चैतर वसावा को 7 साल की सजा, आदिवासी राजनीति में मचा सियासी घमासान
AAP नेता चैतर वसावा को सजा के बाद गुजरात की राजनीति गरमा गई है... आम आदमी पार्टी ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के नर्मदा जिले में आम आदमी पार्टी के लोकप्रिय आदिवासी विधायक चैतर वसावा को 23 जून 2026 को राजपीपला सेशंस कोर्ट ने एक पुराने मामले में 7 साल की जेल की सजा सुना दी है.. इस फैसले के साथ उनकी पत्नी समेत कुल 9 लोगों को दोषी ठहराया गया है.. यह मामला नवंबर 2023 का है.. जिसमें वन विभाग के अधिकारियों पर हमला.. गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया गया था.. आम आदमी पार्टी ने इस फैसले को राजनीतिक साजिश बताया है.. और सुप्रीम कोर्ट तक जाने का ऐलान किया है.. चैतर वसावा को आदिवासी समाज की मजबूत आवाज माना जाता है..
आपको बता दें कि चैतर वसावा गुजरात के डेडियापाड़ा (ST) विधानसभा क्षेत्र से AAP के विधायक हैं.. वे दिसंबर 2022 में पहली बार विधायक चुने गए थे.. डेडियापाड़ा आदिवासी बहुल इलाका है.. जहां नर्मदा नदी और जंगलों का क्षेत्र आता है.. चैतर ने BJP के हितेशकुमार वसावा को हराकर भारी मतों से जीत हासिल की थी.. और उन्होंने करीब 1 लाख से ज्यादा वोट पाए थे..
चैतर युवा और आक्रामक नेता के रूप में जाने जाते हैं.. वे आदिवासी अधिकारों, जंगल की जमीन, किसानों की समस्याओं.. और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं.. 2023 में वे गुजरात AAP के विधायक दल के नेता भी बने.. उन्होंने आदिवासियों के लिए अलग भील प्रदेश की मांग भी की थी.. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगता है कि.. हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में AAP ने नर्मदा जिले में BJP को बड़े झटके दिए.. जिसमें डेडियापाड़ा तालुका पंचायत में AAP की बड़ी जीत शामिल है.. आदिवासी समाज में चैतर को युवा लड़ाका माना जाता है.. वे जंगलों में रहने वाले किसानों की जमीन के अधिकार, नर्मदा बांध प्रभावितों की समस्याओं.. और सरकारी दबाव के खिलाफ लड़ते दिखते हैं.. उनकी शैली सीधी और सड़क पर उतरकर लड़ने वाली है.. जिसके कारण वे विवादों में भी रहते हैं..
जानकारी के मुताबिक यह मामला 30 अक्टूबर 2023 का है.. पुलिस के अनुसार, डेडियापाड़ा में वन विभाग के अधिकारियों ने कुछ गांवों में जंगल की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे.. एक गांव के किसान रमेशभाई वसावा सहित अन्य प्रभावित थे.. चैतर वसावा ने इन अधिकारियों को अपने घर बुलाया.. FIR के मुताबिक, घर पर बातचीत के दौरान चैतर, उनकी पत्नी शकुंतला.. और अन्य लोगों ने अधिकारियों को गालियां दीं.. मारपीट की और मुआवजा देने की मांग की.. आरोप है कि चैतर ने हवा में गोली भी चलाई.. जिसके लिए उनके पास लाइसेंस नहीं था.. FIR दो नवंबर 2023 को डेडियापाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई.. इसमें दंगा, ब्लैकमेल, सरकारी कर्मचारी को धमकाने.. और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गईं..
जिसको लेकर AAP का कहना है कि यह झूठा केस है.. चैतर आदिवासी किसानों की मदद कर रहे थे.. जिनकी जमीन पर वन विभाग दबाव बना रहा था.. वे कहते हैं कि भाजपा सरकार आदिवासियों की आवाज को दबाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रही है.. चैतर ने खुद को सरेंडर किया था और जेल गए.. उनकी पत्नी और सहयोगी भी गिरफ्तार हुए.. राजपीपला सेशंस कोर्ट ने 23 जून 2026 को फैसला सुनाया.. चैतर वसावा को 7 साल की सजा मिली है.. उनकी पत्नी समेत 8 अन्य को भी सजा हुई.. कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया.. इस सजा के बाद चैतर का विधायक पद खतरे में पड़ सकता है.. क्योंकि विधायकों पर दोषसिद्धि होने पर अयोग्यता का प्रावधान है..
AAP ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.. पार्टी का कहना है कि यह मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित फैसला है.. वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और अपील करेंगे.. पार्टी ने इसे भाजपा का दमनकारी कदम बताया.. चैतर को आदिवासी समाज का प्रतिनिधि बताते हुए कहा गया कि उनकी लोकप्रियता से भाजपा डरी हुई है.. खासकर जब AAP ने नर्मदा जिले में पकड़ मजबूत की है.. गुजरात में भाजपा की सरकार है.. 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 5 सीटें जीतीं.. जिनमें चैतर की सीट भी शामिल है.. चैतर की जीत ने आदिवासी इलाकों में AAP की उम्मीद जगाई.. बाद में लोकसभा चुनाव में भी AAP ने चैतर को भरूच से उम्मीदवार बनाया, जबकि वे जेल में थे..
आपको बता दें कि AAP आरोप लगाती है कि भाजपा आदिवासी इलाकों में AAP की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान है.. नर्मदा जिले में जंगल की जमीन, किसानों के अधिकार.. और विकास के मुद्दों पर चैतर सक्रिय रहे.. पार्टी कहती है कि ऐसे नेता को डराने के लिए झूठे केस लगाए जा रहे हैं.. अरविंद केजरीवाल ने पहले भी कहा था कि चैतर पर हमला पूरे आदिवासी समाज पर हमला है.. दूसरी तरफ, भाजपा और पुलिस का स्टैंड है कि कानून सबके लिए बराबर है.. अगर कोई अपराध करता है तो सजा मिलेगी.. चाहे वह विधायक हो.. कोर्ट ने सबूतों के आधार पर फैसला दिया है..



