स्टेम सेल थेरेपी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ऑटिज्म पर क्लिनिकल ट्रायल का पूरा डेटा तलब

SC ने केंद्र से ASD के लिए स्टेम सेल थेरेपी के क्लिनिकल ट्रायल का ब्योरा मांगा है. कोर्ट ने पूछा कि जो मरीज पहले से इलाज करा रहे हैं उन्हें रेगुलेटेड रिसर्च फ्रेमवर्क में लाने के लिए क्या कदम उठाए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: SC ने केंद्र से ASD के लिए स्टेम सेल थेरेपी के क्लिनिकल ट्रायल का ब्योरा मांगा है. कोर्ट ने पूछा कि जो मरीज पहले से इलाज करा रहे हैं उन्हें रेगुलेटेड रिसर्च फ्रेमवर्क में लाने के लिए क्या कदम उठाए.

सुप्रीम कोर्ट ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लिए स्टेम सेल थेरेपी के क्लिनिकल ट्रायल का पूरा ब्योरा मांगा है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि जनवरी में आए फैसले के बाद से क्या ऐसे ट्रायल के लिए कोई आवेदन मिला है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि जो मरीज पहले से ही इस विवादित इलाज से गुज़र रहे हैं, उन्हें रेगुलेटेड रिसर्च फ्रेमवर्क में लाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी.

जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने मंगलवार (15 सितंबर) को केंद्र को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लिए स्टेम सेल थेरेपी के सभी मंज़ूर या प्रस्तावित क्लिनिकल ट्रायल का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया. इसमें शामिल संस्थानों और उनकी क्षमता की जानकारी भी मांगी गई है कि क्या वो उन मरीजों को जगह दे सकते हैं जो 30 जनवरी को कोर्ट का फैसला आने के समय यह थेरेपी ले रहे थे.

जनवरी में कोर्ट ने क्या कहा था
यह आदेश इसलिए अहम है क्योंकि कोर्ट ने जनवरी में फैसला सुनाया था कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लिए स्टेम सेल थेरेपी को रूटीन क्लिनिकल सर्विस या कमर्शियल इलाज के तौर पर नहीं दिया जा सकता. इसे केवल मंज़ूर और मॉनिटर किए जाने वाले क्लिनिकल ट्रायल या रिसर्च सेटिंग के तहत ही किया जाना चाहिए.

स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य उपचार के तौर पर मंजूरी नहीं
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार भी स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य उपचार के तौर पर मंजूरी नहीं दी गई है. कुछ निर्धारित बीमारियों में इसे मानक उपचार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति है, जबकि अन्य स्थितियों में इसका इस्तेमाल केवल शोध के लिए किया जा सकता है। ऑटिज्म इन स्वीकृत स्थितियों में शामिल नहीं है.

मार्च में जारी एक आदेश में, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा, ‘स्टेम सेल थेरेपी को नियमित अभ्यास में केवल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमोदित संकेतों की सूची में निर्दिष्ट रोग स्थितियों के लिए ही मानक उपचार के रूप में अनुमति दी जाएगी. अनुमोदित संकेतों के अलावा, स्टेम सेल थेरेपी केवल अनुसंधान के संदर्भ में ही स्वीकार्य है’.

एफडीए ने रक्त प्रत्यारोपण के लिए दी मंजूरी
अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने स्टेम सेल थेरेपी को केवल रक्त प्रत्यारोपण के लिए ही मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ब्लड कैंसर और कुछ खून एवं प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी विकारों का उपचार करना है. अन्य सभी स्थितियों के लिए यह प्रायोगिक चरण में है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड पर नहीं रखा है कि पहले से स्टेम सेल थेरेपी करा रहे मरीजों को किस तरह नियमन के दायरे में लाया जाएगा. कोर्ट ने केंद्र को अनुपालन हलफनामे में यह बताने को कहा है कि क्या सक्षम नियामक प्राधिकरण के पास ASD के लिए स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित शोध या क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति लेने के लिए कोई आवेदन किया गया है. अगर आवेदन किए गए हैं तो केंद्र को उनकी संख्या, आवेदन की तारीख, संबंधित संस्थानों के नाम और प्रत्येक आवेदन की मौजूदा स्थिति बतानी होगी.

जांच का दायरा केवल सरकार तक ही सीमित नहीं है. कोर्ट ने ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी में स्टेम सेल के लिए माता-पिता के फोरम, थेरेपी प्रदान करने वाले संस्थानों और क्लीनिकों, और रोगियों के माता-पिता, अभिभावकों या देखभाल करने वालों से पूछा है कि क्या उन्होंने भी जनवरी के फैसले के बाद से चल रहे उपचार को विधिवत अनुमोदित और विनियमित नैदानिक परीक्षण के दायरे में लाने के लिए कदम उठाए हैं.

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