राम रक्षा स्तोत्र के साथ उद्धव का वार, नागपुर में भाजपा और संघ पर कसा तंज
उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संघ प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र का सियासी पारा हाई चल रहा है। दरअसल उद्धव ठाकरे ने नागपुर के राममंदिर में राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया है जिसे लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है।
दरअसल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ़ नागपुर के राम नगर स्थित ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर पहुंचकर उद्धव ठाकरे ने राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद मंदिर परिसर के बाहर जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संघ प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला। ठाकरे ने अपने संबोधन में भाजपा के हिंदुत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित घोटालों और चंदे की हेराफेरी के आरोपों का जिक्र करते हुए भाजपा को आड़े हाथों लिया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने राज्य में ‘रामरक्षा’ मुहिम इसलिए शुरू की है ताकि हिंदुओं को अंधभक्ति से जगाया जा सके।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज प्रभु श्री राम के नाम पर राजनीति करने वाले खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार समझते हैं, लेकिन असल में वे केवल सत्ता के भूखे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस कार्यक्रम के लिए संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी विशेष निमंत्रण भेजा था। हालांकि, उनके शामिल न होने पर ठाकरे ने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा।
ठाकरे ने कहा कि जब राम मंदिर के चंदे में कथित लूट हो रही थी, तब संघ ने केवल ‘खेद’ जताया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस को चुनौती देते हुए कहा कि नागपुर हिंदुत्व की राजधानी माना जाता है, लेकिन यहां की सत्ता पर बैठे लोग केवल विपक्ष को तोड़ने की साजिशों में व्यस्त हैं। उद्धव ठाकरे ने नागपुर में अपने राम रक्षा आंदोलन के लिए जिस राम मंदिर का चुनाव किया, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उसके आजीवन ट्रस्टी हैं।
इस ‘रामरक्षा आंदोलन’ के दौरान उद्धव ठाकरे के साथ उनके पुत्र व विधायक आदित्य ठाकरे, सांसद संजय राउत, सांसद अनिल देसाई, विनायक राउत, विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे और युवा सेना के वरुण सरदेसाई सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में शिवसैनिक मौजूद रहे।उद्धव ठाकरे के इस दौरे पर भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। भाजपा नेताओं ने उद्धव ठाकरे के पुराने कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ करने के आरोप में जनप्रतिनिधियों पर राजद्रोह लगाकर 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया था।
भाजपा ने तंज कसा कि जब पार्टी बर्बाद हो चुकी है, सारे विधायक और सांसद छोड़कर चले गए हैं, तब जाकर उद्धव ठाकरे को अपनी राजनीतिक रक्षा के लिए प्रभु राम और रामरक्षा स्तोत्र की याद आई है। बता दें कि उद्धव ठाकरे के शासनकाल में ही अमरावती की सांसद नवनीत राणा को उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के कारण जेल भेज दिया गया था।
वहीं बात की जाए उद्धव ठाकरे के ‘राम रक्षा’ आंदोलन की तो आपको बता दें कि यह एक नया राजनीतिक और धार्मिक अभियान है, जो जुलाई में शुरू हुआ। यह अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विरोध में चलाया जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस आंदोलन को महाराष्ट्र भर में फैलाने की योजना बनाई है। यह आंदोलन 5 जुलाई 2026 को मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर से शुरू हुआ। उद्धव ठाकरे खुद वहां पहुंचे।
उन्होंने भारी बारिश में भी भगवा कुर्ता पहनकर, रुद्राक्ष की माला पहनकर राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा और हनुमान स्तोत्र का पाठ किया। उनके साथ बेटे आदित्य ठाकरे, संजय राउत और अन्य नेता मौजूद थे। शिवसैनिकों ने महाआरती की और नारे लगाए। उद्धव ने कहा कि हिंदू भोले हैं लेकिन मूर्ख नहीं। मंदिर की लूट करने वालों को अब हिंदू माफ नहीं करेंगे। उन्होंने “अब हिंदू माफ नहीं करेगा” का नारा दिया, जो अटल बिहारी वाजपेयी के पुराने नारे से प्रेरित था।
