किसानों की आवाज बनेगी AAP, बीजेपी सरकार से मांगेगी हिसाब
किसानों के मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी ने बड़ा ऐलान किया है... 27 जून को सुरेंद्रनगर में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः आम आदमी पार्टी ने किसानों के हक की लड़ाई को और तेज करने का फैसला किया है.. 27 जून को सुरेंद्रनगर जिले में एक बड़ी किसान महापंचायत का आयोजन होने जा रहा है.. इस महापंचायत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी.. जिसमें सबसे प्रमुख मुद्दा किसानों की सहमति के बिना उनके खेतों में बिजली की हाई टेंशन लाइनें बिछाने का है.. AAP का कहना है कि यह महापंचायत किसानों की आवाज बनेगी.. और बीजेपी सरकार से उनके हक का हिसाब मांगेगी..
जानकारी के मुताबिक यह महापंचायत सिर्फ एक सभा नहीं है.. बल्कि गुजरात के किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का एक बड़ा मंच है.. सुरेंद्रनगर जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में किसान पहले से ही पानी, बिजली, फसल की सही कीमत.. और मंडी व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.. अब बिना सहमति के खेतों में बिजली लाइनें बिछाने से उनकी फसलों को नुकसान हो रहा है.. और उनकी जमीन की उपजाऊ क्षमता घट रही है.. AAP ने इसे किसानों के अधिकारों पर हमला बताया है..
सुरेंद्रनगर और आसपास के इलाकों में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का काम तेजी से चल रहा है.. ये लाइनें मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स, जैसे सोलर और विंड पावर से जुड़ी हैं.. लेकिन किसानों का आरोप है कि इन लाइनों के खंभे.. और तार उनके खेतों के बीच से बिना पूछे बिछाए जा रहे हैं.. फसलें खड़ी रहते हुए काम होता है.. जिससे पैदावार कम हो जाती है..
जानकारी के अनुसार कानूनी रूप से बिजली कंपनियों को ओवरहेड लाइनें बिछाने के लिए जमीन मालिक की सहमति की जरूरत नहीं पड़ती.. लेकिन मुआवजे और नुकसान की भरपाई का प्रावधान है.. किसान कहते हैं कि मुआवजा नाम मात्र का मिलता है या देरी से मिलता है.. ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों का हवाला देकर काम किया जा रहा है.. जो आज के समय में किसानों के हितों की रक्षा नहीं करता..
इस मुद्दे पर AAP का रुख साफ है.. पार्टी के नेता कहते हैं कि विकास के नाम पर किसानों को कुर्बान नहीं किया जा सकता.. अगर बिजली लाइनें जरूरी हैं.. तो पहले किसानों से बातचीत कर उनकी सहमति लें.. उचित मुआवजा दें और वैकल्पिक रास्ते तलाशें.. महापंचायत में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होगी.. और सरकार से ठोस मांगें रखी जाएंगी..
आम आदमी पार्टी गुजरात में विपक्ष की भूमिका निभाते हुए किसानों के मुद्दों को लगातार उठा रही है.. अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं ने पहले भी सुरेंद्रनगर.. और अन्य जिलों में किसान सभाओं को संबोधित किया है.. और उन्होंने बीजेपी सरकार पर किसानों को दबाने, लाठीचार्ज करने.. और झूठे मुकदमों में फंसाने का आरोप लगाया है.. AAP का मानना है कि गुजरात की बीजेपी सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है.. MSP की गारंटी, कर्ज माफी, सिंचाई सुविधाएं.. और मंडी में सही दाम जैसी मांगें लंबे समय से लंबित हैं.. 27 जून की महापंचायत इन सभी मुद्दों को एक साथ उठाएगी.. पार्टी ने किसानों से अपील की है कि बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी बात रखें..
आपको बता दें कि पार्टी के गुजरात प्रभारी और अन्य नेता पहले से ही गांव-गांव जाकर किसानों से मुलाकात कर रहे हैं.. वे उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और महापंचायत की तैयारी कर रहे हैं.. AAP का दावा है कि यह महापंचायत न सिर्फ सुरेंद्रनगर बल्कि पूरे गुजरात के किसानों की एकजुटता का प्रतीक बनेगी.. सुरेंद्रनगर जिला गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है.. यहां की मिट्टी उपजाऊ है और किसान मुख्य रूप से कपास, गेहूं, जीरा, मूंगफली और सब्जियां उगाते हैं.. लेकिन पानी की कमी, बिजली संकट.. और बाजार की अनिश्चितता किसानों को परेशान करती रहती है..
जानकारी के अनुसार जिले में नर्मदा नहर से पानी आने की उम्मीद थी.. लेकिन कई इलाकों में अभी भी कमी है.. बिजली लाइनों का मुद्दा इस समस्या को और बढ़ा रहा है.. खेतों में खंभे गड़ने से न सिर्फ फसल नष्ट होती है.. बल्कि भूमि की उर्वरता भी प्रभावित होती है.. लंबे समय तक हाई वोल्टेज लाइनों के नीचे खेती करने से मिट्टी.. और फसल दोनों पर असर पड़ता है.. 27 जून को होने वाली यह किसान महापंचायत सुरेंद्रनगर के किसी बड़े मैदान या गांव में आयोजित होगी.. AAP ने स्थानीय स्तर पर कमेटियां बनाई हैं.. जो व्यवस्थाओं को संभाल रही हैं.. किसानों, युवाओं, महिलाओं और गांव के बुजुर्गों को आमंत्रित किया जा रहा है..
AAP नेताओं का कहना है कि बीजेपी सरकार से हिसाब मांगा जाएगा.. अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आगे आंदोलन तेज किया जाएगा.. पार्टी ने इसे किसानों का आंदोलन बताया है, न कि किसी एक पार्टी का.. भारत में किसान आंदोलन नई बात नहीं हैं.. दिल्ली के बॉर्डर पर 2020-21 का आंदोलन याद है.. जहां MSP और अन्य मुद्दों पर किसानों ने लंबा संघर्ष किया.. गुजरात में भी समय-समय पर किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरते रहे हैं..
AAP का आरोप है कि बीजेपी सरकार किसानों को दबा रही है.. लाठीचार्ज, गिरफ्तारियां और दबाव की शिकायतें आम हैं.. वहीं सरकार का पक्ष है कि विकास परियोजनाएं पूरे राज्य के हित में हैं.. और किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है.. लेकिन किसान कहते हैं कि हकीकत अलग है.. सुरेंद्रनगर जैसे जिलों में छोटे और मध्यम किसान ज्यादा हैं.. वे बड़े प्रोजेक्ट्स के सामने लाचार महसूस करते हैं.. महापंचायत इन्हीं छोटे किसानों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास है..



