इडियट कहने पर भाजपाइयों को क्यों लगी मिर्ची? राउत ने बता दिया सच

विपक्ष लगातार इसकी आलोचना करने लगा मोदी सरकार सवालों के घेरे में आ गई। राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय से नोटिस मिला है। यह मामला जुलाई का है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जमकर तानाशाही चल रही है। यहां आलोचना करने वालों को जमकर सरकारी सिस्टम का सामना करना पड़ता है।

जरा सा सरकार को आइना क्या दिखा दो सरकार को ऐसी मिर्ची लगती है कि या तो जांच एजेंसियों को पीछे लगा दिया जाता है या फिर उन्हें नोटिस थमा दिया जाता है। खैर ऐसा ही कुछ हुआ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ जिसके बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

विपक्ष लगातार इसकी आलोचना करने लगा मोदी सरकार सवालों के घेरे में आ गई। राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय से नोटिस मिला है। यह मामला जुलाई का है। जब लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा चल रही थी। राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रा ने लोगों को तीन तरह का बताया—स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त। स्टूडेंट खुले दिमाग वाले होते हैं। इडियट वे लोग हैं जो खुद को सब कुछ जानने वाला और भगवान समझने लगते हैं। अंधभक्त वे हैं जो ऐसे इडियट को भगवान मान लेते हैं।

राहुल ने साफ कहा कि वे किसी सांसद या व्यक्ति का नाम नहीं ले रहे थे। सिर्फ छात्रा की बात दोहरा रहे थे।बीजेपी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। स्पीकर ने उन शब्दों को रिकॉर्ड से हटा दिया। उसके बाद बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और अमित शाह पर भी आरोप लगाए। अब विशेषाधिकार समिति ने राहुल गांधी को नोटिस भेजा। उनसे 28 अगस्त तक जवाब मांगा गया।

लेकिन इस नोटिस के सामने आने के बाद सियासी हड़कंप मच गया है। इसी बीच राहुल गांधी का समर्थन करते हुए शिवसेना यूबीटी के नेता और सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय से नोटिस मिलने पर बीजेपी को घेरा हैं। संजय राउत ने मुंबई में कहा कि अब उन्हें क्यों नोटिस भेजा गया है? उन्होंने किसी को ‘इडियट’ कहा, क्या ‘इडियट’ कहना कोई असंसदीय शब्द है?

हमारे गृह मंत्री, जिसने जंतर-मंतर पर छोटे बच्चों के खिलाफ पैलेट गन चलवाई, आंसू गैस छोड़े, कील वाली लाठियों से उन्हें मारा, यदि वे संसद में नहीं आते हैं और जवाब नहीं देते हैं तो उन्हें आप क्या कहेंगे? संजय राउत ने कहा कि आमिर खान की एक फिल्म भी आई थी, ‘3 इडियट’। उसे बहुत से पुरस्कार मिले हैं। अगर ‘इडियट’ शब्द असंसदीय है तो इस फिल्म को सेंसर ने मंजूर कैसे किया? गौरतलब हो कि राहुल गांधी के इडियट कहने पर संसद में काफी हंगामा हुआ था।

वहीं सत्ताधरी दल के नेताओं की भी प्रतिक्रिया इस मामले पर आई। इसी बीच कैबिनेट मंत्री दिलीप जायसवाल ने लोकसभा की विशेष अधिकार समिति द्वारा राहुल गांधी को नोटिस दिए जाने पर कहा, “राहुल गांधी बेचैन आत्मा हो गए हैं। इतने दिन से राजनीति करने के बाद सत्ता नहीं मिलने के कारण वो इतने बेचैन हो गए हैं कि वो अपनी भाषा की मर्यादा भूल गए हैं, संस्कार भूल गए हैं।

इसके साथ ही भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता आर. पी. सिंह ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मिली नोटिस पर कहा, “लोकसभा के अंदर अगर आपने किसी पर भी आरोप लगाए हैं, तो उसके आपको तथ्य पेश करने पड़ते हैं।

गौरतलब है कि यह मामला लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित “असंसदीय और अपमानजनक” टिप्पणियों से जुड़ा है।

लोकसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव एच. राम प्रकाश द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार यह कार्रवाई बीजेपी के दो सांसदों की शिकायतों पर की गई है। बीजेपी सांसद सांसद संजय जायसवाल और अनुराग ठाकुर ने 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। सांसद अनुराग ठाकुर जुलाई, 2026 को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। अब जिसे लेकर बवाल मचा हुआ है।

यह नोटिस बीजेपी की कमजोरी दिखाता है। जब सरकार के पास जवाब नहीं होता तो वह प्रक्रिया का सहारा लेती है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया था कि बात किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं थी। फिर भी नोटिस भेज दिया गया। इससे साफ है कि सत्ता पक्ष विपक्ष को परेशान करना चाहता है। लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाना ठीक नहीं।

बीजेपी सरकार बार-बार ऐसा करती दिख रही है। छात्रों की लड़ाई जारी है। पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठ रही है। सरकार नोटिस भेजकर ध्यान भटकाना चाहती है। लेकिन जनता समझ रही है कि असली समस्या कहां है।

राहुल गांधी का बयान छात्रों की भावना को दर्शाता था। सरकार को उस पर गंभीरता से सोचना चाहिए था। इसके बजाय नोटिस का रास्ता चुना गया। यह बीजेपी शासन की तानाशाही का जीता जागता उदाहरण है। गौरतलब है कि यह मामला अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Related Articles

Back to top button