की करें, नोटबंदी या फिर मिडिल ईस्ट में जारी जंग की…जिसकी वजह से देश में गैस, पेट्रोल और डीजल समेत तमाम तरह की परेशानियां देखनो को मिल रही हैं…लेकिन, सवाल ये है कि ये पेरशानियां चुनाव खत्म होने बाद ही क्यों गिनवाई जार रही हैं?…जब बंगाल, असम समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव में रैलियां करने पहुंच रहे थें…तब क्या उन रैलियों में चली गाड़ी पानी से चल रही थीं?…या फिर वो तर्क ये दिया जाएगा कि मोदी जी के काफिले में लगी गाड़ियां…इलेक्ट्रिक थीं?
चुनाव खत्म होते ही मोदी जी को अब देश की याद आ गई है…लेकिन, यहां पर पीएम मोदी की अपील पर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं…क्योंकि, चुनाव का शोर-शराबा जैसे ही थमा…वैसे ही देश की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू हो गई….इस बार चर्चा का कारण बने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…जिनकी एक अपील ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया…पीएम ने लोगों से कहा कि पेट्रोल-डीजल बचाइए…सोना मत खरीदिए…विदेश जाने से बचिए और जितना हो सके घर से काम कीजिए…पहली नजर में ये बातें देशहित में लगती हैं…लेकिन जिस समय और तरीके से ये बात कही गई…उस पर अब सवाल उठ रहे हैं…
सीधी भाषा में समझें तो पीएम का कहना है कि देश इस समय एक आर्थिक दबाव से गुजर रहा है…खासकर तेल की कीमतों और विदेशी मुद्रा यानी डॉलर के खर्च को लेकर चिंता है…क्योंकि भारत को तेल बाहर से खरीदना पड़ता है और अगर डॉलर महंगा होता है….तो देश को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है…इसलिए पीएम ने लोगों से अपील की कि वो अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करें ताकि देश का खर्च कम हो सके…लेकिन यहीं से कहानी में मोड़ आता है…लोग पूछ रहे हैं कि अगर हालात इतने गंभीर थे…तो ये बात चुनाव से पहले क्यों नहीं बताई गई?…पिछले 2-3 महीनों से दुनिया में तनाव और युद्ध जैसी स्थिति चल रही थी…जिसका असर तेल के दामों और सप्लाई पर पड़ रहा था…ऐसे में सरकार को पहले ही लोगों को तैयार करना चाहिए था…लेकिन ऐसा नहीं हुआ…
अब जब चुनाव खत्म हो गए…शपथ ग्रहण भी हो गया…तब अचानक ये अपील सामने आई…इससे लोगों को लग रहा है कि कहीं ये सब राजनीतिक टाइमिंग तो नहीं है….मतलब पहले चुनाव जीत लो…फिर मुश्किलों की बात करो…पीएम ने अपने भाषण में कहा कि लोग पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें, मेट्रो और ट्रेन का ज्यादा इस्तेमाल करें, कार पूलिंग करें और इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाएं…साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना काल की तरह फिर से वर्क फ्रॉम होम शुरू किया जा सकता है…इसके अलावा उन्होंने एक साल तक सोना न खरीदने की भी अपील की…क्योंकि सोना खरीदने में भी विदेशी मुद्रा खर्च होती है….
यहीं कर कि उन्होंने खाने के तेल को लेकर भी कहा कि हर परिवार 10% तक इसका इस्तेमाल कम करे…ताकि देश का आयात कम हो और विदेशी मुद्रा बचे…विदेश घूमने जाने वालों से भी कहा गया कि फिलहाल देश के अंदर ही घूम लें……अब ये सारी बातें सुनने में तो ठीक लगती हैं…लेकिन आम पब्लिक का सवाल ये है कि क्या सरकार खुद इन बातों पर अमल कर रही है?…….मतलब, पीएम मोदी ने खुद चुनाव के दौरान कई रैलियां कीं, रोड शो किए, हेलीकॉप्टर और गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ…..अगर पेट्रोल-डीजल बचाना इतना जरूरी था….तो क्या ये सब कम नहीं किया जा सकता था?…क्या रैलियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नहीं किया जा सकता था…जैसे कोरोना के समय किया गया था?….
और तो और, खबर है कि पीएम खुद भी जल्द ही विदेश दौरे पर जाने वाले हैं…ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि जब आम जनता से विदेश यात्रा टालने को कहा जा रहा है…तो मोदी जी खुद क्यों जा रहे हैं?…हालांकि ये बात सही है कि पीएम का दौरा देशहित में होता है…लेकिन आम लोगों को ये बात विरोधाभासी लग रही है….विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है…सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि…चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!…दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है ‘भाजपा’…
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस संकट को छुपाकर रखा और चुनाव के बाद ही सामने लाया…उनका कहना है कि अगर पहले बताया जाता…तो लोग ज्यादा तैयार रहते और सरकार की नीयत पर भी सवाल नहीं उठते…लोगों के मन में एक और डर है…क्या ये सब आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की तैयारी है?…क्योंकि जब सरकार पहले से ही लोगों को बचत करने को कह रही है….तो इसका मतलब ये भी हो सकता है कि आगे कीमतें बढ़ सकती हैं….कोरोना के समय भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था….उस समय भी बड़े-बड़े चुनावी रैलियां हुईं…भीड़ जुटी, और बाद में जब हालात बिगड़े तो अचानक पाबंदियां लगाई गईं…अब लोग उसी दौर को याद कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या फिर वही गलती दोहराई जा रही है?…
आम आदमी के नजरिए से देखें तो बात साफ है…अगर देश में कोई बड़ा संकट है…तो उसकी जानकारी समय पर मिलनी चाहिए…ताकि लोग खुद को तैयार कर सकें…लेकिन अगर जानकारी चुनाव के बाद दी जाए…तो लोगों को शक होना स्वाभाविक है…गांव-देहात और शहरों में लोग आपस में यही बातें कर रहे हैं कि जब हालात पहले से खराब थे…तो तब क्यों नहीं बताया?…और अब अचानक इतना सब क्यों कहा जा रहा है?…
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात भरोसे की है…अगर सरकार जनता से कुछ अपील करती है…तो जरूरी है कि वो खुद भी उसी पर अमल करे…तभी लोग उस बात को गंभीरता से लेंगे…आखिर में सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ एक अपील है या आने वाले समय में कोई बड़ा आर्थिक झटका आने वाला है?…क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे?…क्या महंगाई और बढ़ेगी?…और सबसे जरूरी, क्या सरकार सही समय पर सही जानकारी दे रही है?



