नेत्रहीन आदिवासी वृद्ध की दर्दभरी कहानी, पट्टे की आस में वर्षों से भटक रहा पीड़ित

मिर्जापुर के मड़िहान तहसील में एक 65 वर्षीय नेत्रहीन आदिवासी वृद्ध ने आवासीय पट्टा दिलाने के नाम पर धनराशि लेने का आरोप लगाते हुए समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने मामले की जांच और न्याय की मांग की है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्जापुर जिले की मड़िहान तहसील में आयोजित समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की परेशानियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। भीषण गर्मी के बीच हाथ में लाठी लिए एक 65 वर्षीय नेत्रहीन आदिवासी वृद्ध न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर लगाता दिखाई दिया। उसकी पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

रामपुर रेक्सा गांव निवासी राजू कोल का आरोप है कि आवासीय पट्टा दिलाने के नाम पर उनसे धनराशि ली गई, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें जमीन का अधिकार नहीं मिल सका। अब उन्होंने समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

जन्म से नेत्रहीन हैं राजू कोल

राजू कोल ने बताया कि वह जन्म से ही दोनों आंखों से नेत्रहीन हैं। उनकी शारीरिक स्थिति ऐसी है कि बिना किसी सहारे के चलना-फिरना भी मुश्किल है। इसके बावजूद वह लंबे समय से आवासीय पट्टा प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि रहने के लिए स्थायी व्यवस्था की उम्मीद में उन्होंने कई वर्ष पहले आवासीय पट्टे के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

राजस्व निरीक्षक पर लगाए गंभीर आरोप

समाधान दिवस में दिए गए शिकायती पत्र में राजू कोल ने आरोप लगाया कि आवासीय पट्टा प्रक्रिया के दौरान उनसे धनराशि की मांग की गई थी। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद किसी तरह पैसे की व्यवस्था कर संबंधित व्यक्ति को राशि दी गई। हालांकि, आरोपित पक्ष की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

पट्टा तो दूर, मुलाकात भी मुश्किल होने का दावा

पीड़ित वृद्ध का कहना है कि धनराशि देने के बावजूद उन्हें अब तक आवासीय पट्टा नहीं मिला। उनका यह भी आरोप है कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी से मिलना भी कठिन हो गया है। इसी निराशा और परेशानी के बीच वह शनिवार को समाधान दिवस में पहुंचे और अधिकारियों को अपनी व्यथा सुनाई। राजू कोल ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा उन्हें जल्द से जल्द आवासीय पट्टा उपलब्ध कराने की मांग की है।

समाधान दिवस की व्यवस्था पर भी उठे सवाल

सरकार द्वारा समाधान दिवस का उद्देश्य आम लोगों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण और प्रशासन को जनता के करीब लाना बताया जाता है। लेकिन राजू कोल जैसे मामलों से यह सवाल भी उठता है कि यदि शिकायतकर्ता वर्षों तक न्याय के लिए भटकता रहे, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। विशेष रूप से तब, जब शिकायतकर्ता समाज के कमजोर और वंचित वर्ग से संबंध रखता हो तथा दिव्यांगता जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा हो।

जांच और कार्रवाई की उम्मीद

फिलहाल राजू कोल की शिकायत प्रशासन के संज्ञान में आ चुकी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पीड़ित वृद्ध को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके।

रिपोर्ट -संतोष देव गिरी

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