कफ सिरप मामले में भोला प्रसाद को राहत नहीं, हाई कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 25 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 25 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
उत्तर प्रदेश के चर्चित कोडीनयुक्त कफ सिरप से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से भोला प्रसाद को झटका लगा है. हाई कोर्ट ने भोला प्रसाद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. भोला प्रसाद फरार आरोपी शुभम जायसवाल के पिता हैं. इससे पहले भी भोला प्रसाद और अन्य की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है.
दरअसल,भोला प्रसाद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 25 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और जमानत याचिका खारिज कर दी.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल-जज बेंच ने की। इस फैसले से जेल में बंद भोला प्रसाद को कोई राहत नहीं मिली. जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल इस मामले में 80 से ज्यादा आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं.
इससे पहले सुनवाई में क्या हुआ?
इससे पहले सुनवाई के दौरान आरोपियों की दलीलों का जवाब देते हुए, एडिशनल एडवोकेट जनरल अनूप त्रिवेदी और एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट (AGA) फर्स्ट पारितोष कुमार मालवीय ने तर्क दिया था कि भले ही आरोपियों के पास ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत जारी लाइसेंस थे, लेकिन उन्होंने उनकी शर्तों और नियमों का उल्लंघन किया था. लाइसेंस सिर्फ मेडिकल इस्तेमाल के लिए दिए गए थे, फिर भी आरोपी नशीले पदार्थों के व्यापार के लिए प्रोडक्ट के गैर-कानूनी स्टोरेज और बिक्री में शामिल थे.
बांग्लादेश तक फैला था ड्रग तस्करी का नेटवर्क
प्रतिबंधित सामान की तस्करी देश के कई राज्यों और पड़ोसी देश बांग्लादेश तक की जा रही थी. नतीजतन, लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन और नशे के तौर पर इस्तेमाल के लिए कफ सिरप बेचने की वजह से, सभी मामले NDPS एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं.
दूसरी ओर, आरोपियों की तरफ से सीनियर एडवोकेट जी.एस. चतुर्वेदी और एडवोकेट निपुण सिंह, सुशील शुक्ला, रघुवंश और अन्य ने तर्क दिया कि यह मामला NDPS एक्ट के दायरे में नहीं आता है और सरकार ने गलत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. याचिकाकर्ताओं के पास कफ सिरप बेचने के लाइसेंस हैं, जो उन्हें राज्य सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दिए थे.



