खड़गे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर कांग्रेस का हल्लाबोल, BJP पर दलित-विरोधी सोच का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सूरत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है.. कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के इस कदम को लेकर तीखा विरोध जताया है.. कांग्रेस का आरोप है कि जिस मंच पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाषण दिया.. वहां भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा शुद्धिकरण की कार्रवाई किया जाना केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं.. बल्कि सामाजिक भेदभाव वाली मानसिकता को प्रदर्शित करता है..
जिसको लेकर कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच विचारों.. और नीतियों को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है.. अलग-अलग दल अपनी विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर जनता के बीच अपनी बात रखते हैं.. लेकिन किसी नेता के भाषण देने के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति के लिए उचित नहीं माना जा सकता.. कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना समाज में मौजूद भेदभावपूर्ण सोच की ओर संकेत करती है.. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लंबे समय से सामाजिक न्याय, समानता.. और संविधान के मूल्यों को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं.. ऐसे में उनके भाषण के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली.. कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे अपमानजनक बताते हुए भाजपा के खिलाफ विरोध दर्ज कराया..
कांग्रेस का आरोप है कि यह केवल किसी मंच या स्थान की सफाई का मामला नहीं है.. बल्कि इसके पीछे एक ऐसी मानसिकता दिखाई देती है.. जिसमें किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान के आधार पर उसके साथ भेदभाव किया जाता है.. पार्टी ने इसे दलितों और वंचित समाज के सम्मान से जोड़ते हुए भाजपा की कथित सोच पर सवाल उठाए हैं.. कांग्रेस का कहना है कि देश का संविधान हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान देता है.. और किसी भी प्रकार का सामाजिक भेदभाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.. इसी मुद्दे को लेकर गुजरात के सूरत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया.. कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और इस घटना पर अपना आक्रोश व्यक्त किया.. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि किसी भी राजनीतिक दल को इस तरह की कार्रवाई को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.. क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है..
सूरत में हुए प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध अपनी जगह है.. लेकिन किसी नेता की सामाजिक पृष्ठभूमि या पहचान के आधार पर उसके प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता.. कांग्रेस ने कहा कि राजनीतिक असहमति को वैचारिक.. और लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए.. न कि इस तरह के प्रतीकात्मक कदमों के माध्यम से.. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को जोड़ने के लिए सामाजिक समानता.. और भाईचारे की जरूरत है.. ऐसे समय में जब समाज के हर वर्ग को समान अधिकार.. और सम्मान देने की बात की जाती है.. तब किसी सार्वजनिक मंच को शुद्ध करने जैसी घटना कई सवाल खड़े करती है.. कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से समाज के कमजोर.. और वंचित वर्गों के बीच गलत संदेश जाता है..
पार्टी ने यह भी कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है.. लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ यह है कि अलग-अलग विचारधाराओं, समुदायों.. और सामाजिक वर्गों के लोग एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें.. राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हर नागरिक.. और हर जनप्रतिनिधि को सम्मान मिलना चाहिए.. कांग्रेस के मुताबिक, यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है.. इस पूरे विवाद के केंद्र में शुद्धिकरण शब्द है.. जिसे कांग्रेस ने सामाजिक भेदभाव की मानसिकता से जोड़कर देखा है.. पार्टी का आरोप है कि यदि किसी नेता के मंच पर आने के बाद उस स्थान को शुद्ध करने की आवश्यकता महसूस की जाती है.. तो यह समाज में समानता और सम्मान के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करता है.. कांग्रेस ने इसे लेकर भाजपा से जवाब मांगने की बात कही है..



