सांसद-विधायकों पर क्रिमिनल केस का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 14 CM समेत 4,000 नाम क्यों चर्चा में?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे ने नेताओं पर लंबित आपराधिक मामलों की तस्वीर सामने रखी है. 326 मौजूदा सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ मामले घोषित किए हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे ने नेताओं पर लंबित आपराधिक मामलों की तस्वीर सामने रखी है. 326 मौजूदा सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ मामले घोषित किए हैं.

देश की राजनीति से जुड़ा एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक ताजा हलफनामे के मुताबिक, मौजूदा 326 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं.

इनमें लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसद शामिल हैं. इतना ही नहीं, देश के 14 मुख्यमंत्रियों ने भी अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी चुनावी हलफनामों में घोषित की है. यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब सुप्रीम कोर्ट सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे को लेकर सुनवाई कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट में मामले में एमिकस क्यूरी यानी अदालत की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने यह हलफनामा दाखिल किया है. इसमें सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की स्थिति और उनके जल्द निपटारे के लिए सुझाव दिए गए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं. आंकड़े एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR से लिए गए हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की निगरानी के बावजूद 2018 से मामलों का लंबित बोझ लगभग बना हुआ है.

326 मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं. 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं. सांसदों और विधायकों से जुड़े 4,192 मामले लंबित हैं.

लोकसभा के 251 और राज्यसभा के 75 सांसद मामलों का सामना कर रहे हैं. 2025 में 1,243 मामलों का निपटारा, जबकि 1,050 नए मामले दर्ज हुए.

लोकसभा के 251 सांसदों पर मामले

हलफनामे के मुताबिक, 543 लोकसभा सदस्यों में से 251 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की है. यानी मौजूदा लोकसभा के एक बड़े हिस्से के खिलाफ किसी न किसी तरह का आपराधिक मामला लंबित है.

इनमें से 170 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं, जिनमें दोष साबित होने पर पांच साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है. राज्यसभा में भी तस्वीर बहुत अलग नहीं है. 233 राज्यसभा सदस्यों में से 75 ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इनमें 40 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले बताए गए हैं.

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