जज पर आरोपों को लेकर बोले CJI, मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता फैसला
CJI ने कहा, "ACJ को पद पर बनाए रखने, ट्रांसफर करने या कोई अन्य प्रशासनिक कार्रवाई करने का फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकरण की ओर से पूरे मामले पर उचित विचार करने के बाद ही लिया जाएगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: CJI ने कहा, “ACJ को पद पर बनाए रखने, ट्रांसफर करने या कोई अन्य प्रशासनिक कार्रवाई करने का फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकरण की ओर से पूरे मामले पर उचित विचार करने के बाद ही लिया जाएगा.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने कल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने चिंताओं पर ध्यान दिया है.
पद पर मौजूद जज के खिलाफ ऐसे आरोपों से “स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए सख्ती से” निपटा जाना चाहिए. साथ ही यह भी कहा कि कोई भी फैसला मीडिया के जरिए नहीं दिया जा सकता है.
जस्टिस मेहता ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे अपने 3 अलग-अलग पत्रों में जस्टिस शर्मा के कार्यकाल में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और चुनिंदा मामलों को लिस्ट करने यानी केस लिस्टिंग) का आरोप लगाया था. CJI सूर्य कांत, इस समय जर्मनी और इंग्लैंड की 4 दिन की यात्रा पर हैं, ने एक बयान जारी कर कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट के ACJ पर लगाए गए आरोपों को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता. जज को भी अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिया जाना चाहिए.
उचित विचार के बाद ही कोई फैसलाः CJI सूर्य
अपने बयान में CJI ने कहा, “कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पद पर बनाए रखने, उनका ट्रांसफर करने या उनके खिलाफ कोई अन्य प्रशासनिक कार्रवाई करने का फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकरण की ओर से पूरे मामले पर उचित विचार करने के बाद लिया जाएगा.” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट जजों से जुड़ी निजी तौर पर की गई शिकायतों का निपटारा “मीडिया में एक-दूसरे के खिलाफ किए गए दावों” के जरिए नहीं होने दे सकता.
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि वे और कॉलेजियम के अन्य सदस्य हाल में कई नियुक्तियों के बाद अन्य हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर पहले से ही काम कर रहे हैं, और उन्होंने “जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लिखे गए पत्रों में उठाई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है”.
महज आरोप लगा देने से ही फैसला नहींः CJI
हालांकि, CJI ने कहा कि “पत्रों की सामग्री पर सार्वजनिक तौर पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता”. उन्होंने आगे कहा, “महज आरोप लगा दिए जाने से ही इसे जज के खिलाफ कोई फैसला नहीं माना जा सकता. मामले की जांच सही स्तर पर की जा रही है और इस प्रक्रिया में जस्टिस मेहता की ओर से दी गई जानकारी और जस्टिस शर्मा के जवाब, दोनों पर ध्यान दिया जाएगा.”
जस्टिस मेहता ने मुख्य न्यायाधीश से राजस्थान हाई कोर्ट का प्रमुख बनाने के लिए किसी दूसरे राज्य से तुरंत एक चीफ जस्टिस नियुक्त करने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पैसे वाले मुकमेबाजों को फायदा पहुंचाने के लिए केस लिस्टिंग में हेरफेर कर रहे हैं. जस्टिस मेहता ने सबूत के तौर पर कई मामले पेश किए हैं और जस्टिस शर्मा पर अगले महीने रिटायर होने से पहले अपनी प्रशासनिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
यह आरोप ऐसे समय लगाए गए जब सीजेआई जर्मनी यात्रा पर हैं जहां वह न्यायिक द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा कर रहे हैं. लेकिन इस बीच जस्टिस मेहता के पत्रों को लेकर उनकी ओर से मीडिया में खबर आने के बाद बयान जारी किया गया है.



