तेहरान में मातम, दुनिया ने रोकी सांसें
माहौल गमगीन, अटैक के खतरे के बीच आयतुल्ला खामेनेई का विदाई समारोह शुरू , 9 जुलाई तक चलने वाले इस समारोह में 1०० से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल

समारोह में 2 करोड़ लोगों के पहुंचने की उम्मीद, 28 फरवरी 26 को अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई
परिवार के कई सदस्यों के साथ हुए थे शहीद
भारतीय प्रतिनिधि मंडल ने पेश की खिराजे अकीदत
भारत से महबूबा मुफ्ती, सलमान खुर्शीद, कल्बे जव्वाद समेत अनेकों धार्मिक गुरू पहुंचे हैं ईरान
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आज ईरान में गोलियों की गूंज नहीं बल्कि ईरान आसुओं के समंदर से लबरेज है। ईरान के सार्वोच्च धर्मगुरू अयातुल्ला अली खामेनेई जिनकी शहादत जंग के शुरूआती दिनों में हो गयी थी उनकी विदाई के का महासमर शुरू हो चुका है। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलने वाले इस समारोह में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। समारोह में 2 करोड़ लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
तेहरान के ग्रैड मोसाला में 3 जुलाई को दिवंगत अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के ताबूत आखिरी दर्शन के लिए रखे गए। खामेनेई के पार्थिव शरीर को ईरानी झंडे में लपेटा गया है। ताबूत पर या हुसैन लिखा हुआ लाल झंडा रखा गया है। शोक अवधि में उनके पार्थिव शरीर को ईरान के साथ ही इराक के भी कई शहरों में ले जाया जाएगा। अली खामनेई के इस विदाई महासमर को देखकर हर कोई एक सवाल पूछ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक नेता की अंतिम यात्रा है या फिर मध्य पूर्व की राजनीति का वह मोड़ जहां से दुनिया का नया इतिहास लिखा जाएगा? करोड़ों आंखें नम हैं लेकिन खुफिया एजेंसियों की निगाहें भी उतनी ही चौकन्नी क्योंकि मातम के इस समंदर के नीचे भू-राजनीति का सबसे बड़ा तूफान पल रहा है।

तेहरान की सडक़ों पर सन्नाटा भी शोर भी
तेहरान की सुबह आज सूरज की रोशनी से नहीं करोड़ों नम आंखों की चमक से जागी है। सडक़ों पर सन्नाटा भी है और शोर भी। कहीं दुआओं की धीमी आवाज़ें हैं कहीं सीने पर पड़ते मातमी हाथों की गूंज तो कहीं ऐसी खामोशी जो किसी भी भाषण से ज्यादा असरदार है। हवा में गुलाबजल की महक घुली है लेकिन उसी हवा में बारूद की आशंका भी तैर रही है। शहर के हर मोड़ पर काले परचम लहरा रहे हैं और हर चेहरे पर एक ही एहसास लिखा दिखाई देता है आज ईरान सिर्फ अपने एक रहबर को विदा नहीं कर रहा बल्कि अपने इतिहास का एक पूरा दौर अपने कंधों पर उठाए चल रहा है। ग्रैंड मोसल्ला के विशाल प्रांगण में रखे ताबूत तक पहुंचने की हर कोशिश आंसुओं की एक नई कहानी बन जाती है। कोई खामोश खड़ा है कोई दुआ में हाथ उठाए हुए है कोई ताबूत को देखकर अपने आंसू रोक नहीं पा रहा। ऐसा लगता है जैसे वक्त ने अपनी चाल धीमी कर दी हो और पूरी दुनिया कुछ क्षणों के लिए तेहरान की धडक़नों के साथ सांस लेने लगी हो। यह दृश्य सिर्फ एक अंतिम विदाई का नहीं बल्कि उस भावनात्मक भूचाल का है जिसकी गूंज सीमाओं से कहीं आगे तक सुनाई दे रही है।लेकिन इस मातम के समंदर के ऊपर जितनी भावनाएं तैर रही हैं, उसके नीचे उतनी ही बेचैन परछाइयां भी घूम रही हैं। दुनिया की बड़ी खुफिया एजेंसियों की निगाहें इस जनसैलाब पर टिकी हैं। सुरक्षा के अभूतपूर्व घेरे आसमान में लगातार निगरानी हर आने जाने वाले काफिले पर पैनी नजर। यह सब इस बात की गवाही देता है कि शोक के इस महासागर में भी खतरे की लहरें पूरी तरह थमी नहीं हैं। एक चिंगारी करोड़ों भावनाओं के बीच कैसी आग लगा सकती है इसका अंदाजा हर सुरक्षा एजेंसी को है। इसलिए यह सिर्फ विदाई समारोह नहीं बल्कि दुनिया के सबसे संवेदनशील सुरक्षा अभियानों में बदल चुका है।
अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद
