UAE में प्राइवेट नौकरी करने वालों के लिए नया नियम, नोटिस पीरियड को लेकर हुआ बदलाव

संयुक्त अरब अमीरात में प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नोटिस पीरियड से जुड़े नियमों को लेकर अहम...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः संयुक्त अरब अमीरात में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए नौकरी छोड़ने या रोजगार अनुबंध खत्म करने से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं.. खास तौर पर अगर कोई कर्मचारी नौकरी बदलना चाहता है.. या कंपनी उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म करना चाहती है.. तो नोटिस पीरियड के नियमों को समझना बहुत जरूरी है.. बिना नियम जाने नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है..

यूएई के प्राइवेट सेक्टर में रोजगार से जुड़े नियम Federal Decree-Law No. 33 of 2021 और उसके संशोधनों के तहत आते हैं.. इसके Article 43 में रोजगार अनुबंध खत्म करने के लिए नोटिस से जुड़े नियम बताए गए हैं.. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि नौकरी छोड़ने का फैसला केवल कर्मचारी ही नहीं.. बल्कि नियोक्ता यानी कंपनी भी कर सकती है.. कानून के अनुसार रोजगार अनुबंध का कोई भी पक्ष किसी वैध कारण के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर सकता है.. लेकिन इसके लिए दूसरे पक्ष को लिखित नोटिस देना जरूरी होता है..

यूएई के नियमों के मुताबिक नोटिस पीरियड कम से कम 30 दिन और अधिकतम 90 दिन का हो सकता है.. आपके लिए वास्तविक नोटिस पीरियड कितना होगा.. यह आपके रोजगार अनुबंध में लिखा होता है.. यानी किसी कर्मचारी के कॉन्ट्रैक्ट में 30 दिन का नोटिस हो सकता है.. किसी में 60 दिन और किसी में 90 दिन का.. इसलिए नौकरी छोड़ने का फैसला लेने से पहले अपने Employment Contract को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है.. केवल कंपनी में काम करने के दौरान मौखिक रूप से कही गई बात पर भरोसा करने के बजाय यह देखना चाहिए कि.. आपके लिखित कॉन्ट्रैक्ट में नोटिस पीरियड कितने दिनों का तय किया गया है.. मान लीजिए आपके कॉन्ट्रैक्ट में 60 दिन का नोटिस पीरियड लिखा है.. ऐसी स्थिति में सामान्य तौर पर नौकरी छोड़ने के लिए आपको कंपनी को लिखित रूप में नोटिस देना होगा.. और तय प्रक्रिया के अनुसार नोटिस पीरियड पूरा करना होगा..

नोटिस देने के बाद यह नहीं माना जाता कि नौकरी उसी दिन खत्म हो गई.. कानून के अनुसार नोटिस पीरियड के दौरान रोजगार अनुबंध लागू रहता है. कर्मचारी को उस अवधि के लिए अपने अंतिम वेतन के आधार पर पूरा वेतन पाने का अधिकार होता है.. साथ ही अगर कंपनी कर्मचारी से काम जारी रखने को कहती है.. तो कर्मचारी को नोटिस पीरियड के दौरान काम करना होता है.. इसका मतलब यह है कि अगर आपने नौकरी छोड़ने का नोटिस दिया है.. तो केवल नोटिस देने के बाद काम पर जाना बंद नहीं किया जा सकता.. जब तक नोटिस पीरियड पूरा नहीं होता.. तब तक कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें लागू रहती हैं.. इसी वजह से नौकरी बदलने की योजना बना रहे कर्मचारियों को नई नौकरी की तारीख.. और पुरानी कंपनी के नोटिस पीरियड के बीच सही तालमेल बनाना चाहिए.. अगर नई कंपनी तुरंत जॉइन करने के लिए कह रही है.. तो पहले अपने मौजूदा नियोक्ता से बात करना बेहतर होता है..

वहीं कुछ परिस्थितियों में दोनों पक्ष आपसी सहमति से नोटिस पीरियड को कम कर सकते हैं.. या उससे छूट पर सहमत हो सकते हैं.. लेकिन ऐसा करते समय कर्मचारी के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है.. कानून में यह भी प्रावधान है कि नोटिस पीरियड से जुड़ी शर्त दोनों पक्षों के लिए समान होनी चाहिए.. जब तक कि कोई व्यवस्था कर्मचारी के हित में न हो.. इसलिए अगर कर्मचारी और कंपनी दोनों सहमत हैं कि नोटिस पीरियड पूरा किए बिना नौकरी खत्म की जा सकती है.. तो इस सहमति को लिखित रूप में रखना बेहतर है.. केवल मौखिक बातचीत के आधार पर नौकरी छोड़ना बाद में विवाद पैदा कर सकता है.. अब सबसे महत्वपूर्ण बात.. अगर कर्मचारी या कंपनी तय नोटिस पीरियड का पालन नहीं करती.. तो नोटिस पीरियड अलाउंस यानी नोटिस अवधि के बदले मुआवजे का नियम लागू हो सकता है..

 

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