झारखंड छात्र आंदोलन: देवेंद्र महतो का अनशन खत्म, बोले- सरकार का फैसला बड़ी जीत
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परीक्षा रद्द किए जाने के ऐलान के बाद आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन खत्म कर दिया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परीक्षा रद्द किए जाने के ऐलान के बाद आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन खत्म कर दिया. उनका अनशन तुड़वाने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह समेत कई लोग पहुंचे थे.
झारखंड की राजधानी रांची में करीब एक महीने से जारी छात्र आंदोलन के दौरान कई दौर की बातचीत के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL और TDPL परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान कर दिया.
जिसके बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म कर दी. सरकार के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए महतो ने कहा कि ऐसे कानून बनाए जाने चाहिए, जिनसे यह पक्का हो सके कि किसी भी छात्र के साथ धोखाधड़ी या ठगी न हो.
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सदन में ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए ताकि किसी भी छात्र के साथ धोखाधड़ी या धोखा न हो. सरकार को इसकी गारंटी देनी चाहिए. हालांकि, इसके बाद भी छात्रों का कहना है कि सीबीआई से जांच के मुद्दे पर वो कोई समझौता नहीं करेंगे.
मंत्रियों ने खत्म कराया अनशन
दरअसल सीएम हेमंत सोरेन की तरफ से किए गए ऐलान के बाद बीते लगभग तीन हफ्ते से अनशन कर रहे आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दिया है.
झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने देर रात जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जाकर युवाओं का अनशन खत्म कराया. इस दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि आज हमने बहुत सम्मानजनक तरीके से अपना उपवास खत्म किया है.
शांतिपूर्ण विरोध को रोकने का ऐलान
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडे और हमारे विधायक जयराम महतो की संयुक्त पहल की बदौलत, जिन मांगों के लिए हम संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे, उन्हें मान लिया गया है.
नतीजतन, हम आज अपने शांतिपूर्ण विरोध को रोकने की घोषणा कर रहे हैं. हालांकि हम आगे के सुधारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे, लेकिन आज दिखाई गई उदारता के लिए हम झारखंड सरकार, मुख्यमंत्री और राहुल गांधी का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हैं.
सरकार ने एक बहुत बड़ा निर्णय लिया: महतो
देवेंद्र महतो ने कहा कि आज लिया गया निर्णय आसान नहीं था, खासकर इसलिए क्योंकि CGL परीक्षा की नियुक्तियां और जॉइनिंग की प्रक्रियाएं पहले ही हो चुकी थीं और छात्रों की ओर से विरोधाभासी अपीलें आ रही थीं, जिनका दावा था कि उनके मामले सही हैं. फिर भी, एक ईमानदार और निष्पक्ष जांच करके और सभी के लिए आगे का रास्ता निकालकर, सरकार ने एक बहुत बड़ा निर्णय लिया है.



