लखनऊ हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन, LDA वाइस चेयरमैन को नोटिस

जून के महीने में लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगी थी. घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को अवमानना ​​का नोटिस जारी किया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जून के महीने में लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगी थी. घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को अवमानना ​​का नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने जून में लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी आग की घटना का संज्ञान लिया है. इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी. कोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन को अवमानना ​​का नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस उन रिहायशी इमारतों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के कोर्ट के निर्देशों का पालन ना करने के आरोप में जारी किया है, जिनका इस्तेमाल गैर-रिहायशी कामों के लिए किया जा रहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि घटना के बाद तैयार की गई SIT रिपोर्ट को सुनवाई की अगली तारीख पर सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के सामने पेश किया जाए. सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच को सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि जिस इमारत में यह जानलेवा घटना हुई, उसे गिराने का आदेश 10 मई 2016 को दिया गया था. हालांकि बताया जाता है कि दो महीने से भी कम समय बाद तकनीकी कारणों से प्राधिकरण ने खुद ही उस आदेश को वापस ले लिया था, जिसके बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई.

कमर्शियल इलाकों में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर जताई चिंता
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने जयपुर में कमर्शियल इलाकों में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर चिंता जताई. सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण को तीन हफ़्ते के भीतर इस मुद्दे पर उठाए गए कदमों का ब्योरा देने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने साफ किया कि किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में किए गए आवंटन से कोई कानूनी अधिकार पैदा नहीं होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने JDA द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली अपीलों के लंबे समय से लंबित रहने पर भी नाराज़गी जताई. अदालत ने कहा बिना अंतिम फैसले के अंतरिम आदेश काफी समय तक लागू रहे. सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकरण को भी निर्देश दिया है कि वो ऐसे सभी मामलों का फैसला दो हफ़्ते के भीतर करे. साथ ही समय-सीमा के पालन के लिए पीठासीन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार और जवाबदेह ठहराया.

मामले पर आगे विचार करेगा SC
जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा कोचिंग संस्थानों के संचालन और रिलोकेशन के संबंध में उठाए गए सुधारात्मक कदमों पर अपना जवाब पेश करने के बाद इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट आगे विचार करेगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी इमारतों का किसी अन्य व्यक्ति या संस्थान को आवंटन कार्यवाही के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगा. सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हालांकि सरकार ने कोचिंग संस्थानों को रिलोकेट करने के लिए खास बहुमंजिला इमारतें बनाई थीं, फिर भी वे संस्थान कमर्शियल इलाकों से ही चल रहे थे.

Related Articles

Back to top button