डांगावास हत्याकांड: आरोपियों के बरी होने पर राजस्थान में घमासान

- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने अभियोजन की गंभीर खामियों पर उठाए सवाल
- अरोपियों को बरी किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण : गहलोत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नागौर के डांगावास हत्याकांड में अदालत द्वारा सभी 4० आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई और सीबीआई जांच के बाद भी पीडि़तों को इंसाफ न मिलना जांच व अभियोजन की गंभीर खामियों को दर्शाता है। गहलोत ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीडि़त परिवारों को न्याय दिलाने के लिए सरकार को ऊपरी अदालत में अपील की प्रक्रिया मजबूती से आगे बढऩी चाहिए। साल15 में इस हत्याकांड में जमीन विवाद को लेकर पांच दलितों की हत्या कर दी गई थी।
गहलोत ने एक बयान में कहा, नागौर के डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद आया फैसला बेहद चिंताजनक है। 15 में जमीन विवाद में पांच दलितों समेत छह लोगों की निर्मम हत्या हुई थी और अब एससी-एसटी विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। पीडि़त परिवारों का सवाल जायज है, अगर 40 आरोपी बरी हो गए तो इन छह लोगों की हत्या आखिर किसने की? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच और सुनवाई के बावजूद इंसाफ नहीं मिलना जांच और अभियोजन की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।’’ इस आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद पंचायती एवं नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी। ओबीसी आरक्षण के लिए वार्डों का निर्धारण आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा। राज्य सरकार अगले कुछ दिनों में आरक्षण के लिए लॉटरी निकालने की तैयारी कर रही है। राज्य चुनाव आयोग आरक्षण-लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थानीय निकाय चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करेगा। आयोग ने राजस्थान उच्च न्यायालय को इस संभावित समय-सीमा के बारे में सूचित किया था। उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने नगरपालिका और पंचायत चुनाव कराने में देरी पर नाराजगी जताई थी और ओबीसी आयोग को पांच अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
ओबीसी कमीशन ने निकाय आरक्षण की रिपोर्ट सौंपी
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने पंचायती एवं नगरीय निकायों में ओबीसी आरक्षण के संबंध में अपना प्रतिवेदन सरकार को सौंप दिया है। इससे राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग के अध्यक्ष मदनलाल भाटी और उसके सदस्यों ने बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात कर उन्हें अपना प्रतिवेदन सौंपा।
भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं
उन्होंने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर भी निशाना साधा। गहलोत ने कहा, भाजपा सरकार के शासन में 11 साल पहले ऐसी घटना होना और अब उन्हीं के शासन में प्रतिकूल फैसला आना दिखाता है कि भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं है। दलित समाज के साथ हुए इस अन्याय में जवाबदेही तय होनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा दलित समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए खड़ी रही है। पीडि़त परिवारों को न्याय दिलाने के लिए इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की प्रक्रिया मजबूती से आगे बढऩी चाहिए, राज्य सरकार को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।