इसी भीड़ के बीच दुनिया के अलग अलग देशों से आए प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। हर हाथ में फूल हैं लेकिन हर राजधानी के मन में अपने अपने राजनीतिक समीकरण भी। भारत का प्रतिनिधिमंडल भी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। यह केवल संवेदना का क्षण नहीं बल्कि कूटनीति का वह मौन संवाद भी है जहां शब्दों से ज्यादा महत्व उपस्थिति का होता है। तेहरान में हर मुलाकात हर हाथ मिलाना और हर मौन प्रार्थना आने वाले समय के नए समीकरणों का संकेत बन सकती है। क्योंकि इतिहास गवाह है कि कुछ अंतिम यात्राएं केवल किसी व्यक्ति की विदाई नहीं होतीं वह आने वाले युग की प्रस्तावना भी लिख जाती हैं। तेहरान की यह भीगी हुई शाम भी शायद उसी प्रस्तावना का पहला पन्ना है।
तेहरान में भारत ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई को दी श्रद्धांजलि
भारत के विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त सैयद अता हसनैन ने ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत की ओर से श्रद्धांजलि दी। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और मैंने तेहरान में अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हमने भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से श्रद्धांजलि दी।भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरान भारत का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व दोनों देशों के बीच मजबूत सभ्यतागत संबंधों को दिखाता है। इससे लोगों के बीच संबंध और राजनीतिक व आर्थिक सहयोग को और मजबूती मिलती है। पांच मार्च को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरान के दूतावास जाकर संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे और अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर भारत सरकार की ओर से शोक व्यक्त किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास जाकर भारत सरकार और जनता की ओर से संवेदना व्यक्त की।
बिहार में बैकफुट पर आई भाजपा सरकार
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा हो गई बहाल
अब जेड श्रेणी के सुरक्षा घेरे में रहेंगे दोनों पूर्व सीएम
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार में सियासी घमासान मचने के बाद आखिकार बिहार की बीजेपी सरकार बैकफुट पर आई है। सम्राट सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा बहाल करते हुए उन्हें फिर से जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है, जिसमें बुलेटप्रूफ गाड़ी भी शामिल है।
यह फैसला उनकी सुरक्षा में पहले की गई कटौती के बाद हुए तीखे राजनीतिक विवाद के मद्देनजर आया है, जहां राजद ने इसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। इस कदम से सुरक्षा को लेकर चल रहे राजनीतिक आरोपों पर कुछ हद तक विराम लग सकता है। राज्य सरकार द्वारा समीक्षा के बाद इस जोड़े की जेड + सुरक्षा काफी कम कर दी गई थी। इस फैसले से ज़बरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। सांकेतिक विरोध दर्ज कराने के लिए, उन्होंने उन सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस कर दिया था जो उनकी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे।राजद ने आरोप लगाया था कि सुरक्षा में कटौती का मकसद विपक्षी नेताओं को निशाना बनाना था। पार्टी का दावा था कि बिहार में बीजेपी सरकार, विपक्षी नेताओं की सुरक्षा कम करके उनके कद को घटाना चाहती थी। बाद में बिहार सरकार ने कहा कि ये बदलाव खतरे के आकलन के आधार पर की गई नियमित समीक्षा का हिस्सा थे। इस कदम के विरोध में लालू यादव के छोटे बेटे, पूर्व डिप्टी सीएमऔर बिहार विधानसभा में विपक्ष के मौजूदा नेता तेजस्वी यादव ने भी सरकार से मिली सुरक्षा लौटा दी थी।
