पंजाब कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, चन्नी-रंधावा-वड़िंग संग पायलट ने दिखाया एकजुटता का संदेश
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच सचिन पायलट के नेतृत्व में चंडीगढ़ में एकजुटता दिखी. गुलजार सिंह की मौत को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक ही मंच पर चन्नी, रंधावा और वड़िंग दिखे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच सचिन पायलट के नेतृत्व में चंडीगढ़ में एकजुटता दिखी. गुलजार सिंह की मौत को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक ही मंच पर चन्नी, रंधावा और वड़िंग दिखे.
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी के बीच आज चंडीगढ़ में पार्टी की एकजुट तस्वीर दिखाई दी. नए प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने पंजाब का प्रभार संभालने के बाद पहली बार बड़े कार्यक्रम की कमान संभाली और आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. मुद्दा था संगरूर के दिड़बा निवासी गुलजार सिंह की मौत का. कांग्रेस का आरोप है कि गुलजार सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था.
इसके बाद उन्हें (गुलजार सिंह) कथित तौर पर अपमान और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा और बाद में उन्होंने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी. कांग्रेस ने इस मामले में हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से हटाने और पूरे मामले की समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है, लेकिन इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी तस्वीर सिर्फ चीमा के खिलाफ कांग्रेस का विरोध नहीं रही. चन्नी, रंधावा और राजा वड़िंग जैसे अलग-अलग गुटों के नेता एक साथ सड़क पर उतरे.
गुलजार सिंह की मौत से गरमाई सियासत
संगरूर जिले के दिड़बा के रहने वाले गुलजार सिंह की मौत ने पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. कांग्रेस के मुताबिक, गुलजार सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से पंजाब में खुलेआम बिक रहे नशे को लेकर सवाल किया था. इस सवाल का वीडियो भी सामने आया था. इसके बाद उनकी मौत हो गई. कांग्रेस और परिवार की ओर से आरोप लगाए गए कि सवाल पूछने के बाद गुलजार सिंह को अपमान का सामना करना पड़ा.
हालांकि हरपाल सिंह चीमा ने किसी गलत काम से इनकार किया है. मामले में पुलिस कार्रवाई और जांच चल रही है. सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, कई लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.
हरपाल चीमा पर कांग्रेस का सीधा निशाना
कांग्रेस इसे पंजाब में नशे के खिलाफ सरकार की कथित विफलता से जोड़ रही है. कांग्रेस का आरोप है कि अगर कोई आम नागरिक सरकार के मंत्री से नशे के खिलाफ सवाल पूछता है और उसके बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. इसी को लेकर सचिन पायलट ने हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से हटाने और मामले की समयबद्ध तथा स्वतंत्र जांच की मांग की थी.
सभी गुट एक साथ नजर आए
13 सितंबर को पायलट ने घोषणा की थी कि वह पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ चंडीगढ़ में चीमा के आवास तक 15 सितंबर को मार्च करेंगे. आज पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुट एक साथ नजर आए. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का गुट हो… पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का गुट हो… या फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का खेमे… सभी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
पहली परीक्षा में सचिन पायलट पास?
यह तस्वीर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व और संगठन को लेकर अलग-अलग खेमों के बीच खींचतान रही है. सचिन पायलट के सामने सबसे पहली बड़ी चुनौती यही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन गुटों को एक चुनावी टीम में बदला जाए. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के चंडीगढ़ स्थित आवास की ओर बढ़ने लगे. पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की.
हिरासत में लिए गए नेता
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया. काफी देर तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और आगे बढ़ने की कोशिश होती रही. इसके बाद पुलिस ने सचिन पायलट समेत कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. हिरासत के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया. चंडीगढ़ पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए पहले से ही कई प्रमुख सड़कों पर यातायात के लिए विशेष इंतजाम किए थे.
2027 की लड़ाई के लिए क्यों अहम?
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं. यानी अब कांग्रेस के पास संगठन को मजबूत करने और सरकार के खिलाफ मुद्दे तैयार करने के लिए सीमित समय है. आम आदमी पार्टी सत्ता में है. कांग्रेस मुख्य विपक्षी ताकतों में है. बीजेपी भी पंजाब में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है. ऐसे में कांग्रेस के लिए दो मोर्चे हैं. पहला- आप सरकार के खिलाफ लगातार राजनीतिक मुद्दे खड़े करना. दूसरा- अपने ही संगठन में एकजुटता कायम करना.
नशा बनेगा मुद्दा
गुलजार सिंह का मामला कांग्रेस को दोनों मोर्चों पर एक साथ मौका देता है. एक तरफ सरकार पर हमला… दूसरी तरफ पार्टी के अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने का अवसर. पंजाब की राजनीति में नशा लंबे समय से बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है. हर विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल नशे की समस्या को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधते रहे हैं, लेकिन इस बार गुलजार सिंह की मौत के मामले ने इस मुद्दे को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों रूप दे दिया है.