आंदोलन का मुख्य कारण अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में दान पेटी से कथित चोरी का मामला है। जून 2026 में यह खबर सामने आई। कुछ लोगों पर चोरी और गड़बड़ी का आरोप लगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT जांच टीम बनाई और कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं। उद्धव ठाकरे का आरोप है कि हिंदुओं की श्रद्धा का फायदा उठाकर कुछ लोग मंदिर को लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम सबके हैं, किसी एक पार्टी के नहीं। उन्होंने “बीजेपी मुक्त राम” का नारा दिया।
यह आंदोलन सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे की नई रणनीति भी है। हाल ही में उनके कई सांसद और नेता शिंदे गुट में चले गए थे। पार्टी में टूट का सामना कर रहे उद्धव अब अपने पिता बाल ठाकरे के हिंदुत्व वाले एजेंडे पर लौट रहे हैं। वे “गर्व से कहो हम हिंदू हैं” जैसे नारे दोहरा रहे हैं। आंदोलन के जरिए वे बीजेपी पर हमला कर रहे हैं कि राम मंदिर आंदोलन में जो बलिदान दिए गए, उनका अपमान हो रहा है। वे पूछ रहे हैं कि अगर अयोध्या लुट रही है तो काशी-मथुरा का क्या होगा।
आंदोलन महाराष्ट्र के हर जिले में फैल रहा है। राम और हनुमान मंदिरों में महाआरती, स्तोत्र पाठ और बैठकें हो रही हैं। ऐसे में बीते 18 जुलाई को नागपुर जो की आरएसएस और फडणवीस का गढ़ है वहां बड़ा कार्यक्रम रखा गया, जहां उद्धव खुद पहुंचे। इससे साफ है कि वे हिंदुत्व की छवि वापस पाना चाहते हैं और बीजेपी के हिंदू वोट बैंक पर दबाव बनाना चाहते हैं।
राजनीतिक असर देखें तो यह आंदोलन उद्धव को नई ताकत दे रहा है। वे कहते हैं कि राम मंदिर का पैसा पार्टियां तोड़ने में लगाया जा रहा है। विरोधी उन्हें जवाब देते हैं कि पहले उन्होंने हिंदुत्व छोड़ा था, अब राम का नाम ले रहे हैं। लेकिन उद्धव का जोर है कि सच्चे हिंदुत्व की रक्षा करनी है।कुल मिलाकर, ‘राम रक्षा’ आंदोलन धार्मिक भावना को जोड़कर राजनीतिक संदेश दे रहा है। यह दिखाता है कि उद्धव ठाकरे अब फिर से हिंदुत्व की राह पर चलकर अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं। आंदोलन अभी चल रहा है और इसके आगे के प्रभाव देखने बाकी हैं।
इस आंदोलन के साथ ही फडणवीस सरकार पर आरोप है कि वे राम के नाम पर राजनीति करते हैं लेकिन असली मुद्दों से भागते हैं। अयोध्या ट्रस्ट पर सवाल उठे तो UP सरकार ने FIR दर्ज की। लेकिन महाराष्ट्र में फडणवीस क्यों चुप हैं? क्या क्योंकि केंद्र में भाजपा है? महाराष्ट्र की जनता पूछ रही है – हमारा पैसा कहां गया? मंदिर निर्माण में पारदर्शिता कहां है? देवेंद्र फडणवीस कुशल नेता माने जाते हैं। लेकिन विपक्ष कहता है कि उनकी सरकार में सत्ता बचाने के लिए सब कुछ हो रहा है। हाल के महीनों में शिवसेना में टूट हुई। कई नेता शिंदे गुट में गए। उद्धव ठाकरे कहते हैं कि राम मंदिर के चढ़ावे का पैसा शायद इसी काम में लगाया गया।
फडणवीस सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए थी, लेकिन वे उद्धव पर तंज कस रहे हैं।नागपुर कार्यक्रम में उद्धव ने कहा – “फडणवीस जी, राम रक्षा पढ़ना आपका काम नहीं, राम भक्तों का काम है। हम राम रक्षक हैं।” यह सीधा हमला था। फडणवीस सरकार में कानून-व्यवस्था, विकास, किसान कर्ज माफी जैसी बातें अटकी पड़ी हैं। राम मंदिर मुद्दा उठाकर उद्धव ठाकरे हिंदुत्व की राजनीति में वापसी कर रहे हैं। वे कहते हैं कि असली हिंदुत्व बालासाहेब का था, जो सत्ता के लिए आस्था का इस्तेमाल नहीं करता था।
फडणवीस सरकार डबल इंजन वाली है – केंद्र और राज्य दोनों भाजपा प्रभाव। लेकिन महाराष्ट्र में विपक्ष मजबूत है। उद्धव ठाकरे, शरद पवार, कांग्रेस मिलकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। राम रक्षा आंदोलन सिर्फ धार्मिक नहीं, राजनीतिक भी है। यह दिखाता है कि फडणवीस सरकार हिंदुत्व पर एकाधिकार नहीं रख सकती। उद्धव ठाकरे का यह कदम उनके लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हाल में कुछ सांसद गए, पार्टी कमजोर हुई। लेकिन राम मुद्दे पर वे हिंदुत्व की छवि वापस ला रहे हैं।
फडणवीस सरकार को सावधान रहना चाहिए। महाराष्ट्र की जनता विकास चाहती है, लेकिन आस्था पर चोट बर्दाश्त नहीं करेगी।यह आंदोलन जारी रहेगा। उद्धव जी पूरे महाराष्ट्र घूमेंगे। फडणवीस सरकार को जवाब देना पड़ेगा। राम रक्षा स्तोत्र पढ़ना अच्छा है, लेकिन राम भक्तों के पैसे की रक्षा करना ज्यादा जरूरी है। फडणवीस सरकार अगर सच्ची हिंदुत्ववादी है तो पारदर्शिता दिखाए, जांच तेज करे, दोषियों पर कार्रवाई करे। वरना जनता पूछेगी – राम की रक्षा कौन करेगा.



