नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी के 2 साल, बोले- ‘संघर्ष जारी रहेगा’

राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो साल पूरे किए हैं. उन्होंने "सफर लंबा है, पर संकल्प वही" कहते हुए हर भारतीय की आवाज उठाने का संकल्प दोहराया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राहुल गांधी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो साल पूरे किए हैं. उन्होंने “सफर लंबा है, पर संकल्प वही” कहते हुए हर भारतीय की आवाज उठाने का संकल्प दोहराया. नीट, वोट चोरी और संविधान की रक्षा जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार संघर्ष किया.

कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपना दो साल पूरा किया. इस अवसर पर राहुल गांधी ने सोशल साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सफर लंबा है, पर संकल्प वही, आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूंगा. राहुल गांधी ने 26 जून, 2024 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद ग्रहण किया था. 18वीं लोकसभा में रायबरेली के सांसद राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर काम कर रहे हैं, हालांकि लोकसभा में 2014 से 2024 तक करीब 10 सालों तक कोई लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं था.

क्योंकि कोई भी विपक्षी पार्टी कुल लोकसभा सीटों का कम से कम 10% जरूरी आंकड़ा पूरा नहीं कर पाई थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस इस लिमिट को पार कर गई है, तो राहुल गांधी की नियुक्ति लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में हुई थी. 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की सीटें 100 तक पहुंच गई थी, जो 2019 में उसकी 52 सीटों से काफी बेहतर थी.

आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूंगा… बोले राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में दो साल पूरे होने पर राहुल गांधी ने सोशल साइट एक्स पर लिखा, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए. इन दो सालों का हर दिन एक ही काम रहा – हर भारतीय की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना.

उन्होंने लिखा, NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा. सड़क से संसद तक, आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है. सफर लंबा है, पर संकल्प वही, आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूंगा. जय हिंद, जय संविधान.

26 जून, 2024 को नेता प्रतिपक्ष बने थे राहुल गांधी
बता दें कि राहुल गांधी ने 2024 को लोकसभा चुनाव रायबरेली और वायनाड दोनों सीटों से जीत हासिल की थी, लेकिन उन्होंने रायबरेली को बनाए रखने का फैसला किया है और वायनाड सीट खाली कर दी. बाद में उनकी बहन, प्रियंका गांधी वायनाड उपचुनाव लड़ी थीं और वहां से जीत हासिल की.

दोनों सदनों में विपक्ष के नेता को संसद में विपक्ष के नेता की सैलरी और अलाउंस एक्ट, 1977 के तहत कानूनी मान्यता दी गई थी और वे कैबिनेट मंत्री के बराबर सैलरी, अलाउंस और दूसरी सुविधाओं के हकदार हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी सदन की कार्यवाही के दौरान सुर्खियों में रहते रहे हैं और सत्तापक्ष पर लगातार हमला बोला है.

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