तलाक के दौरान कब नहीं देना पड़ता गुजारा भत्ता? समझिए कानूनी नियम

तलाक के मामलों में गुजारा भत्ता सबसे बड़ा कानूनी मुद्दा होता है. लेकिन क्या हर पत्नी को मेंटेनेंस मिलना जरूरी है?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: तलाक के मामलों में गुजारा भत्ता सबसे बड़ा कानूनी मुद्दा होता है. लेकिन क्या हर पत्नी को मेंटेनेंस मिलना जरूरी है? कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया है कि अगर पत्नी आर्थिक रूप से सक्षम है और उसकी आय पति से ज्यादा है, तो हर मामले में उसे गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा.

शादी टूटने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी मुद्दे की होती है, तो वह है गुजारा भत्ता (Maintenance). आम धारणा यह है कि तलाक या अलग रहने की स्थिति में पति को हर हाल में पत्नी को भरण-पोषण देना ही पड़ता है. लेकिन कानून ऐसा नहीं कहता. भारतीय अदालतें हर मामले में पति-पत्नी की आर्थिक स्थिति, आय, जरूरत और परिस्थितियों को देखकर फैसला सुनाती हैं. यानी सिर्फ पत्नी होना ही गुजारा भत्ता पाने की गारंटी नहीं है. अगर पत्नी खुद आर्थिक रूप से सक्षम है या उसकी आमदनी पति से ज्यादा है, तो अदालत भरण-पोषण देने से इनकार भी कर सकती है.

हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऐसा ही एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि अगर पत्नी की आय पति से ज्यादा है और वह अपने खर्च खुद उठाने में सक्षम है, तो उसे केवल इसलिए गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता क्योंकि वह पत्नी है. कोर्ट ने साफ किया कि भरण-पोषण का उद्देश्य किसी को अतिरिक्त आर्थिक लाभ देना नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की मदद करना है जो खुद अपना गुजारा करने में सक्षम नहीं है. इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किन परिस्थितियों में पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं मिलता.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर पत्नी की आय पति से ज्यादा है और वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, तो उसे अंतरिम गुजारा भत्ता देने का कोई औचित्य नहीं बनता. अदालत ने कहा कि कानून का मकसद जरूरतमंद जीवनसाथी की मदद करना है, न कि आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति को अतिरिक्त फायदा पहुंचाना.

किन परिस्थितियों में पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं मिल सकता?
पत्नी की आय पति से ज्यादा हो और वह अपना खर्च खुद उठा सकती हो.
पत्नी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो और उसकी नियमित आय हो.
पत्नी के पास पर्याप्त संपत्ति, निवेश या अन्य आय के स्रोत हों.

अगर अदालत को लगे कि पत्नी बिना उचित कारण के पति से अलग रह रही है (हर मामले में तथ्यों के आधार पर फैसला होता है). अगर पत्नी ने दोबारा शादी कर ली हो, तो सामान्य तौर पर गुजारा भत्ता समाप्त हो सकता है.
आदेश में क्या कहा गया है?

न्यायमूर्ति डॉ चिल्लकुर सुमालथा की अध्यक्षता वाली एगल न्यायाधीश पीठ ने आदेश में कहा, अगर पत्नी खुद कमाती है, उसकी आय पति से ज्यादा है और वह अपने खर्च आसानी से उठा सकती है, साथ ही उस पर बच्चों की देखभाल जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारी भी नहीं है, तो सिर्फ इसलिए उसे गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता कि वह महिला है या पत्नी है. अदालत तभी भरण-पोषण देने का आदेश देती है, जब यह साबित हो जाए कि पत्नी के पास अपना गुजारा करने के लिए पर्याप्त आर्थिक साधन नहीं हैं और वह पति के समान जीवन स्तर बनाए रखने में सक्षम नहीं है.

कमाने वाली पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. केवल नौकरी करना या आय होना ही गुजारा भत्ता खारिज होने का आधार नहीं बनता. अदालत यह भी देखती है कि पत्नी की आय उसकी जरूरतों के लिए पर्याप्त है या नहीं. कई मामलों में पत्नी नौकरी करती है, लेकिन उसकी आय बहुत कम होती है, जबकि पति की कमाई काफी ज्यादा होती है. ऐसी स्थिति में अदालत पति को गुजारा भत्ता देने का आदेश दे सकती है, ताकि दोनों के जीवन स्तर में बहुत बड़ा अंतर न रहे.

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