बरेली: नदी सिर्फ 100 मीटर दूर थी, फिर भी यहीं बनी करोड़ों की टंकी; अब पूरा ढांचा नदी में
बरेली के शेरगढ़ बैरमनगर में 3.97 करोड़ की लागत से बन रही पानी की टंकी किच्छा नदी के कटान में समा गई। हर घर नल योजना में निर्माण और स्थल चयन पर सवाल उठे।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जिस परियोजना से गांव-गांव पानी पहुंचाने का सपना देखा गया था, वही परियोजना अब किच्छा नदी के कटान में समा गई। शेरगढ़ के बैरमनगर में करीब 3.97 करोड़ रुपये की लागत से बन रही ओवरहेड पानी की टंकी नदी में दफन हो गई। घटना के बाद निर्माण स्थल के चयन, तकनीकी आकलन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
दो साल में नदी 500 से 100 मीटर दूर पहुंची
स्थानीय लोगों के मुताबिक, किच्छा नदी पिछले दो-तीन वर्षों में कटान करते हुए निर्माण स्थल के करीब पहुंच गई। बताया जा रहा है कि पहले नदी करीब 500 मीटर दूर थी, जो अब महज 100 मीटर की दूरी पर रह गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों से नदी किनारे पिचिंग और सुरक्षा कार्य कराने की मांग भी की थी।
सवाल यह है कि ऐसी स्थिति के बावजूद करोड़ों की परियोजना के लिए स्थल का चयन कैसे किया गया और क्या निर्माण से पहले मिट्टी व कटान का पर्याप्त तकनीकी परीक्षण हुआ था?
पाइपलाइन बिछी, टोंटियां लगीं, लेकिन टंकी ही नहीं बची
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और करीब 70 फीसदी घरों में टोंटियां भी लग चुकी हैं। परियोजना से जुड़े कुछ महंगे उपकरणों को खतरा भांपकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद पानी की आपूर्ति के लिए जरूरी टंकी को बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो सके।
नतीजा यह है कि ग्रामीणों को योजना के तहत पानी मिलने का इंतजार बना हुआ है।
जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
टंकी नदी में समाने के बाद अब निर्माण स्थल के चयन से लेकर डिजाइन, नींव, गुणवत्ता, भुगतान और सुरक्षा व्यवस्था तक की जांच की मांग उठ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष तकनीकी जांच हो।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की परियोजना को नदी के कटान से बचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
रिपोर्ट – सुनील सक्सेना, बरेली
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