हालांकि, अधिकारियों ने साफ़ किया कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया था। लालू यादव और राबड़ी देवी को जेड कैटेगरी की सुरक्षा देने का बिहार सरकार का फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब यह जोड़ा एक निजी घर में रहने जा रहा है। गुरुवार को राबड़ी देवी पटना में 1०, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को छोडक़र अपने घर चली गईं। यह बंगला लगभग दो दशकों तक उनका आवास और क्रछ्वष्ठ का कैंप ऑफिस रहा था।
यूपी में आंधी-बारिश का अलर्ट
दिल्ली में बारिश से मौसम सुहाना
मुंबई व गुजरात में भारी बारिश से तबाही
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में 2 जुलाई से मानसून की एंट्री के बाद भी गर्मी और उमस झेल रहे दिल्लीवालों को शनिवार दिन में हुई बारिश ने कुछ राहत दी है। बारिश पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में हुई है, जिससे आसपास के क्षेत्रों का मौसम सुहाना हो गया है। वहीं आईएमडी ने अलर्ट जारी कर बताया है कि अगले दो घंटे में दिल्ली समेत हरियाणा और पश्चिमी यूपी के कई शहरों में तेज हवा चलने के साथ ही गरज-चमक के साथ हल्की या मध्यम बारिश हो सकती है।
उधर मुंबई और गुजरात में जोरदार बारिश से जीवन अस्तव्यस्त हो गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट में बताया गया है कि दिल्ली और एनसीआर के लोनी देहात, हिंडन एयरफोर्स स्टेशन, बहादुरगढ़, गाजियाबाद, इंदिरापुरम, छपरौला, नोएडा आदि में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ गरज-चमक और 3०-4० किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही अगले कुछ घंटों के अंदर दिल्ली के कई हिस्सों सहित हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, गंगोह, देवबंद, नजीबाबाद, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, खतौली में हल्की बारिश, तेज हवाएं चलने की काफी संभावना है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का सातवां दिन
सेहत बिगडऩे से 5 किलो वजन कम हो गया है : सीजेपी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार को जंतर-मंतर पर अपनी भूख हड़ताल जारी रखी, जो उनके विरोध का सातवां दिन था। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का दावा है कि उनकी सेहत तेजी से बिगड़ रही है और उपवास शुरू करने के बाद से उनका वजन पांच किलोग्राम कम हो गया है।
सीजेपी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं-जिनमें प्रमुख राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं-को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की अपनी मांग दोहराई है। फाउंडर अभिजीत दिपके ने एक्स पर कहा कि वांगचुक की हालत हर दिन बिगड़ती जा रही है और सवाल उठाया कि मंत्री को उनके पद से क्यों नहीं हटाया गया। दिपके ने कहा कि सोनम सर का वजन 5 किलो कम हो गया है और उनकी सेहत हर दिन बिगड़ती जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए प्रधानमंत्री और कितना इंतजार करेंगे? उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी के लिए धर्मेंद्र प्रधान इतने अहम क्यों हैं कि 20 छात्रों की मौत के बावजूद वे उन्हें हटाने से इनकार कर रहे हैं? एक और पोस्ट में दिपके ने चेतावनी दी कि अगर विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक को कुछ भी हुआ, तो सरकार इसके लिए जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा क अगर सरकार ने तेजी से काम नहीं किया और प्रधान के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो सोनम सर को कुछ भी होने पर वही जिम्मेदार होगी। तेजी से बिगड़ती सेहत के बावजूद, उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, वे अपनी भूख हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।



