गुजरात की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल, 30 साल BJP के बाद भी 15वें नंबर पर राज्य
गुजरात की शिक्षा व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर बड़ा हमला बोला है... मनोज सोरठिया ने शिक्षा के क्षेत्र में...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने राज्य की शिक्षा नीति.. और सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स यानी PGI 2.0 रिपोर्ट में गुजरात के प्रदर्शन को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं.. उन्होंने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है.. रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात को कुल 60 प्रतिशत अंक मिले हैं.. और राज्यों की रैंकिंग में उसका स्थान काफी नीचे खिसक गया है.. जिस राज्य को कुछ समय पहले तक शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में गिना जाता था.. वही गुजरात अब देशभर के राज्यों की सूची में 15वें स्थान पर पहुंच गया है..
वहीं यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.. क्योंकि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से सत्ता में है.. करीब तीन दशक से राज्य की सत्ता पर बीजेपी का शासन है.. ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय तक सरकार में रहने के बावजूद राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है.. क्या सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, बुनियादी सुविधाओं.. और शिक्षा के परिणामों को लेकर किए गए दावे जमीन पर पूरी तरह असरदार साबित नहीं हो रहे हैं..
इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता मनोज सोरठिया ने गुजरात की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है.. उन्होंने गुजरात की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार सिर्फ चार साल के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को नंबर वन बनाने की दिशा में आगे बढ़ा सकती है.. तो गुजरात में बीजेपी के करीब 30 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था में वह बदलाव क्यों नहीं दिखाई देता.. जिसकी उम्मीद राज्य के लोगों ने की थी..
मनोज सोरठिया का यह बयान ऐसे समय में आया है.. जब शिक्षा व्यवस्था को लेकर गुजरात की रैंकिंग पर चर्चा तेज हो गई है.. उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य का सवाल किसी एक पार्टी या सरकार तक सीमित नहीं है.. यह सीधे तौर पर लाखों विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है.. इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने के बजाय सरकार को ठोस नीतियों, बेहतर योजनाओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए.. दरअसल, किसी भी राज्य की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है..
अगर बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है.. तो वे आगे चलकर बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं.. शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं है.. इसमें स्कूलों की आधारभूत सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, समान अवसर.. और उच्च शिक्षा तक पहुंच जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं..



