बाँदा: 48 डिग्री की तपिश में बेहाल पत्रकार, कलेक्ट्रेट में न छांव न पानी की व्यवस्था
बांदा में 48.8 डिग्री तापमान के बीच पत्रकार कलेक्ट्रेट परिसर में बिना छांव और पेयजल के काम करने को मजबूर हैं। हीट वेव के बीच पत्रकारों ने प्रशासन से शेड, पानी और बैठने की व्यवस्था की मांग की है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने भी सवाल उठाए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश का बाँदा इस समय भीषण गर्मी और हीट वेव की चपेट में है। आसमान से बरसती आग और 48 डिग्री के करीब पहुंच चुका तापमान आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रहा है। प्रशासन की ओर से शहर में जगह-जगह प्याऊ, शेड और पेयजल की व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन इसी बीच लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की परेशानियां अब चर्चा का विषय बन गई हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में दिनभर खबरों की तलाश में जुटे पत्रकार भीषण गर्मी में बिना किसी बुनियादी सुविधा के काम करने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि कई पत्रकार एक बरगद के पेड़ की छांव के सहारे रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
46 से 48.8 डिग्री तक पहुंचा तापमान
बाँदा में 17, 18 और 19 मई को तापमान लगातार बढ़ता गया। पहले 46 डिग्री, फिर 47 डिग्री और उसके बाद 48.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से हालात और गंभीर हो गए। तेज लू और झुलसाने वाली धूप के कारण दोपहर के समय सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है, लेकिन इसी गर्मी में पत्रकारों को खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े होकर रिपोर्टिंग करनी पड़ रही है।
कलेक्ट्रेट में नहीं शेड और पेयजल की व्यवस्था
पत्रकारों का कहना है कि कलेक्ट्रेट परिसर में उनके बैठने के लिए कोई स्थायी शेड नहीं है। न टेंट की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया गया है। पार्किंग की सुविधा भी सीमित होने के कारण कई पत्रकारों को धूप में वाहन खड़े करने पड़ते हैं। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार लगातार गर्मी में काम करने के दौरान कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने उठाए सवाल
इस मुद्दे पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने जिला प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन पूरे शहर में हीट वेव से राहत देने के लिए व्यवस्थाएं कर रहा है, तो पत्रकारों की अनदेखी क्यों की जा रही है। उनका कहना है कि पत्रकार लगातार जनता और प्रशासन के बीच सेतु का काम करते हैं। ऐसे में भीषण गर्मी के दौरान उनके लिए कम से कम छांव, पानी और बैठने की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
पत्रकारों ने जिलाधिकारी से की मांग
कलेक्ट्रेट में कार्यरत पत्रकारों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि परिसर में जल्द स्थायी शेड, शुद्ध पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था कराई जाए। उनका कहना है कि सुरक्षित माहौल मिलने पर वे बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
बड़ा सवाल: खबरें जुटाने वालों की चिंता कौन करेगा?
हीट वेव के इस दौर में प्रशासन आम लोगों को राहत देने के प्रयास कर रहा है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जो पत्रकार हर परिस्थिति में मैदान में रहकर जनता तक खबरें पहुंचाते हैं, उनकी सुरक्षा और सुविधाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा? बाँदा में बढ़ती गर्मी के बीच यह मुद्दा अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और कार्य सुरक्षा का विषय बनता जा रहा है।
रिपोर्ट – इक़बाल खान
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