यूसुफ पठान की बढ़ी मुश्किलें, जमीन मामले में HC की फटकार, अब क्या होगा अगला कदम?

जमीन आवंटन और कब्जे के मामले में पूर्व क्रिकेटर और नेता यूसुफ पठान को हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी का सामना करना पड़ा है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान इन दिनों दो मोर्चों पर चर्चा में हैं.. एक तरफ पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों की कथित बगावत में उनका नाम लिया जा रहा है.. वहीं दूसरी तरफ गुजरात के वडोदरा में सरकारी जमीन कब्जा करने के मामले में.. गुजरात हाईकोर्ट ने उनसे सख्त सवाल पूछे हैं.. महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी जैसे नेताओं के बयानों के बीच यूसुफ पठान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं.. यह घटनाक्रम टीएमसी के अंदरूनी कलह.. और राजनीतिक हलचल को और बढ़ा रहा है..

यूसुफ पठान टीएमसी के बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं.. वे मूल रूप से गुजरात के वडोदरा के रहने वाले हैं.. क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर यूसुफ.. 2011 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे.. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को हराकर बहरामपुर से जीत हासिल की.. लेकिन अब उनकी राजनीतिक और कानूनी मुश्किलें सुर्खियों में हैं..

गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल.. और जस्टिस डी.एन. रे की बेंच ने यूसुफ पठान की अपील पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की.. कोर्ट ने पूछा कि जरूरी अलॉटमेंट प्रक्रिया पूरी किए बिना.. उन्होंने सरकारी जमीन का कब्जा कैसे ले लिया.. कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना भुगतान.. और बिना आधिकारिक आदेश के सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता.. यह मामला 978 वर्ग मीटर के एक प्लॉट से जुड़ा है.. जो वडोदरा नगर निगम की संपत्ति है.. यह प्लॉट यूसुफ पठान के परिवार के बंगले के बगल में स्थित है.. तांडलजिया इलाके में यह विवाद कई साल पुराना है.. अगस्त 2025 में सिंगल जज ने यूसुफ पठान को अतिक्रमणकारी घोषित किया था.. अब डिवीजन बेंच ने भी सख्त रुख अपनाया है..

2012 में यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम से परिवार की सुरक्षा के कारण इस प्लॉट को अलॉट करने की मांग की.. नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी और जनरल बॉडी ने प्रस्ताव पास किया.. और इसे राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा.. प्रस्ताव में 99 साल की लीज पर बिना पब्लिक नीलामी के प्लॉट देने की बात थी.. लेकिन जून 2014 में गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.. सरकार ने कहा कि बिना सार्वजनिक नीलामी के ऐसा नहीं किया जा सकता.. इसके बावजूद यूसुफ पठान ने प्लॉट पर कब्जा बनाए रखा.. दीवार खड़ी की और शेड आदि बनाया.. 2024 के लोकसभा चुनाव के ठीक बाद जून 2024 में VMC ने उन्हें नोटिस दिया कि अतिक्रमण हटाओ.. यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट का रुख किया.. उन्होंने दलील दी कि 1999 की एक सरकारी नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को प्लॉट अलॉट किए जा सकते हैं.. और उन्होंने सभी शर्तें पूरी की हैं..

लेकिन कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी.. सीनियर वकील शालिन मेहता ने यूसुफ की तरफ से बहस की.. लेकिन बेंच ने साफ कहा कि सिर्फ प्रस्ताव पास होना अलॉटमेंट नहीं है.. कोई आधिकारिक आदेश या भुगतान नहीं हुआ तो कब्जा गैरकानूनी है.. कोर्ट ने कहा कि सेलिब्रिटी होने का मतलब यह नहीं कि वे कानून से ऊपर हैं.. ऐसे में समाज को गलत संदेश जाता है.. इसी बीच पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों में टूट की खबरें तेज हो गई हैं.. 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ा झटका लगा था.. इसके बाद करीब 20 सांसदों के एनडीए को समर्थन देने की बात सामने आई.. महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अमित शाह के बुलावे पर दिल्ली जा रहे हैं..

टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने भी दावा किया कि उन्होंने यूसुफ पठान से बात की.. पठान ने बताया कि अमित शाह ने उन्हें फोन किया और दिल्ली बुलाया है.. बनर्जी ने आरोप लगाया कि अमित शाह पार्टी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.. महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर यूसुफ को चेतावनी देते हुए लिखा कि  आप भारत के लिए खेले हैं, बहरामपुर की जनता ने आपको भारी मतों से जिताया है.. हिम्मत दिखाइए, शर्म करिए.. यूसुफ पठान अभी तक इन आरोपों पर खुलकर कुछ नहीं बोले हैं.. लेकिन उनका नाम बागी गुट में शामिल बताया जा रहा है.. टीएमसी के अंदर यह कलह दिल्ली से कोलकाता तक चर्चा का विषय बन गया है..

 

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